नहीं रुक रहा अनाज मंडियों में भ्रष्टाचार का खेल, यूपी के गेहूं के आगे हरियाणा के अधिकारी फेल
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
जिले की अनाज मंडियों में फैला भ्रष्टाचार का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा। पहले धान के सीजन में ही नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों ने भ्रष्टाचार का खेल खेला जाता था। वही अब गेहूं के सीजन में भी शुरू हो गया है। आढ़तियों, मार्केट कमेटी अधिकारियों की मिलीभगत के चलते रात के समय जमकर यूपी का गेहूं लिया जा रहा है। इसमें बड़ी बात ये है कि यूपी के व्यापारी ट्रक और ट्रॉलों में बोरियों में भरकर गेहूं को यहां पर ला रहे हैं और सीधे दुकानों पर पहुंचा रहे हैं।
नियमों के अनुसार, यूपी के ट्रेडर्स मंडी में गेहूं नहीं बेच सकते, लेकिन जिले में ये कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है। न तो मंडी प्रशासन इस पर कोई लगाम लगा पा रहा है। न ही किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई हो रही है। करनाल, घरौंडा, निसिंग, कुंजपुरा, तरावड़ी और घीड़ में खुलकर यूूपी के ट्रेडर्स का गेहूं खरीदा जा रहा है। इन पर कार्रवाई तो दूर की बात है, यूपी के गेहूं के आगे मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी नतमस्तक नजर आ रहे हैं। एक अप्रैल से शुरू हुए सीजन में आज तक किसी भी आढ़ती के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। ताजा मामला, करनाल अनाज मंडी का है। मंडी के सचिव ने यूपी से आ रहे एक गेहूं की गाड़ी को पकड़ा और बाकायदा इसके लिए पुलिस तक बुला ली गई। जांच की तो पता चला कि यूपी से पुराना गेहूं मंडी के अंदर बेचने के लिए लाया गया था। कुछ ही देर में ऑक्शन रिकॉर्डर जितेंद्र सिंह और मंडी सचिव ने मामले को रफा दफा कर दिया। केवल मार्केट फीस वसूलने की बात कही गई, जबकि ये अपने आप में गंभीर मामला है। एक साल पुराने गेहूं के जल्द खराब होने की आशंका रहती है। इसी प्रकार, घरौंडा की मंडी में वहां के चेयरमैन ने ही यूपी के गेहूं की गाड़ी पकड़ी थी। तरावड़ी की मंडी में भी यूपी का गेहूं पकड़ा गया था। आज तक इस पर कार्रवाई कुछ नहीं की गई। सवाल ये है कि आखिरकार यूपी के गेहूं के आगे हरियाणा के अधिकारी फेल क्यों हैं। ऐसे व्यापारियों के खिलाफ केस क्यों दर्ज कराया जाता। सरेआम सरकार और हरियाणा के किसानों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
करोड़ों का है खेल : पूरे खेल को यूं समझें
हरियाणा के साथ लगते यूपी में मंडी का सिस्टम इतना अच्छा नहीं है, जितना हरियाणा में है। ऐसे में यूपी में छोटी जोत होने के कारण वहां पर व्यापारी सीधे खेतों से ही किसानों का गेहूं निर्धारित रेट से कम दाम पर खरीदते हैं और गेहूं को स्टॉक कर लेते हैं। इसके बाद उसे ट्रकों में लादकर करनाल और अन्य मंडियों के आढ़तियों से सेटिंग करके हरियाणा की मंडियों में भेजा जाता है। मंडी के नियमों के अनुसार, आढ़तियों को किसान की फसल पर प्रति सौ रुपये पर ढाई प्रतिशत आढ़त (कमीशन) मिलता है। इसके अलावा, यूपी के व्यापारी वहां से सस्ते रेटों (1200 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल) पर गेहूं को लेकर करनाल जिले की मंडियों में 1735 रुपये प्रति क्विंटल से हिसाब से गेहूं सरकार को बेचते हैं। इसके बदले नकद में ही सरकार पैसे देती है। ऐसे में आढ़ती यूपी के व्यापारी से मिलीभगत करके यहां पर भी प्रति क्विंटल गेहूं पर 200 से 400 रुपये कमाता है। इसलिए ही आढ़ती यूपी के गेहूं को लेने के लिए एकजुटता दिखा रहे हैं।
