कर्जा मुक्ति के लिए किसानों का प्रदर्शन, 9 से जेल भरो आंदोलन
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। भारतीय किसान यूनियन ने मानव सेवा संघ के पार्क में पंचायत करके भाजपा की किसान विरोधी नीतियों का विरोध किया। इसके बाद किसान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सेक्टर 12 स्थित लघु सचिवाल पहुंचे। वहां ज्ञापन लेने पहुंचे सीटीएम को किसानों ने ज्ञापन देने से मना कर दिया और डीसी को किसानों के बीच आने की बात कही। किसानों ने सचिवालय में एक घंटा धरना दिया और बाद में सीटीएम सुशील मलिक को ही ज्ञापन सौंपकर चले गए। किसान पंचायत को संबोधित करते हुए सेवा सिंह आर्य ने कहा कि सरकार वो दिन भूल गई वोट लेने से पहले कहा करती थी कि किसानों की फसलों के लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिए जाएंगे। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू कर दिया जायेगा और इस देश के किसानों के अच्छे दिन आएंगे, क्योंकि आज तक की जितनी भी सरकारें आई उन्होंने किसानों को लूटा है। यह सोचकर किसानों ने भाजपा को वोट देकर सता में बैठाया था, लेकिन अब किसानों के इतने बुरे दिन आए कि वो पिछली सरकारों में भी नहीं थे। किसानों ने कर्ण पार्क से चलकर सरकार विरोधी नारे लगाते हुए रणधीर लेन, कल्पना चावला अस्पताल के सामने से होते हुए, अस्पताल चौंक से 2 सेक्टर लघु सचिवालय पहुंचे। वहां पर किसानों ने एक घंटे तक धरना दिया। उन्होंने सरकार विरोधी नीतियों का खुलकर बखान किया। जब ज्ञापन लेने के लिए सीटीएम सुशील मलिक को ज्ञापन देने से मना कर दिया। किसाने ने डीसी के किसानों के बीच आने की बात कही, इसके बाद किसानों ने सचिवालय में धरना दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने चेताया कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो 9 अगस्त से जेल भरो आंदोलन शुरु करेगी। इस मौके पर पूर्व प्रधान जय कुमार, चौ. कबूल सिंह, अम्बावता गुट के प्रदेश अध्यक्ष शमशेर सिंह दहिया, बलविन्द्र सिंह बाजवा, अजीत सिंह काहलो, गुरमुख सिंह, मास्टर अजीत सिंह, चौ. मलखान सिंह, सैक्रेट्री टेकचन्द, जीवन सिंह असन्ध ब्लाक प्रधान, माईचन्द कारसा, अजीत सिंह जाम्बा, बाबूराम करनाल ब्लाक प्रधान, कैप्टन महीपाल राणा, स. सुक्खा सिंह, मलूक सिंह, छत्तरपाल, मा. रामकुमार आदि सैैंकड़ों किसानों ने भाग लिया। ---------------------बॉक्स ये हैं किसानों की मांगें 1. किसानों को फसलों के लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिए जाएं ताकि किसानों की स्थिति ठीक हो सके व लागत पर 50 प्रतिशत लाभ दिया जाए। 2. किसानों को कर्ज मुक्त किया जाए व आगे बिना ब्याज कर्ज दिया जाये। 3. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को जल्द से जल्द से लागू किया। 4. भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1.1.2014 सैक्शन 14/2 के तहत हरियाणा के किसानों को जमीन का मालिकाना हक रेवेन्यु रिकार्ड में दर्ज किया जाए। 5. हरियाणा के उन सभी किसानों को बीपीएल में शामिल किया जाए जिन किसानों के पास 3 एकड़ से कम जमीन है। 6. किसानों को 60 साल के बाद पैंशन कर्मचारियों की तर्ज पर दी जाए।