करनाल। सीएम मनोहर लाल का शहर करनाल। ये शहर पिछले चार वर्षों में भी चमचमाती सड़कों और विकास कार्यों को लेकर प्रदेश का मॉडल नहीं बन पाया। हां, एक मामले में जरूर इसे प्रशासन पूरे प्रदेश में आगे बता रहा है। टूटी सड़कों के गड्ढे भरने में। सत्ता पक्ष और जिले के अधिकारी गड्ढे भरने में नंबर वन बताकर अपनी पीठ खुद थपथपा रहे हैं। दूसरी ओर, शहरवासी और विपक्षी दलों के नेता इसी मुद्दे पर सरकार और प्रशासन को घेर रहे हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि, करनाल में सड़कें तो अब रही ही नहीं, आम व खास सड़क अब केवल गड्ढों में तब्दील दिख रही है। मंगलवार को जिले के डीसी डॉ. आदित्य दहिया की ओर से हरपथ एप को लेकर प्रदेश भर के आंकड़े जारी किए गए। सोशल मीडिया ग्रिवेंश ट्रेकर यानी इस तरीके से किसी दिक्कत का हल निकालने व सरकार की हरपथ एप से सड़कों के गड्ढे भरने के निष्पादन में करनाल प्रदेश के सभी 22 जिलों में प्रथम स्थान पर बताया गया।
बता दें कि करनाल से विधायक चुने जाने के बाद मनोहर लाल को प्रदेश का मुखिया चुना गया। ऐसे में लोगों ने करनाल के लिए चमचमाती सड़कों के सपने देखे, लेकिन चार साल में ऐसा कोई चमत्कार नहीं हो सका। शहर की सबसे खास और वीआईपी सड़क ठंडी सड़क भी चार साल में दम तोड़ गई और यहां पर विकास के नाम पर केवल गड्ढे ही गड्ढे दिखाई देते हैं। इसके अलावा, सेक्टरों की सड़कों की बात करें, असंध से करनाल की बात करें या फिर करनाल से निसिंग तो हर सड़क पर गड्ढे ही लोगों का स्वागत करते हैं। इससे भी बुरे हालात करनाल से इंद्री रोड के हैं जो बड़े वाहनों के कारण खुद का संतुलन खो बैठा है और हिचकोलों के कारण यहां रोजाना हादसे हो रहे हैं।
गड्ढे भरने में करनाल को मिले चार स्टार
डीसी ने बताया कि हरपथ एप से सड़कों के गड्ढे भरने या उनका समाधान करने में प्रदेश के 22 जिलों में मात्र 3 जिले ही ऐसे हैं, जिन्हें 2 या उससे अधिक स्टार मिले हैं। इनमें करनाल सर्वाधिक 4 स्टारों के साथ प्रदेश भर में शीर्ष पर है। इस जिला ने ऐसी 94 प्रतिशत शिकायतों का समाधान करके यह उपलब्धि पाई। यह भी उल्लेखनीय है कि इस जिले से संबंधित मात्र 13 प्रतिशत शिकायतें री-ओपन हुई और मात्र 6 प्रतिशत यानी 10 प्रतिशत से भी कम शिकायतें किसी न किसी ठोस कारण से रिजेक्ट हुई। दूसरी ओर, स्टार रेटिंग में प्रदेश के फतेहाबाद को 2 स्टार और रोहतक को भी 2 स्टार हासिल हुए हैं। दोनों जिलों की पोजीशन क्रमश द्वितीय और तृतीय स्थान पर है। इस संबंध में उपायुक्त ने जिला की जनता से कहा है कि वे सड़कों पर गढ्ढे दिखाई देने पर हरपथ ऐप से उसकी शिकायत भेंजे, उसका समाधान अवश्य होगा। इस प्रकार अधिक से अधिक गड्ढे भरे जांएगे।
सीएम विंडो पर समाधान मेें भी करनाल नंबर वन : डीसी
डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने बताया कि सीएम विंडो से शिकायतों के समाधान में चालू माह सितंबर के दौरान 81.89 के संयुक्त स्कोर से करनाल पहले रैंक पर है। रैंकिंग पोजीशन में कुरुक्षेत्र द्वितीय और यमुनानगर प्रदेशभर में तृतीय स्थान पर है। इनका वर्तमान स्कोर क्रमश: 79.12 व 77.83 है। सोशल मीडिया ग्रिवेंश ट्रेकर की बात करें तो सितंबर मास में करनाल 95 के स्कोर से प्रदेश भर में पहले स्थान पर है। इस जिला ने बीते माह अगस्त से 10 सितंबर तक सभी प्राप्त 118 शिकायतों का शत-प्रतिशत और निश्चित समयावधि में समाधान कर इस उपलब्धि को हासिल किया। जिलावार प्रोफोरमेंश में प्रदेश का पंचकूला 94 के स्कोर से दूसरे स्थान पर और 93 के स्कोर से गुरुग्राम तीसरे स्थान पर है।
सीएम सिटी नहीं, गड्ढा सिटी कहिये जनाब : चावला (फोटो-48)
इस बारे में इनेलो के युवा जिलाध्यक्ष अमनदीप चावला ने कहा कि ये दुर्भाग्य की बात है कि सीएम अपने ही हलके की सड़कें ठीक नहीं करा पाया। बल्कि टूटी सड़कों के गड्ढे भरने में ही अपनी बढ़ाई कर रहे हैं। सरकार ने करनाल की सड़कों के सुधारीकरण को लेकर कोई कार्य नहीं किया। आज करनाल में जब किसी भी सड़क से प्रवेश किया जाता है तो केवल गड्ढे ही गड्ढे होते हैं। इस शहर को सीएम सिटी नहीं गड्ढा सिटी कहा जाए तो नहीं होगा। कहां तो लोगों ने चौड़ी और नई सड़कों के सपने देखे थे, और कहां सड़कों पर गड्ढे भरने के ही ढोल पीटे जा रहे हैं। सड़कों के बारे में शहर के किसी भी आम व्यक्ति से बात की जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी।
गड्ढे भरे नहीं हैं बल्कि खोदे हैं : सुमिता सिंह (फोटो-49)
कांग्रेस की पूर्व विधायक सुमिता सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार ने चार साल में केवल गड्ढे ही खोदे हैं, भरे कहीं नहीं हैं। अगर करनाल जिला पूरे प्रदेश में सड़कों के गड्ढे भरने में पहले नंबर पर है तो इससे पूरे प्रदेश का अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां की सड़कें कैंसे होंगी। आज शहर की एक भी सड़क ऐसी नहीं है जो टूटी न हो। लोग घर से निकलने से पहले डरने लगे हैं कि आखिर किस सड़क से मंजिल तक पहुंचा जाए। इसके बावजूद अधिकारी जिले को नंबर बन बता रहे हैं। सीएम सरीफ व्यक्ति हैं, अधिकारी उनको गलत आंकड़े पेश कर भ्रमित करने के अलावा कोई काम नहीं कर रहे हैं। इन गड्डों के जवाब जनता आने वाले चुनाव में देगी।