मंडी में यूनियन हो चुकी हैं दो फाड़
यूपी के गेहूं की आवक को लेकर आढ़तियों की यूनियन भी दो फाड़ हो चुकी हैं। राइस मिलर्स समर्थित आढ़तियों ने यूपी के गेहूं की आवक का खुला समर्थन किया। प्रशासन पर इस बात के लिए दबाव भी बनाया है। अभी तक ओपन में यूपी का गेहूं नहीं आ रहा, बल्कि चोरी छीपे ही इसकी एंट्री हो रही है। यूपी के गेहूं के समर्थन में कुछ आढ़तियों ने बेअंत सिंह को अपना प्रधान चुना है। जबकि, पहले से ही मौजूद नई अनाज मंडी की पंचायत के प्रधान रजनीश चौधरी इसके विरोध में हैं। वह कह रहे हैं कि पहले हरियाणा के किसानों का गेहूं खरीदा जाना चाहिए। बता दें कि मंडी में करीब 450 आढ़ती हैं। इनमें से 50 ऐसे आढ़ती हैं, जिनके पास किसान फसल नहीं डालते हैं। वे इसी कार्य को अंजाम देते हैं।
यूपी के गेहूं से ये है हरियाणा के किसानों को परेशानी
यूपी का गेहूं करनाल जिले की मंडियों से आने से जिले के किसानों की परेशानी बढ़ जाती है। क्योंकि, जिला प्रशासन जिले में की गई गेहूं की बिजाई के हिसाब से प्रबंधन करता है। लेकिन, यूपी का गेहूं आने के कारण मंडियों की सारी व्यवस्थाएं बिगड़ जाती हैं। इससे जाम लगता है, मंडियों में गेहूं रखने की जगह नहीं बचती। बारदाना कम पड़ जाता है। हरियाणा के किसानों को देरी से पेमेंट मिलती है।
मंडी में हैं खेल के एक्सपर्ट कर्मचारी
इस खेल को अंजाम देने के लिए मंडी में कुछ एक्सपर्ट कर्मचारी हैं। यूपी के गेहूं की एंट्री किस गेट से किस समय करानी है, ये सब फोन या फिर व्हाट्स एप पर तय होता है। बता दें कि मंडी में चार गेट हैं। पिछले धान सीजन की बात करें तो यहां पर खुला खेल चला था। इसके अलावा, गड़बड़ी के चलते दो सचिव सस्पेंड किए गए। सात कर्मचारियों का एक साथ तबादला किया गया था। इतना ही नहीं ऑक्शन रिकॉर्डर जितेंद्र सिंह को दस्ती पर्ची के साथ पकड़ा गया था, जो अपने आप में बड़ा अपराध है। हालांकि, अधिकारियों ने इस मामले की जांच के नाम पर कुछ नहीं किया और गोलमाल कर दिया।
पहले करनाल के किसानों का गेहूं लेंगे : रजनीश चौधरी
इस बारे में मंडी के प्रधान रजनीश चौधरी का कहना है कि हमने फैसला लिया है कि 25 अप्रैल तक यूपी का गेहूं मंडी में नहीं आने दिया जाएगा, क्योंकि इससे हरियाणा के किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मंडी में कहीं का भी किसान फसल बेच सकता है, लेकिन ट्रेडर्स नहीं।
सचिव, केवल दावों तक सीमित
इस बारे में करनाल मार्केट कमेटी के सचिव जिले सिंह का कहना है कि यूपी के ट्रेडर्स का गेहूं कतई नहीं आने दिया जाएगा। इसको लेकर स्टाफ और आढ़तियों को हिदायत दी गई है। हालांकि, रात को पकड़ी गई ट्रॉली के बारे में सचिव ने इतना ही कहा कि उसका रिकार्ड ले लिया और उससे मार्केट फीस ली जाएगी।
सारा खेल सेटिंग का, करेंगेे विरोध : भाकियू
इस बारे में भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान का कहना है कि देश का किसान कहीं भी गेहूं बेच सकता है। लेकिन, यहां पर व्यापारियों ने कब्जा जमा लिया है। यूपी के ट्रेडर्स का गेहूं तुरंत प्रभाव से रोका जाए, नहीं तो भाकियू यूपी बॉर्डर पर जाकर ऐसा करेगी। जो इस खेल में शामिल हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।