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तीन घंटे में शहर से निकला करीब 1500 टन कूड़ा

Sun, 07 May 2017 12:06 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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शनिवार को डेरे के लाखों अनुयायी करनाल महासफाई अभियान के लिए कमेटी चौक पर झाड़ू लेकर पहुंचे।
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दो दिन पहले उत्तर भारत के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पाने वाले करनाल में शनिवार को डेरा सच्चा सौदा ने महासफाई अभियान चलाकर इस शहर के चेहरे पर चिपके स्वच्छता के मुखौटे को उखाड़ फेंका। आम दिनों में 100 से 110 टन कूड़ा निकलने वाले इस शहर से शनिवार को तीन घंटे के अंदर ही 1500 टून कूड़ा निकल गया। डेरा के सेवादार 40 डिग्री तापमान के भीषण गर्मी में सफाई अभियान चलाकर शहर में कूड़ों का ढेर लगा दिया, जिसके निपटारन में ही प्रशासन के पसीने छूट गए।
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नगर निगम कर्मचारी देर रात तक कूड़े को शेखपूरा स्थित सोलिड वेस्ट मेनेजमैंट प्लांट पर पहुंचाने में लगे रहे। जिला प्रशासन के निपटान संशाधन कूड़ों के ढेर के आगे कम पड़ गए। संभावना जताई जा रही है कि ये कूड़े आगामी दो से तीन दिनों में सड़कों से हट पाएंगे।  शहर के कुछ इलाकों में सफाई अभियान सुबह करीब 9 बजे ही शुरू हो गया था। कई राज्यों से आए करीब पांच लाख सेवादार जैसे-जैसे करनाल पहुंचते गए, अपने निर्धारित जगहों पर पहुंचकर सफाई अभियान में जुट गए। लेकिन इसकी विधिवत शुरूआत डेरा सच्चा सौदा के मुखिया संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह और प्रदेश के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने झाडू लगाकर किया। जिसके बाद सेवादार पूरे शहर में फैलकर सफाई अभियान में जुट गए। करीब तीन घंटे तक चले इस सफाई अभियान के दौरान लाखों सेवादार 40 डिग्री के तापमान में शहर की सफाई कर कूड़े का ढेर लगा दिया।

सेवादारों ने सड़क गलियों से लेकर नालों के अंदर घूसकर उसमें पड़े कचरे को हाथों से साफ किया। कई सेवादार ऐसे भी थे जो गटर के अंदर तक घूसकर उसकी सफाई की। इस सफाई अभियान में महिलाएं भी पीछे नहीं थी। एक तरफ जहां पुरुष सेवादार नाले-नालियों के सफाई में लगे थे, वहीं महिला सेवादार जगह-जगह एकत्रित कूड़े और कचरे को समेटने में लगी थी।  
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सफाई में बच्चे भी नहीं रहे पीछे, लग्जरी गाड़ियों से सीधे गटर में उतरे
डेरा सच्चा सौदा के इस महा सफाई अभियान से जुड़ने में बच्चे भी पीछे नहीं रहे। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और यूपी से आए सेवादारों के साथ उनके बच्चे भी साथ आए थे। ये बच्चे अपने परिवार के साथ सफाई अभियान में हाथ बंटाते नजर आए। अपने मां के साथ सिरसा से 10 साल के सारंग और उनकी 6 साल की बहन साम्या से जब यहां आने का कारण पूछा गया तो, उन्होंने कहा कि साफ-सफाई करना अच्छा लगता है। वे पानीपत और कैथल में हुए सफाई अभियान में भी अपनी मां के साथ जा चुके हैं। वहीं सफिदो के अंकुर, कमल और नील ने भी सफाई करने को अपना पसंद बताया। वहीं, बड़ी बड़ी व लंबी लग्जरी गाड़ियों में श्रद्धालु करनाल पहुंचे और गाड़ियों से उतरते ही सीधे सफाई अभियान में जुट गए। इस संगत ने गटरों तक में उतरने में कोई गुरेज नहीं की। वहीं, आपस में गजब का संतुलन और अनुशासन बनाए रखा।
 
