शिक्षा नियमावली 134ए सहित विभिन्न मांगों को लेकर सभी निजी स्कूल संगठनों ने बुधवार को सीएम सिटी में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के चलते जिलेभर के प्राइवेट स्कूल बंद रहे। प्रदर्शन व बंद में सीबीएससी और हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से संबंधित सभी प्राइवेट स्कूल शामिल हुए। प्राइवेट स्कूलों की हड़ताल के कारण करीब ढाई लाख विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हुई।
प्राइवेट स्कूल संचालकों के साथ-साथ अध्यापकों व प्रिंसिपल्स ने भी हड़ताल में शामिल होकर अपनी एकता का परिचय दिया। करीब जिलेभर के 375 निजी स्कूल एक साथ बंद रहे। एक साथ भारी संख्या में सड़कों पर उतरे शिक्षकों व निजी स्कूल संचालकों की भारी भीड़ को देखते हुए लघु सचिवालय व करनाल की सड़कों पर भारी तादाद में पुलिस बल तैनात रहा। हड़ताल की खास बात यह रही कि यह हड़ताल उस वक्त हुई है जब विभिन्न स्कूलों में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं।
सुबह करीब 9.30 बजे जिलेभर के निजी स्कूल संचालक व अध्यापक जैसे ही करनाल में एकत्रित हुए तो सड़कों पर जाम की स्थिति पैदा हो गई। इस दौरान प्राईवेट स्कूल संगठनों ने एक स्वर में हरियाणा शिक्षा नियमावली की धारा 134ए को पूरी तरह से अवांछनीय, अव्यवहारिक व अप्रासंगिक बताते हुए से रद्द करने की मांग की। साथ ही प्राइवेट स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे व अन्य इक्यूपमेंट लगाए जाने का भी विरोध किया।
इतना ही नहीं इन सभी स्कूलों ने 10 साल पुरानी बसों की पासिंग नहीं करने का भी विरोध किया। विरोध प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर एसपी को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान काफी देर तक अध्यापकों ने लघु सचिवालय का घेराव किए रखा और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
फीस वाउचर जारी करें और बच्चों को दिलाए दाखिला
शिक्षकों ने मांग करते हुए कहा कि सरकार यदि गरीब बच्चों को सच में 134 ए के तहत दाखिला दिलाना चाहती है तो गरीब बच्चों को फीस वाउचर जारी करे। इस फीस वाउचर को सरकार जिस भी विद्यार्थी को देगी उसे निजी स्कूल उसके मनमर्जी के स्कूल में दाखिला देने के लिए तैयार हैं। यह वाउचर सरकार द्वारा उन्हें बच्चे को पढ़ाने के लिए दिए जाने वाली राशि का प्रमाण होगा। इससे किसी बच्चे को भटकने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी और बच्चों मेें हीन भावना भी नहीं आएगी। साथ ही निजी स्कूलों पर भी बोझ नहीं पड़ेगा।
हरियाणा रोडवेज की बसों पर भी लगे बैन
प्रदर्शन के दौरान निजी स्कूल संचालकों ने स्कूल बसों की अवधि 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष करने की घोर निंदा की। निजी स्कूल संचालकों ने कहा कि स्कूल बस 10 वर्ष में नई की नई रहती है। उन्होंने कहा कि हरियाणा रोडवेज की बस को 8 लाख चलने की अनुमति दी जाती है। लेकिन स्कूली बसें 10 साल में औसतन डेढ़ लाख किलोमीटर ही चल पाती हैं। चूंकि प्रतिवर्ष स्कूल 220 दिन लगते हैं और यह बसें 50-60 किलोमीटर से अधिक प्रतिदिन नहीं चलती। स्कूली बसों को भी वही कंपनी बनाती है, जोकि हरियाणा रोडवेज की बसों को। ऐसे में हरियाणा रोडवेज की बसों को भी बैन करना चाहिए, चूंकि कार्रवाई तो सभी पर समान ही होनी चाहिए।
ये हैं मुख्य मांगें
134 ए के तहत बढ़ाए गए कोटे को समाप्त करना, 10 साल या उससे पुरानी बसों को पासिंग की अनुमति देना व शिक्षण स्थानों पर लगाए गए प्रॉपर्टी टैक्स को कम करना निजी स्कूल संचालकों की प्रमुख मांगे हैं। हाल ही में सरकार ने 134 ए के तहत 10 प्रतिशत की जगह 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के निर्देश दिए थे। स्कूलों का तर्क है कि सरकार के इस फैसले से उनकी स्थिति बिगड़ जाएगी, चूंकि सरकार उन्हें इन विद्यार्थियों को पढ़ाने का कोई पैसा नहीं दे रही है। इसके अतिरिक्त प्राइवेट स्कूलों से कमर्शियल प्रॉपर्टी की तर्ज पर प्रॉपर्टी टैक्स लिया जा रहा है। एक एकड़ के बाद यदि एक वर्ग मीटर भी जगह बढ़ती है तो उसे दो एकड़ में काउंट करके टैक्स की वसूली की जा रही है, जोकि गलत है। उन्होंने कहा कि इसी कारण प्रत्येक स्कूल पर औसतन 10-10 लाख रुपये का बोझ पड़ा है। उन्होंने इस संशोधित करने की मांग की।
शिक्षा का बजट 17 हजार करोड़, हमें दें 25 प्रतिशत
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन संघ के साथ हड़ताल में शामिल संगठनों ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा का बजट 17 हजार करोड़ रुपये रखा गया है। यदि सरकार इसमें से हमें 25 प्रतिशत दे दे तो भी वे अपने स्कूलों में 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को नि:शुल्क दाखिला देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो उन्हें सामाजिक कार्य करने के लिए बोला जाता है, दूसरी तरफ उनकी गिनती कर्मिशयल में होती है। इसी कारण बिजली भी उन्हें कर्मिशयल रेट पर दी जा रही है।
शिक्षा और चिकित्सा में भेदभाव क्यों?
