अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। एक साल पहले स्मार्ट सिटी की परीक्षा पास करने के बाद भी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में है। पांच साल में 1295 करोड़ के काम होने थे। करनाल के हिस्से में आई केवल फाइलें। इनमें शहर को स्मार्ट बनाने की योजनाएं कैद हैं। इन पर काम तब शुरू होंगे जब पैसे आएंगे। सरकार ने राशि इसलिए जारी नहीं की, क्योंकि निगम अभी तक शुरुआती प्रक्रिया ही पूरी नहीं कर पाया। समय पर काम किया होता तो अब तक कई प्रोजेक्ट सिरे चढ़ जाते। चुनाव नजदीक आ चुके हैं, इसलिए लोगों को चिंता सताने लगी है। डर है कि कहीं यह प्रोजेक्ट अधर में ही नहीं लटक जाएं। लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है अभी तक सलाहकार व सेक्रेटरी की नियुक्ति ही नहीं हो सकी है। इसके बाद ही स्टाफ का चयन होना है। फिर इसके बाद प्रोजेक्ट पर काम शुरू होना है। अगर निगम के अधिकारियों की गति इसी तरह रही आने वाले कई साल में भी करनाल स्मार्ट सिटी नहीं बन सकेगा।
देरी के लिए जिम्मेदार कौन-कौन
1. कमिश्नर : करनाल स्मार्ट सिटी लिमिटेड की रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद कंसल्टेंट की नियुक्ति करनी थी। आज तक इसका चयन नहीं कर पाए। यह काम तत्कालीन कमिश्नर प्रियंका सोनी की अगुवाई में किया जाना था। समयबद्ध तरीके से काम होता तो अब तक सलाहकार चुनने के बाद आगामी काम शुरू हो जाता। उनकी ट्रांसफर के बाद आए कमिश्नर राजीव मेहता भी प्रोजेक्ट को गति नहीं दे पाए।
2. चीफ इंजीनियर : प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट यानि सलाहकार का टेंडर लगाने का काम चीफ इंजीनियर का है। इस पद पर अनिल मेहता कार्यरत थे। टेक्निकल बिड दिसंबर में खुल गई थी। इसमें चार कंपनियां आईं थीं। कंपनियों को परखने में ही छह महीने लगा दिए। इसके बाद तय हुआ कि कोई भी कंपनी नियम को पूरा नहीं करती। इसलिए दूसरी बार टेंडर लगाया है। मेहता की सेवानिवृत्ति के बाद दूसरे अधिकारी के ऑर्डर तो हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक कुर्सी नहीं संभाली। इस बार सात कंपनियां आई थी। इनमें से चार अभी मैदान में हैं।
3. डायरेक्टर : स्मार्ट सिटी लिमिटेड के चेयरमैन डायरेक्टर सीनियर आईएएस अधिकारी आनंद मोहन शरण हैं। कमिश्नर के स्तर पर यदि काम नहीं हो रहा था तो वह अपने स्तर पर एक्शन लेने में सक्षम हैं। उन्होंने भी आठ माह में जनवरी में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की पहली बैठक बुलाई। इसके बाद आज तक दूसरी बैठक नहीं हुई। इसलिए प्रोजेक्ट लेट होता चला गया। इसलिए प्रोजेक्ट लटकता चला गया।
1000 करोड़ में से 384 करोड़ जारी होने हैं
13 जून, 2017 को करनाल ने स्मार्ट सिटी की तीसरी परीक्षा पास की थी। 1000 करोड़ में से 200 करोड़ की पहली किस्त 2017-18 में मिलनी थी। कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं थी इसलिए पिछड़ गए। अब दो किस्त मिलाकर 384 करोड़ रुपये जारी होने हैं। यही हालात रहे तो इस वित्त वर्ष में भी राशि मिलना आसान नहीं होगा। रही बात पैसे को प्रोजेक्ट पर खर्च करना तो इसके लिए भी प्रोसेस काफी लंबा है।
प्रोजेक्ट जो शरू नहीं हो सके
1. मेला प्रोजेक्ट
काम लागत
रामलीला मैदान को मनोरंजन स्थल में बदलना था। - 9.98 करोड़
शहर का इतिहास बताने वाला स्थान व म्यूजियम। - 22.33 करोड़
2. पहल प्रोजेक्ट
काम : लागत
करनाल एग्रीटेक पैवेलियन। -101.16 करोड़
करनाल एग्रीटेक इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर।- 56.30 करोड़
3. प्रगति प्रोजेक्ट : काम : लागत
नगर निगम के पुराने भवन में बहुमंजिला इमारत। - 74.31 करोड़
मुगल कैनाल फेज-2 में कामर्शियल बिल्डिंग। - 275.32 करोड़
सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट। - 82.68 करोड़
डिजिटल साक्षरता सेंटर। - 7.47 करोड़
4. उत्थान प्रोजेक्ट
काम : लागत
स्मार्ट सीवरेज -49.28 करोड़
सौर ऊर्जा -38.45 करोड़
अंडर ग्राउंड बिजली की तार व स्मार्ट मीटरिंग- 32.13 करोड़
स्मार्ट वाटर सप्लाई सिस्टम - 36.95 करोड़
सरकार को गुमराह कर रहे अधिकारी : तितोरिया
वार्ड-14 के निवर्तमान पार्षद विनोद तितोरिया का कहना है कि अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे हैं। सीएम सिटी के अहम प्रोजेक्ट के साथ ऐसा खिलवाड़। इसके लिए लोग माफ नहीं करेंगे। केवल कागजों में करनाल को स्मार्ट बनाने के दावे किये जा रहे हैं, अधिकारी व नेता जिस जमीन पर उतरेंगे तो हकीकत सामने जाएगी। इतने बड़े प्रोजेक्ट में अधिकारियों की लापरवाही बर्दास्त नहीं की जानी चाहिए।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सेक्रेटरी के लिए भी आवेदन आमंत्रित किए जा चुके हैं। सरकार से राशि भी जल्द ही मिल जाएगी। निगम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर शुरू से ही गंभीर है, क्योंकि ये लंबा प्रोसेस है, इसलिए इसमें समय लग गया। -धीरज कुमार, ईओ, नगर निगम करनाल।