अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में ब्लड बैंक शिफ्ट होने के बाद अभी तक ऑनलाइन नहीं हुआ है। आज भी अधिकारी एक बोर्ड पर ब्लड की यूनिट लिख देते हैं। मरीज के परिजनों को धक्के खाकर मेडिकल कॉलेज में आना पड़ता है कि यहां जो ब्लड ग्रुप चाहिए वह है कि नहीं।
इसके बाद उन्हें ब्लड मिलता है, यदि यहां ब्लड ग्रुप वह नहीं मिला तो मरीज के परिजनों सड़क पर धक्के खाने पड़ते हैं तो वहीं रिश्तेदारों को खून देने के लिए बुलाना पड़ता है। जिले में खून की डिमांड बढ़ती जा रही है। क्योंकि एक महीने पहले तो डेंगू से अपना कहर मचाया हुआ था तो अब धुंध के कारण हर रोड सड़क हादसे हो रहे हैं और एक या दो व्यक्तियों की मौत भी हो रही है। यदि ब्लड बैंक ऑनलाइन होता तो मरीजों के परिजन स्मार्ट फोन पर ही ऑनलाइन ब्लड यूनिट चेक कर लेते कि ब्लड बैंक में वह ब्लड ग्रुप है कि नहीं। इससे मरीजों के परिजनों को सावधानी होती और मरीज की समय पर खून मिलने से जान भी बच सकती है। अभी तक जिले में 690 से ज्यादा सड़क हादसे हो चुके हैं और 360 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी हैं लेकिन मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को इस बात से कोई चिंता नहीं है।
500 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज और नागरिक अस्पताल में है ब्लड की खपत
मेडिकल कॉलेज में ब्लड बैंक है, इस ब्लड बैंक की 500 से ज्यादा यूनिट ब्लड को मेडिकल कॉलेज और नागरिक अस्पताल में ही हर महीने लग जाती है। इससे अलग हर महीने 25 से 30 यूनिट ब्लड थैलिसीमिया पीड़ित बच्चों को चढ़ाया जाता है क्योंकि जिले में 70 के करीब बच्चे थैलिसीमिया से पीड़ित हैं।
प्राइवेट ब्लड बैंक भी होने चाहिए ऑनलाइन
बसंत राणा ने बताया कहा कि सरकारी ब्लड बैंक ही नहीं प्राइवेट ब्लड बैंक भी ऑनलाइन नहीं हैं, जबकि शहर के अंदर तीन से चार ब्लड बैंक खुले हुए हैं। ऐसे में यदि यह प्राइवेट ब्लड बैंक भी ऑनलाइन हो जाएं तो लोगों को काफी लाभ होगा। जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन जानकारी लेकर यहां से खून लिया जा सकता है, परंतु हालात यह हैं कि लोग मरीज को जरूरत पड़ने पर खून लेने के लिए दौड़ते हैं, जबकि कई बार उसे तीन से चार जगह धक्के खाने पर खून मिल पता है। ऐसे में आनलाइन सिस्टम की अनदेखी का खामियाजा जनता भुगत रही है।
जानिएं दो साल में कितने लोगों की गई जान
सन : टोटल हादसे : घायल हुए : मौत हुई
2017 : 778 : 623 : 376
2018 : 679 : 510 : 345
मेडिकल कॉलेज में ब्लड बैंक शिफ्ट हो चुका है अभी बोर्ड पर ही ब्लड की यूनिट लिखी जा रही हैं। जल्द ही ऑनलाइन कर दिया जाएगा, ताकि जरूरतमंद व्यक्ति आनलाइन देखकर ब्लड ले जा सकता है।
-डॉ. सचिन, इंचार्ज, ब्लड बैंक कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल।