अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। जीटी रोड स्थित बसताड़ा टोल प्लाजा शुरू से ही विवादों के कारण सुर्खियों में है। अब ताजा मामला पिछले साढ़े ती साल से लोकल वाहनों को नि:शुल्क निकलने की दी गई छूट बंद करने को लेकर है। कंपनी का दावा है कि टोल प्लाजा घाटे में चल रहा है, इस कारण सभी वाहन चालकों से टैक्स वसूला जाएगा।
एनएचएआई के आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2009 से लेकर अब तक टोल कंपनी का यह टोल टैक्स दो गुणा कलेक्शन कर रहा है। वर्ष 2009 में प्रति टोल से करीब एक अरब रुपये एकत्रित होता था, जबकि इस समय यह आंकड़ा दो अरब रुपये सालाना से आगे जा चुका है। गंभीर बात ये है कि कंपनी का राजस्व तो लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कंपनी सुविधाएं नहीं बढ़ा रही है। यात्रियों के लिए सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
बता दें कि करनाल में टोल प्लाजा वर्ष 2002 से चल रहा है। पहले यह टोल नीलोखेड़ी के पास स्थित गांव समानाबाहू के पास था। करीब साढ़े तीन साल पहले ये प्लाजा घरौंडा के गांव बसताड़ा के पास शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि, शिफ्टिंग के समय भी घरौंडा के लोगों और आसपास के ग्रामीणों ने इसका विरोध किया गया था, लेकिन उस समय प्रशासन व कंपनी द्वारा लोगों को विश्वास दिलाया गया था कि उनके वाहनों को टैक्स से छूट दी जाएगी और लोकल वाहनों की आईडी देखने के बाद उन्हें नि:शुल्क जाने दिया जाएगा। यह छूट करीब साढ़े तीन साल चली भी, लेकिन एक माह पहले अचानक कंपनी ने टोल प्लाजा पर नोटिस चस्पा दिया कि लोकल आईडी वाले या तो पास बनवाएं या फिर टैक्स दें, निशुल्क सेवा बंद कर दी गई है। इसके बाद से ही स्थानीय लोग टोल कंपनी के विरोध में खड़े हो गए हैं। जांच पड़ताल करने पर टोल प्लाजा से होने वाली इनकम के आंकड़े अमर उजाला के हाथ लगे हैं।
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2009 से लेकर अब तक कंपनी की इस प्लाजा से टैक्स कलेक्शन की राशि दो गुणा हो गई है। पहले कंपनी साल में एक अरब रुपया कमाती थी, अब ये संख्या 2 करोड़ का आंकड़ा पार कर गई है। इस वर्ष अप्रैल, 2018 तक की बात करें तो इस दौरान कंपनी 56 करोड़, 83 लाख रुपये वसूल कर चुकी है। वहीं, सुविधाओं के नाम पर कंपनी के अधिकारियों की बोलती बंद हो जाती है।
वर्ष 2024 तक देगा होगा टैक्स
एनएचएआई के दस्तावेज इस बात की भी पुष्टि करते हैं कि इस टोल प्लाजा से शहरवासियों को पिंड जल्द ही छूटने वाला नहीं है। वर्ष 2002 से चल रहे इस टोल प्लाजा से वर्ष 2024 तक टैक्स वसूला जाएगा। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 11 मई, 2009 में हुए अनुबंध के अनुसार, आगामी 15 साल तक टोल की अवधि रहेगी। ऐसे में वर्ष 2024 तक करनाल व आसपास के लोगों को टोल टैक्स देना होगा।
वर्ष : करनाल टोल प्लाजा की आय
2009-10 : 1,02, 26, 11, 563
2010-11 : 1, 34, 12, 92, 681
2011-12 : 1,34, 55, 06, 225
2012-13 : 1,39,84,21,253
2013-14 : 1, 45, 60, 54, 605
2014-15 : 1, 68, 85, 58, 421
2015-16 : 2,22, 85,99, 344
2016-17 : 2, 00, 30, 46, 588
2017-18 : 56, 83, 87, 823 (अप्रैल तक)
कुल : 13,05, 24, 78, 503
नोट (ये आंकड़े एनएचएआई से लिए गए हैं)
मैं पंगा लेने से पीछे नहीं हटूंगा : चोपड़ा
मैं पहले भी जनता के साथ था और आज भी हूं और रहूंगा। जब साढ़े तीन साल लोकल वाहनों को नि:शुल्क सेवा मिली है तो अब क्यों नहीं? कंपनी की दादागिरी नहीं चलने दी जाएगी, अगर जनता के साथ कंपनी के कर्मचारियों व बाउंसरों ने धक्केशाही की तो वे मैं भी पंगा लेने से पीछे नहीं हटूंगा। टोल प्लाजा पर धरने पर बैठने वाला सबसे पहला व्यक्ति मैं होंगा। लोकल वाहनों के लिए टोल फ्री कराने को लेकर मैंने केंद्रीय परिवहन मंत्री को पत्र लिखा, मुझे उम्मीद है कि इसका समाधान निकलेगा। -अश्विनी चोपड़ा, सांसद, करनाल।