संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मलेरिया व डेंगू के मरीजों की पहचान करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराए गए रैपिड फीवर सर्वे की रिपोर्ट आ गई। सर्वे के दौरान विभाग को 2216 लोग बुखार से पीड़ित मिले। विभाग की टीमों ने जिले के 214526 घरों में सर्वे किया था। बुखार से ग्रस्त मरीजों को स्वास्थ्यकर्मियों की तरफ से दवा दी गई। अब विभाग मानसून सीजन से पहले मलेरिया व डेंगू पर की रोकथाम की तैयारियों में जुटेगा।
सर्वे के दौरान राहत की बात यह रही की स्वास्थ्य विभाग को मलेरिया व डेंगू का कोई मरीज नहीं मिला। किसी में इन बीमारियों के लक्षण भी नहीं दिखे। केवल सामान्य बुखार ही लोगों में पाया गया। सर्वे के दौरान लोगों से यह भी पूछा गया कि वह बुखार की दवा ले रहे हैं या नहीं। इसके अलावा दवाई कहां से ले रहे हैं। इनकी मौके पर ही लोगों के रक्त की स्लाइड बनाकर जांच की गई।
मलेरिया के साथ-साथ डेंगू भी काफी खतरनाक है। अक्सर लोग जाने अनजाने में कई बार खाली बर्तन या टायरों को खुले आसमान के नीचे रख देते हैं। बारिश होने पर इनमें पानी भर जाता है। ऐसी जगहों पर ही मच्छर पनपते हैं। लोगों के घरों में रखे फ्रीज के पीछे बनी ट्रे व कूलर में रखे पानी में भी डेंगू का लारवा मिलता है।
अब विभाग की टीमें घर-घर जाकर मच्छरों के लारवा की जांच करेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब काफी होते हैं। जिनमें मच्छर पनपते हैं। इसके लिए जिला मलेरिया विभाग की तरफ से तालाबों में गंबूजिया मछलियां छोड़ी गई हैं। गंबूजिया मछली मच्छर का लारवा खा जाती है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि मई माह में कराया गया रैपिड फीवर सर्वे पूरा हो चुका है। सर्वे में मलेरिया व डेंगू का एक भी मरीज नहीं मिला है। 2216 लोग बुखार से ग्रस्त मिले हैं। लोगों को डेंगू व मलेरिया से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है।