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Karnal News: साढ़े पांच वर्षों में 242 बच्चों को कराया बाल श्रम से मुक्त

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- बाल श्रम की रोकथाम के लिए टास्क फोर्स टीम का किया जाएगा गठन
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बाल श्रम निषेध दिवस आज
मानसी मौर्य

करनाल। जिले में साढ़े पांच वर्षों में 242 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त करवाया गया। इन बच्चों को होटल, दुकान, फैक्टरी और घरेलू कार्यों से रेस्क्यू कर बचाया गया। सहायक श्रम आयुक्त डॉ. कर्मवीर ने बताया कि जिले में बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स बनाई जाएगी। यह टीम अलग-अलग स्थानों पर जाकर सर्वे करेगी। जिसमें विशेष अभियान के तहत जिलेभर में होटल, ढाबों, फैक्ट्रियों और अन्य संस्थानों की जांच की जाएगी। यदि किसी स्थान पर कोई बच्चा काम करता पाया जाता है तो काम करवाने वाले के खिलाफ बाल श्रम अधिनियम 1986 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि बाल श्रम निषेध दिवस पर श्रम रक्षकों को निर्देश दे दिया गया है कि वे अपने शहर और गांवों के आस-पास निरंतर निगरानी बना कर रखें। किसी भी कार्यस्थल पर 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे काम करते हुए मिलते हैं तो तुरंत उसकी जानकारी एएलसी विभाग में दें जिसके बाद रेस्क्यू कर सख्त सजा दी जाएगी।
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बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष उमेश चानना ने बताया कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों से काम करवाना कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि बच्चों को बाल श्रम करते हुए पहले पकड़ा जाता है फिर उन्हें बचा कर आश्रम में भेजा जाता है और जिनके घर नहीं होते उन्हें आश्रम में ही अच्छी जिंदगी प्रदान की जाती है जिसमें रहना, खाना-पीना और शिक्षा शामिल है। बाल कल्याण समिति में बाल श्रम से रेस्क्यू किए कई ऐसे बच्चे हैं जो आज के समय में अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं साथ ही कई बच्चों को बचाकर उन्हें उनके घर पर सुरक्षित पहुंचाया गया है। साथ ही उन्होंने बताया कि बाल श्रम से रेस्क्यू किए बच्चों में सबसे अधिक ऐसे बच्चे हैं जो अन्य राज्यों से आकर काम कर रहे हैं।
अब तक रेस्क्यू किए गए कुछ मामले

- 11 वर्ष की बच्ची को किसी के घर में खाना बनाती, कपड़े धोती और सफाई करती हुई रेस्क्यू किया गया। जिस घर में बच्ची काम करती थी उन पर 50 हजार का जुर्माना लगाया और बच्ची को सुरक्षित उसके घर पहुंचाया गया।



- एक 13 साल का बच्चा बाइक रिपेयर करते हुए रेस्क्यू किया गया। जांच करने पर पता चला कि वह एक साल से काम कर रहा था जिसमें स्वयं माता-पिता ने आर्थिक तंगी के कारण काम पर लगाया था। इसमें बच्चे को शिक्षा का अधिकार दिलाया गया और माता-पिता को सावधान किया गया।



- 12 साल के बच्चे को किसी दूसरे राज्य से लाकर यहां पर बाल मजदूरी करवाई जा रही थी। बच्चा एक होटल में बर्तन साफ करने का काम करता था, इसमें होटल के मालिक के खिलाफ कार्रवाई की गई और बच्चे को रेस्क्यू किया गया।
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- आठ साल का बच्चा चाय की दुकान से रेस्क्यू किया गया। जांच में पता लगाया गया कि वह स्कूल न जाकर सुबह पांच बजे चाय की दुकान पर चाय बनाने आता है और रात में 10 बजे तक वह घर जाता है। बच्चे को बचा कर घरों वालों को सुरक्षित सौंपा गया और दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की गई।
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