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रेलवे विभाग ने रजवाह पुलिया को किया बंद, रास्ता छोड़ा खुला, लोग जान जोखिम में डालकर कर रहे है लाइन पार, सात से ज्यादा लोगो ंकी ज

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। घोघड़ीपुर रेलवे ओवरब्रिज के नीचे रेलवे लाइन पार करते समय पिछले तीन माह में सात से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। क्योंकि रेलवे लाइन पार करने के लिए शहरवासी ओवरब्रिज की बजाए रेलवे लाइन पार कर रहे हैं। क्योंकि रेलवे ने अंडरपास बनाने के लिए रजवाह पुलिया को बंद कर दिया है, जिसके नीचे से शहरवासी निकलते थे। लेकिन उसका रास्ता बंद नहीं किया। इसी कारण छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग उस रास्ते से अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार कर दूसरी ओर जाते हैं। तभी ट्रेन की चपेट में आने से हर रोज कोई न कोई हादसा होता रहता है। शिव कॉलोनी वासी रेलवे लाइन की दूसरी ओर रजवाह पुलिया से निकलकर आते थे। जिसे रेलवे ने बंद कर दिया है। ऐसे में कॉलोनीवासियों के पास लाइन पार जाने के लिए घोघड़ीपुर ओवरब्रिज है। लेकिन समय की बचत के लिए कॉलोनीवासी अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार करते हैं। इस दस मिनट के समय की बचत को लेकर कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं लेकिन कॉलोनी वासियों को इससे कोई मतलब नहीं है। वे फिर भी दिन हो या रात वहीं से लाइन पार करते हैं। इतना ही नहीं शिव कॉलोनी के बच्चे भी वहीं से लाइन पार कर स्कूल जाते हैं। वहीं, शिव कॉलोनी के समीप अंडरपास कॉलोनीवासियों की बहुत पुरानी मांग थी। जो अब पुरी होने को है क्योंकि रेलवे ने अंडरपास का कार्य शुरू कर दिया है। जो एक करोड़ 87 लाख रुपये की लागत से बनेगा। इस अंडरपास के नीचे से बड़े वाहन कार-ट्रैक्टर आदि भी निकल सकते हैं। वहीं, पिछले पांच वर्ष की तुलना में इस वर्ष ट्रेन की चपेट में आने से 84 लोगों की जान गई है। यदि रेलवे रजवाह पुलिया के रास्त में टूटी हुई दीवार को भी बना दे तो यह हादसे कम हो सकते हैं।

पिछले पांच साल में इतने लोगों की गई जान।
- 2014 में 61
-2015 में 70
- 2016 में 62
- 2017 में 65
- 2018 में 84
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एक पिता अपनी दो बेटियों के साथ गंवा चुका है जान
घोघड़ीपुर रेलवे ओवरब्रिज के नीचे 25 अगस्त को एक पिता अपनी दो बेटियों के साथ जाने गंवा चुका है। बता दें रत्नगढ़ निवासी राकेश अपनी बेटी पलक(8) व तान्या(5) व पत्नी रीना के साथ दवाई लेने के लिए करनाल आया था। जब वह वापस घर जाने लगा तो रेलवे लाइन पार करते समय वह ट्रेन की चपेट में आ गया। राकेश के साथ उसकी दोनों बेटियों की मौत हो गई और उसकी पत्नी की जान बच गई।
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ट्रेन की चपेट में आने से 11 अक्टूबर को भी एक बाप-बेटी की हो गई थी मौत
रत्नगढ़ निवासी राकेश की तरह ही गांव गोंदर निवासी डिंपल भी 11 अक्तूबर को अपनी पत्नी सुदेश व सवा साल की बेटी दिवांशी के साथ उसी जगह से लाइन पर कर रहा था। अचानक वह भी ट्रेन की चपेट में आ गया। जिसमें डिंपल व सवा साल की बेटी दिवांशी की मौत हो गई।
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एक ही जगह पर लगातार हो रहे हादसों से रेलवे नहीं दे रहा सबक
पिछले कुछ महीनों से लगातार घोघड़ीपुर ओवरब्रिज के नीचे व रजवाह पुलिया के समीप रेलवे लाइन पार करते समय लोग ट्रेन की चपेट में आ रहे हैं और करीब सात से ज्यादा लोगों की जान उस जगह पर जा चुकी है। इस बारे में जीआरपी और रेलवे विभाग को भी पता है। लेकिन इन लोगों की जान जाने के बाद भी रेलवे विभाग कोई सबक नहीं ले रहा। अभी भी उन जगहों पर लाइन पार करने के लिए न कोई संकेतिक चिह्न लगाए और न ही उस क्रॉसिंग को बंद किया।
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रेलवे ने अंडरपास का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इसलिए रजवाह पुलिया को बंद किया गया है। कॉलोनीवासी वहां से रेलवे लाइन पार करते हैं तो उस रास्ते को बंद कर दिया जाएगा।
अजय मलिक, सीनियर इंजीनियर, रेलवे, करनाल।
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