सप्ताह पहले मंत्री डाक्टर पर एफआईआर के आदेश दे गए थे, प्रशासन ने अभी तक जांच तक शुरू नहीं की
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सीएम सिटी के प्रशासन की कार्यप्रणाली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कष्ट निवारण समिति के अध्यक्ष व राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी भरे सदन में आदेश देते हैं कि मरीजों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले मेडिकल कालेज के डाक्टर व स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराओ। मौके पर ही आनन फानन में एसडीएम नरेंद्र मलिक की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच कमेटी बनाई जाती है। इसके बाद एक सप्ताह बीत गया, लेकिन कमेटी को न तो जांच याद और न ही डाक्टरों का मामला। पीड़ित को न्याय के लिए आज भी इंतजार है। उसे उम्मीद है कि मरीजों का इलाज नहीं करने वालों डाक्टरों का इलाज होगा, लेकिन कब, इसका जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है।
गौरतलब है कि 16 फरवरी को पंचायत भवन में कष्ट निवारण समिति की बैठक हुई थी। मंत्री नायब सिंह सैनी के सामने गांव सांभली वासी राहुल की शिकायत थी कि कल्पना चावला राजकीय चिकित्सा कॉलेज करनाल में वह अपने बीमार दादा को लेकर आए थे। उनके दादा की तबीयत बहुत खराब थी, जब उन्होंने डाक्टर से अपने दादा के ईलाज के बारे में निवेदन किया तो डाक्टर ने उनकी बात की अनदेखी कर दी और डाक्टर व स्टाफ ने यहां तक कह दिया कि अपने मरीज को यहां से तुरंत उठा लो। इस बारे में डा. परूथी ने रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट से संतुष्ट ना होकर राज्यमंत्री ने उपायुक्त को कहा कि ऐसे लापरवाह डाक्टरों के खिलाफ एफआईआर कराई जाए, जो डाक्टर काम नहीं करना चाहते उन्हें बेशक नौकरी छोड़क़र घर चले जाना चाहिए। इस पर डीसी ने मंत्री को बताया कि आरोपी डाक्टर के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए निदेशक को लिखा जाएगा, इतना ही नहीं एसडीएम की अध्यक्षता में जिला कष्ट निवारण समिति के मेम्बर विनोद कुमार, अशोक मदान की जांच कमेटी बनाई गई। इस जांच में पीड़ित राहुल को भी शामिल किया गया। आज मामले को एक सप्ताह बीत गया है, अभी तक न किसी ने पीड़ित राहुल संपर्क किया है और न ही आरोपी डाक्टर से। जांच क्या हुई होगी, इसका भी सीधा सा अंदाजा लगाया जा सकता है। सवाल ये है कि जब जिला प्रशासन के अधिकारी मंत्री के आदेश भी नहीं मानते फिर किसके आदेश मानेंगे और लोगों को न्याय कैसे मिलेगा?
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मंत्री ने डीसी से भी किया था सवाल
इस मामले में मंत्री इतना गुस्सा गए थे कि उन्होंने डीसी डा. आदित्य दहिया पर भी सवाल किया था, जब आप खुद मेडिकल कालेज गए थे तो क्यों नहीं डाक्टरों के व्यवहार में सुधार हो रहा है। मंत्री ने डीसी को आदेश दिये थे कि से डाक्टरों को बख्शा नहीं चाहिए, इनके खिलाफ एफआईआर कराएं और इनको चार्जशीट कराएं। इतना ही नहीं जिस डाक्टर को इलाज नहीं करना है, वो नौकरी छोड़कर अपने घर जा सकते हैं। सरकार ने कालेज पर करोड़ों रुपये इसलिए नहीं लगाए थे कि मरीज के साथ डाक्टर इस प्रकार का दुर्व्यवहार करेंगे। इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
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वर्जन
मेडिकल कालेज के डाक्टर व स्टाफ द्वारा पीड़ित के साथ दुर्व्यवहार करने की शिकायत के मामले में एसडीएम के नेतृत्व में जांच कमेटी जरूर बनाई गई थी, लेकिन अभी तक इस मामले में प्रशासन की ओर से हमारे पास कोई संदेश नहीं आया है। मैंने ख्रुद अपने स्तर पर डाक्टर के बारे में पता कराया है, लेकिन हम प्रशासन की जांच का इंतजार कर रहे हैं।
-अशोक मदान, जांच कमेटी के सदस्य।
वर्जन
मामले की जांच के लिए एसडीएम के नेेतृत्व में जांच कमेटी बनाई गई है। मैं इस मामले में एसडीएम से बात करूंगा और जल्द ही जांच कराई जाएगी। जांच में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दास्त नहीं की जाएगी। प्रशासन हर हाल में पीड़ित को न्याय दिलाएगा।
-डा. आदित्य दहिया, डीसी।
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