प्रदेश में 32.2 प्रतिशत अंगूठा टेक (निरक्षर) पंच और सरपंचों ने पांच साल
तक गांव की सरकार चलाई है। अगर संख्या की बात करें तो 18891 लोग इस समय
प्रदेश की पंचायतों के सदस्य (पंच) हैं।
इसकी दूसरी तस्वीर यह है कि पूरे
प्रदेश की 6075 पंचायतों में से मात्र 2 प्रतिशत लोग 1168 ही ग्रेजुएट हैं
और पोस्ट ग्रेजुएट कुल 158 सदस्य हैं। खास बात यह है कि इस समय करीब 15
प्रतिशत सरपंच भी अनपढ़ हैं। यह तथ्य स्टेट इलेक्शन कमीशन के सर्वे के हैं।
वर्ष 2010 में पंचायती राज के चुनाव तीन चरणों में हुए थे।
प्रदेश की कुल
6075 पंचायतों के लिए 58608 सदस्य चुने गए। आंकड़ों की बात करें तो अनपढ़ता
इसमें सबसे ज्यादा हावी है। सर्वे रिपोर्ट बताती है कि पंच व सरपंचों में
सबसे ज्यादा संख्या अनपढ़ों की है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता
कि वर्तमान पंचायतों में अंडर मैट्रिक का परसेंटेज 38 प्रतिशत (22278) है।
साथ ही मैट्रिक 21.2 प्रतिशत (12400) सदस्य हैं। कुल सदस्यों में केवल छह
प्रतिशत (3697) ही बारहवीं पास हैं।
15 प्रतिशत सरपंच अनपढ़
इस
समय प्रदेश में कुल 6075 सरपंच हैं। इनमें से 15.8प्रतिशत (961) निरक्षर
हैं, वहीं अंडर मैट्रिक 35 प्रतिशत (2128), मैट्रिक 28.8 (1747), बारहवीं
10.9 (665), बीए सात प्रतिशत (426), पोस्ट ग्रेजुएट 1.9 ( 114) हैं। इसके
अलावा डॉक्टर, इंजीनियर और एडवोकेट 0.6 हैं। व्यवसाय के अनुसार बता करें तो
11 डॉक्टर, एडवोकेट 27, किसान 2839, बिजनेसमैन 344, हाउस वाइफ 1130,
समाजसेवी 907, एक्स सर्विस मैन 211 और मजबूर 544 व बेरोजगार व स्टूडेंट की
संख्या 62 हैं।
पिछली बार 85 प्रतिशत रहा था वोट
आंकड़ों के
अनुसार, वर्ष 2010 में कुल वोट 9912264 वोट पड़ी थी और वोट प्रतिशत 85.8
रहा था, जो वर्ष 2005 से पांच प्रतिशत ज्यादा थी। वर्ष 2000 में 77.6 वोट
प्रतिशत रहा था। अभी कई जिलों में मतदाता सूची तैयार नहीं हो पाई है। इस
कारण पंचायती चुनाव में देरी हो रही है।
शैक्षणिक योग्यता से तीन लाभ होंगे
हरियाणा
ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी के सलाहकार डॉ. रणबीर सिंह ने सरकार के
फैसले को सही बताते हुए कहा कि इसके मुख्य लाभ मिलेंगे। पहला, विवाद कम
होंगे और सरपंच को अधिकारी या फिर ग्राम सचिव गलत कार्य पर हस्ताक्षर नहीं
करा सकेंगे। दूसरा, सूचना का अधिकार नियम के तहत गांव की पंचायत का रिकार्ड
देने के लिए सरपंच सूचना अधिकारी होता है, ऐसे में यह अधिकार मजबूती
पकड़ेगा। तीसरा, सरपंच के पास अकाउंट का काम होता है, ऐसे में अकाउंट सही
तरीके से मैनेज हो सकेगा। डॉ. सिंह ने बताया कि इससे पहले वर्ष 2011 में
सरकार को सरपंचों की शैक्षणिक योग्यता तय पर सलाह दी गई थी।