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व्यापारियों के समझ से परे जीएसटी, सीए के साथ जोड़-घटाव में जुटे

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व्यापारियों के समझ से परे जीएसटी, सीए के साथ जोड़-घटाव में जुटे
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। केंद्र सरकार ने शुक्रवार मध्यरात सांसद भवन से घंटी बजाकर पूरे देश में जीएसटी लागू कर दिया। जीएसटी लागू होने के साथ बड़े शो-रूम और रेस्टोरेंट इस पर अमल करना भी शुरू कर दिए। हालांकि, आम लोगों के लिए जीएसटी के फायदे जहां अभी दूर की कौड़ी हैं, वहीं व्यापारियों के लिए जीएसटी सिरदर्दी बना हुआ है। शनिवार को ज्यादातर व्यापारी सीए को बुलाकर उनके साथ जीएसटी के गुणा-भाग समझते नजर आए। कहीं पर व्यापारी जीएसटी के नियमों को समझ रहे थे तो कहीं पर इससे बचने के तरीके। जीएसटी का सबसे ज्यादा असर कपड़ा बाजार पर दिखा। जीएसटी लागू होने के बाद शनिवार को कपड़े की ज्यादातर दुकानें बंद रही, जो दुकानें खुली भी, वहां पर व्यापारी दिनभर खाली बैठकर सीए के साथ जीएसटी पर मंत्रणा करने में लगे रहे। शनिवार को ग्राहकों ने भी कपड़ा बाजार से दूरी बनाए रखी, इसलिए जिन व्यापारियों ने दुकानें खाली, वे भी शाम को खाली हाथ वापस लौटे। पटेल कपड़ा मार्केट के प्रधान योगेश भुगड़ा कपड़ा व्यापारी नीरज, सुरेंद्र पसीजा, रवि चोपड़ा, सुखविंद्र, कंवन भान, अरविंद जैन के साथ बैठकर सीएम से जीएसटी के नियमों की जानकारी लेते नजर आए। यहां पर व्यापारी सीए से जीएसटी जमा करने से लेकर ग्राहकों से टैक्स वसूलने के तरीकों पर जानकारी ली। योगेश ने कहा कि जीएसटी ने कपड़ा व्यापारियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। व्यापारी समझ ही नहीं पा रहे हैं कि उन्हें किस तरह से, किसको और कब-कब टैक्स जमा करना है। इसके अलावा अभी तक हमें जीएसटी का फार्मेट ही नहीं मिल है, इसलिए व्यापार पूरी तरह ठप्प है। जब तक हमें इसके बारे में पूरी समझ नहीं हो जाती, हम व्यापार नहीं कर सकते। क्योंकि जीएसटी में कई ऐसे नियम भी हैं जो व्यापारियों की एक गलती से उन्हें जेल भिजवा सकते हैं। जीएसटी को लेकर सभी के मन में डर बना है। वहीं कपड़ा व्यापारी सतीश कुमार ने कहा कि अभी तक जीएसटी की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है, इसलिए मेनूअली बना रहे हैं।
-पुराने माल को खपाने के तरीके ढूंढ रहे व्यापारी-
अभी तक जीएसटी का विरोध कर रहे व्यापारी अब इससे बचने के तरीके निकालने में जुट गए हैं। शनिवार को मार्केट में हर तीसरी दुकान पर एक सीए बैठा नजर आया। जिसके पास तीन-चार दुकानदार बैठकर जीएसटी से बचने और पुराना स्टॉक खत्म करने के तरीकों के बारे में पूछते नजर आए। गुड़मंडी के एक दुकान पर बैठे सीए ने दुकानदारों को जहां पुराने स्टॉक को बैक डेट में बेचने का ज्ञान दिया, वहीं नेहरू प्लेस की एक दुकान पर बैठे सीए ने दुकानदारों को दो से तीन फर्म खोलकर माल को खपाने की जानकारी दी। ज्यादातर व्यापारी जीएसटी को लेकर अभी भी डरे हुए हैं, इसलिए वे सीए के साथ मंत्रणा करके भी कोई कदम उठाने से डर रहे हैं।
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आम लोगों की पहुंच से दूर जीएसटी के फायदे
जीएसटी लागू होने के बाद भी शनिवार को बाजारों में पहले जैसे ही क्रय-विक्रय चलता रहा। दैनिक उपयोग की जिन वस्तुओं का मूल्य जीएसटी लागू पर कम हुआ है, वे भी पहले के मूल्य पर ही बिक रही हैं। शहर के जनरल स्टोर हों या किराना स्टोर हर जगह समान पहले के प्रिंट रेट पर ही दिया जा रहा है। यहां तक की विशाल मेगा मार्ट में भी ग्राहकों को जीएसटी का लाभ नहीं मिल पा रहा। शनिवार को विशाल मेगा मार्ट में टूथपेस्ट, चाय, कॉफी, मसाला, साबुन, तेल जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी पहले के रेट पर ही मिलती नजर आई। यहां समान खरीदने वाले ग्राहकों को जीएसटी का लाभ नहीं मिल सका। इसी तरह दुकानदार बर्तन, स्वास्थ्य, स्टेशनरी, फुटवियर्स व खाने-पीने का समान भी धड़ल्ले से बचते नजर आए। समान खरीद पर कुछ दुकानदार जहां ग्राहकों को मैनुअल बिल थमाते नजर आए, वहीं कुछ बिना बिल के ग्राहकों को धड़ल्ले से समान बेचते दिखे।
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