कूड़ा लिफ्टिंग में छूटा प्रशासन को पसीना
सफाई के दौरान सेवादारों द्वारा शहर से निकाले गए हजारों टन कूड़े के लिफ्टिंग में नगर निगम और प्रशासन के पसीने छूट गए। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने पहले से व्यवस्था कर ली थी। एक दिन पहले ही घरौड़ा, असंध, नीलोखेड़ी, इंद्री और तरावड़ी जैसी जगहों से जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्राली और डंपर मंगाया गया था। कूड़े के लिफ्टिंग और निपटारन के लिए 200 ट्रेक्टर-ट्राली, 40 जेसीबी, 30 डंपर व सैकड़ों टिप्पर व कूड़ा उठाने वाली रेहडिय़ां लगाई गई थी, लेकिन इसके बाद भी देर रात तक कूड़े को लिफ्ट नहीं किया जा सका। सफाई अभियान के हेड निगम कमश्रिर डॉ. आदित्य दहिया ने कहा कि एकत्रित कूड़े को पहले कोलेक्शन सेंटरों पर डम्प किया गया। वहां से ट्रकों के जरिए इसे प्लांट में पहुंचाया गया। इसके लिए निगम ने काछवा रोड़ पर डब्ल्यूजेसी पुल के पास, कैथल रोड पुल के पास, गप्पू वाला बाग, लव-कुश कॉलोनी, हांसी रोड, जाटों गेट खेड़ा मंदिर के पास, ओल्ड सब्जी मण्डी, हुडा ग्राउंड सेक्टर-12, मेरठ रोड, सेक्टर-4 व 5 व सेक्टर-33 के खाली पड़े मैदान में अस्थाई कोलक्शन सेंटर बनाए गए थे। -

जो काम नगर निगम तीन साल में न कर सका वह तीन घंटे में हुआ पूरा
नगर निगम करनाल शहर की सफाई के लिए जो काम तीन साल में नहीं कर सका वह डेरा के सेवादार तीन घंटे में कर दिखाया। शहर में कचरों से पटी नालियां और नाले शहर के लोगों के लिए मुसीबत बने हुए थे। इन नालों की तीन साल से सफाई नहीं हुई थी, हालांकि प्रशासन हर साल बारिश शुरू होने से पहले करोड़ों रुपए खर्च कर नालों की सफाई का प्लान बनाता था, लेकिन यह धरातल पर कम ही दिखाई देता था। इस साल भी नगर निगम व हुडा विभाग ने इन नालों की सफाई की योजना तैयार की थी, जो अगले माह से अमल में लाई जानी थी, लेकिन उसके पहले ही डेरा सच्चा सौदा के लाखों सेवादारों ने तीन घंटे मेहनत कर कचरे से अटे पड़े इन नालों की सफाई कर निगम के करोड़ों रुपए बचा लिए। साथ ही शहर के लोगों को बारिश के समय नालों और नालियों के जाम होने से होने वाली मुसीबत से भी बचा लिया।

कूड़े के निपटान में लग सकता है सप्ताह
शहर से निकला हजारों टन कूड़ा प्रशासन के लिए मुसीबत बन गया है। निगर निगम का शेखपूरा स्थित सोलिड़ वेस्ट मेनेजमैंट प्लांट की प्रतिदिन कूड़ा निपटाने की क्षमता 150 टन है। शहर से प्रतिदिन करीब 120 टन कूड़ा निकलता है, जिसका निपटारा किया जाता है। इस हिसाब से प्रतिदिन इस अतिरिक्त 1500 टन कूड़े में से प्रतिदिन सिर्फ 30 टन कूड़ा ही निपटाया जा सकेगा। अगर प्लांट पूरे क्षमता के साथ चलती रही तो कई दिन में इस कूड़े का निपटारा हो सकेगा। बता दें कि इस कूड़े को अलग से एक स्थान पर डलवाया गया है।
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