निजी स्कूल संचालकों ने कहा कि शिक्षा और चिकित्सा में एक ही प्रदेश में भेदभाव किया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में अच्छे इलाज नहीं होने के कारण सरकार ने कई प्राइवेट अस्पतालों को अपने पैनल पर लिया हुआ है। लेकिन किसी भी प्राइवेट स्कूल को सरकार अपने पैनल पर नहीं लेती। पैनल पर लिए हुए अस्पताल को सरकार सारा खर्च देती है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सरकार प्राइवेट स्कूलों को भी इसी तर्ज पर अपने पैनल में शामिल करे और गरीब बच्चों को दाखिला दिलाए।
ये रहे हड़ताल में शामिल
बंद को सफल बनाने में करनाल इंडीपेंडेट स्कूल एसोसिएशन के प्रधान आरएस विर्क एवं पदाधिकारी, अविनाश बंसल, रवि विर्क, आदित्य बंसल, डॉ. राजन लांबा, कुलजिंद्र मोहन बाठ, विक्रम चौधरी, संजय भाटिया, फेडरेशन ऑफ प्राईवेट स्कूल हरियाणा के प्रांतीय महासचिव सुशील शर्मा, जिला अध्यक्ष सुरजीत सुभरी, संजय पठानिया, वीरभान, सतपाल राणा, उमेश चुघ, राहुल सैनी, डीके शर्मा, आरएस धवन, सुरेंद्र चौहान, मदन मोहन, जसमेर सैणी, रवि शर्मा, जयप्रकाश जांबा, कुलदीप, ललित सरदाना, आशा ग्रोवर, संतोष नारंग, रजत नारंग तथा हरियाणा यूनाइटेड स्कूल एसोसिएशन के प्रधान विजेन्द्र मान, ब्लाक प्रधान के.एस. चीमा अजमेर सिंह, सुभाष श्योराण, लाभ सिंह, केएस लाठर, गोपी शर्मा, धर्मवीर काजल आदि विशेष रूप से शामिल रहे।
असंध और नीलोखेड़ी में भी दिखा असर
विभिन्न मांगों को निजी स्कूलों की हड़ताल का कस्बे में मिलाजुला असर रहा। बहुत से निजी स्कूज खुले रहे ओर बच्चों ने हर रोज की तरह की कक्षाएं लगाई। हालांकि इस दौरान सीबीएससी बोर्ड के लगभग सभी स्कूलों ने हड़ताल का समर्थन किया वहीं एचबीएसई बोर्ड के ज्यादातर स्कूलों खुले रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में तो लगभग सभी स्कूलों में कक्षाएं लगी। हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेश प्रवक्ता सुरेंद्र शास्त्री ने बताया कि हड़ताल के लिए चुना गया समय गलत रहा। इसीलिए हड़ताल में शामिल नहीं हो सके। इस समय एचबीएसई बोर्ड की दसवीं व बाहरवीं की परीक्षाएं चल रही है। इसी कारण एचबीएसई बोर्ड के स्कूल हड़ताल में शामिल नहीं हुए। हड़ताल करना संभव नहीं था क्योंकि बुधवार को भी बच्चों की परीक्षाएं थी। वहीं, नीलोखेड़ी में बंद का पूरा असर रहा।