अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। होना तो ये चाहिए था कि पिछले साल की अपेक्षा खर्च कम होता और ठेकेदारों की जिम्मेदारी ज्यादा, लेकिन हुआ इसके बिलकुल उल्टा। पिछले साल 22 करोड़ रुपये सफाई पर खर्च किए गए थे, जो इस बार पांच करोड़ रुपये और बढ़ाकर इसे 27 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसके साथ ही ठेकेदारों को खुली छूट दे दी गई।
टेंडर में न तो ठेकेदारों पर सफाई कर्मचारियों की संख्या को लेकर कोई संख्या तय की गई और न ही वाहनों की। बस ये लिख दिया गया हमें तो केवल सफाई चाहिए। न चेकिंग का डर और न ही शिकायत का। ठेकेदारों ने निगम की इसी छूट का भरपूर फायदा उठाया और आज भी उठा रहे हैं, लेकिन भुगत शहरवासी रहे हैं।
बता दें कि पिछले साल जुलाई माह में ही पिछले नगर निगम सदन का कार्यकाल समाप्त हो गया। इसके बाद सारी जिम्मेदारी अधिकारियों के पास आ गई। अधिकारियों ने इस बार अपनी मर्जी की और सफाई को लेकर ठेकेदारों पर कड़े नियम करने की बजाये ढील। गत एक अक्तूबर से ठेके भी अलॉट कर दिए गए। शहर को पुराने ठेके की तरह की चार जोनों में बांटा गया है और सभी जोनों के लिए अलग-अलग सफाई ठेकेदार हैं।
निगम के अधिकारियों ने खुद टेंडर में ही सफाई कर्मचारियों की संख्या और वाहनों की संख्या को लेकर कोई जिक्र तक नहीं किया है। केवल एक ही कंडीशन लगाई गई है कि शहर की अच्छे तरीके से सफाई की जाए। ऐसे में ठेकेदार कम कर्मचारियों और कम संसाधनों के साथ काम चला रहे हैं, जिस कारण डोर टू डोर कचरा कलेक्शन योजना शहरवासियों से पैसे एकत्रित करने की योजना बनकर रह गई है।
50 रुपये से पांच हजार रुपये तक लेने का प्रावधान
सवाल ये है कि जब पिछले साल शहरवासियों से भी कोई पैसे नहीं वसूले जा रहे थे और शहर हरियाणा में स्वच्छता में भी टॉप रहा था। ऐसी क्या जरूरत थी कि खर्च पांच करोड़ रुपये अधिक किया गया? इतना ही नहीं आवासीय इलाके के साथ-साथ कामर्शियल यूनिट से कचरा उठाने के नाम पर भी फीस तय की गई है। घरों से कचरा उठाने की फीस 50 रुपये और कामर्शियल यूनिट से पांच हजार रुपये तक। इसका सीधा सा मतलब ये है कि 27 करोड़ रुपये के अलावा शहरवासियों से भी ठेकेदार पैसे एकत्रित कर रहे हैं।
कर्मचारी और संसाधन कम, गंदगी ज्यादा
पिछले साल के ठेके में बाकायदा चारों जोनों में ठेकेदारों के संसाधनों समेत सफाई कर्मचारियों की संख्या तय की गई थी। इतना ही नहीं साल में कम से कम 8 से 12 बार इनकी परेड तक कराई गई और कर्मचारी और वाहन गिने गए। उस समय ठेकेदार अपने कर्मचारी और वाहन पूरे नहीं दिखा पाए थे। इसके अलावा भी कई बार ठेकेदारों पर पेलनाल्टी भी लगाई गई थी। इस बार भी हकीकत ये है कि ठेकेदारों ने सफाई कर्मचारी और वाहन घटा दिए हैं, इस कारण शहर में सफाई सही तरीके से नहीं हो पा रही है और लोगों को मजबूरी में उठाने के लिए निजी तौर पर कर्मचारी रखे हुए हैं और वे इसके बदले पैसे दे रहे हैं।
खर्च बढ़ा, नहीं बदले हालात
पांच करोड़ अधिक चुकाने पर भी सफाई व्यवस्था पुराने ढर्रे पर ही चल रही है। हालात आज भी वैसे ही हैं। शहर की मछली मार्केट, बांसो गेट और जुंडला गेट के समीप गंदगी के ढेर लगे हैं। पाश इलाकों की बात करें तो माडल टाउन, न्याय पुरी और सभी सेक्टरों में निगम की ओर से सफाई के नाम पर काम चलाया जा रहा है। मुगल कैनाल, चार चमन, दयाल सिंह कॉलोनी के पास तीन तीन दिन तक गंदगी के ढेर लगते हैं।
खामियों पर पिछले साल 30 लाख ज्यादा काटी गई थी पेमेंट
शहर निवासियों का कहना है कि सफाई के ठेके में बड़ा खेल होता है। कर्मचारी और संसाधन कम लगाकर ठेकेदार अधिक पैसे कमाते हैं। इससे सफाई प्रभावित होती है। बीते साल निगम ने लगातार जांच की। हर बार खामियां मिलीं। ठेकेदारों की 30 लाख तक पेमेंट भी काटी गई। जो नियम इस बार बनाए गए हैं उनसे तो साफ है कि ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया है।
ठेकेदारों को छूट और शहरवासियों से लूट ये अच्छी बात नहीं : विकास कुमार
सेक्टर-13 से विकास कुमार ने अमर उजाला को फोन करके बताया कि उनकी गली में तीन दिन में एक बार सफाई होती है। पूरी गली के लोग 70 रुपये कूड़ा उठाने वाले को देते हैं। सीवरेज ब्लॉक हैं, सफाई के नाम पर केवल और केवल खानापूर्ति की जा रही है। ठेकेदारों को इतनी छूट और शहरवासियों से लूट ये अच्छी बात नहीं है। इसी प्रकार, बसंत बिहार से राजीव कुमार, सदर बाजार के अनूप सिंह, बाबू राम ने कहा कि सफाई के नाम पर केवल कागजी दावे किए जा रहे हैं। मुगल कैनाल से नरेश कटारिया ने बताया कि कई दिन तक यहां सफाई नहीं होती। सफाई के नाम पर गड़बड़ी चल रही है। इसकी जांच होनी चाहिए।
करेंगे समीक्षा : मेयर गुप्ता
मैंने दोबारा से अभी ही कार्यभार संभाला है। मुझे सफाई को लेकर किए गए नए टेंडर की जानकारी नहीं है। अगर कहीं कोई बात है तो इसकी समीक्षा करेंगे। हमारा उद्देश्य शहरवासियों को अच्छी सफाई व्यवस्था देना है। इसके लिए हम प्रतिबद्ध हैं और शहर से ऊपर न तो मैं और न ही कोई और। मैं खुद शहर की सफाई को लेकर चेकिंग करूंगी और जहां भी दिक्कत होगी, उन इलाके के संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा।
नया ठेका एक अक्तूबर से चल रहा है। सफाई को लेकर शहर को चार जोनों में बांटा गया है। कॉमर्शियल एरिया में नाइट स्वीपिंग और टॉयलेट की सफाई भी इन्हें ही करनी होगी। निगम इन पर लगातार निगरानी रख रहा है, जहां पर गड़बड़ी मिलती है, वहां पर कार्रवाई की जाएगी। शहरवासियों से भी अपील है कि अगर कहीं पर गंदगी है और ठेकेदार सही काम नहीं कर रहा है तो इसकी शिकायत ऐप पर भी करें।
-धीरज कुमार, ईओ, डिप्टी म्यूनिसिपल कमीशनर।