किसानों के विरोध के चलते शुगर मिल को सील नहीं कर पाई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम
-भारतीय किसान यूनियन और गन्ना किसानों ने किया विरोध
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अमर उजाला ब्यूरो
इंद्री। एक और जहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने इंद्री के भादसों में स्थित पिकाडली डिस्टलरी को सील चुकी है, वहीं, किसानों के विरोध के चलते शुगर मिल को बिना सील किए ही वापस लौटना पड़ा। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान व गन्ना सघर्ष समिति प्रधान रामपाल चहल की अध्यक्षता में किसानों ने धरना दिया। रतन मान ने कहा कि शुगर मिल को किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने देंगे। जरूरत पड़ी तो खुद मिल को चलाएंगे। किसानों के इस विरोध के चलते शुगर मिल कर्मचारियों, भाकियू और प्रदूषण विभाग के अधिकारियों की एक कमेटी एसडीएम की अगुवाई में डीसी करनाल के पास पहुंची। काफी देर चली मीटिंग के बाद इस बात पर सहमति बनी कि जब तक किसानों का गन्ना समाप्त नहीं हो जाता तब तक मिल चलता रहेगा। गौरतलब है कि इससे पहले दो अप्रैल को विभाग की टीम ने मोलासिस फीडिंग प्वाइंट पर सील लगाई थी। यह वह प्वाइंट है जहां से कच्चा माल शराब की फैक्टरी में सप्लाई होता है। इसी से फैक्टरी में शराब बनती है। तब दो दिन बाद शराब की फैक्टरी को सील करने का अल्टीमेटम दिया गया था।
क्या है मामला
भादसो की ग्राम सेवा समिति शुगर मिल व शराब की फैक्टरी के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं। समिति के प्रधान आत्मप्रकाश का कहना है कि शुगर मिल व शराब फैक्टरी के कारण प्रदूषण फैल रहा है। इससे आसपास के गांवों में लोगों का जीना दूभर हो गया है। इसके विरोध में वह एनजीटी में गए थे। आत्मप्रकाश ने बताया कि इस मामले में एनजीटी सख्त है। इसके बाद ही यह कार्रवाई हो रही है।
यह बोले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ शैलेंद्र अरोड़ा ने बताया कि हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। यह मामला एनजीटी में भी विचाराधीन है। शराब की फैक्टरी को सील कर दिया गया है, परंतु किसानों के गन्ने के चलते शुगर मिल को बंद नहीं किया गया है। उधर, गन्ना संघर्ष समिति के प्रधान रामपाल चहल का कहना है कि जब तक खेतों में गन्ना है, तब तक मिल चलेगा।