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चुनाव आयोग ने लॉंच की एंड्रायड बेस एप्लीकेशन : आचार संहिता की उल्लंघना की जानकारी अब सी विजिल एप्प के माध्यम से दे सकेंगे

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। आगामी लोकसभा चुनाव में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के लिए अब मतदाता सी विजिल एप की मदद से सीधे जिला निर्वाचन अधिकारी या रिटर्निंग ऑफिसर और चुनाव आयोग को जानकारी दे सकते हैं। जानकारी मिलने के बाद उस पर कार्रवाई सुनिश्चित होगी। इसके लिए आयोग की ओर से एंड्राएड बेस एप्लीकेशन लांच किया जा चुका है। इससे पहले देश के कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ व मिजोरम राज्यों के विधानसभा चुनावों में, एप को डाउनलोड कर इसका सफल प्रयोग किया चुका है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव में भी इसका प्रयोग अनिवार्य कर दिया है।
शुक्रवार को लघु सचिवालय के सभागार में सहायक आयुक्त (प्रशिक्षणाधीन) साहिल गुप्ता ने जिला के सभी एसडीएम एवं सहायक रिटर्निंग अधिकारी, तहसीलदार और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों को सी विजील एप की ट्रेनिंग दी। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की इस एप से पहले चुनाव में गड़बड़ी की शिकायतों का प्रावधान या तो देरी से या ठीक से नहीं हो पाता था, जिससे कई बार मतदाता संतुष्ट नहीं होता था, मतदाता संतुष्ट हो इसके लिए एप लांच किया गया है। उन्होंने बताया कि इसका प्रयोग आसान है।
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चुनाव में कोई भी मतदाता किसी प्रकार की गड़बड़ी जैसे मतदाताओं को लुभाने के लिए शराब या पैसा बांटना, उपहार देना, सार्वजनिक जगहों पर चुनाव सामग्री का प्रदर्शन यानी पोस्टर इत्यादि लगाना या ऐसी गड़बड़ जिससे चुनाव में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होता हो, उसकी शिकायत कर सकता है। शिकायतकर्ता को सबसे पहले सी विजिल एप को डाउनलोड करना होगा। वह अपनी पहचान के लिए अपना फोन नंबर व विवरण दे सकता है या बिना पहचान बताये भी शिकायत कर सकता है। लोकेशन की फोटो व शिकायत का विवरण, सब्मिट के ऑप्शन पर क्लिक कर शिकायत दर्ज करवा सकता है। अपनी पहचान देने पर शिकायतकर्ता के पास एक आईडी नंबर आएगा, जिससे वह अपनी शिकायत की मॉनीटरिंग भी कर सकता है। शिकायत प्राप्त होने के बाद कंट्रोलिंग ऑफिसर या जिला निर्वाचन अधिकारी उसे संबंधित एआरओ को भेजेंगे और फिर वह फ्लाइंग स्क्वाड के अधिकारियों के पास जाएगी, जो बीडीपीओ और तहसीलदार भी हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलन के बाद फ्लाइंग स्क्वाड के अधिकारी करीब 15 मिनट की सीमित अवधि पर लोकेशन पर जाएंगे और उसकी पुष्टि करके, स्वीकार या अस्वीकार करेंगे, जिसकी सूचना स्वत: ही संबंधित एआरओ को भी मिल जाएगी और फिर एआरओ उसका समाधान करवाएंगे। इसके बाद समाधान की सूचना शिकायतकर्ता और संबंधित अधिकारियों को मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि शिकायत करने से लेकर उसके समाधान तक की सारी प्रक्रिया निर्धारित 100 मिनट में निपटाई जाएगी। उन्होंने बताया कि यदि शिकायतकर्ता अपना संपर्क नंबर व अन्य विवरण नहीं देगा तो उसकी पहचान गुप्त रहेगी। ट्रेनिंग के दौरान करनाल और असंध के एसडीएम, इंद्री के तहसीलदार, सभी बीडीपीओ व निर्वाचन तहसीलदार सुनील भौरिया भी उपस्थित रहे।
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