अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
करनाल मार्केट कमेटी में नियम और कानून को ताक पर रखने के एक के बाद एक मामले सामने आ रहे हैं। कमेटी के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए केवल मंडी के अंदर खुले खोखे ही दिखते हैं, जबकि उनके सामने ही आढ़त की दुकानों में नियमों के खिलाफ अलग-अलग बैंक खोल दिये गए। इतना ही नहीं इसके अलावा भी दर्जनभर से ज्यादा ऐसी दुकानें हैं, जहां पर आढ़त नहीं बल्कि अन्य कारोबार शुरू कर दिये गए। ये कार्य मंडी के अधिकारियों की नाक के नीचे ही चल रहा है।
हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड का एक्ट में साफ शब्दों में लिखा है कि ऐसा नहीं किया जा सकता, आढ़त की दुकान में केवल आढ़त का ही कार्य किया जा सकता है। बावजूद इसके मंडी के अधिकारियों की मिलीभगत और शह के दम पर ये चल रहा है। सबसे बड़ी बात ये है कि आढ़ती को घर बैठे ही हर माह मोटी रकम बैंक से किराये के रूप में मिल रही है। मार्केट कमेटी के अधिकारियों द्वारा दो दिन पहले ही मंडी के अंदर खोले गए खोखों पर जेसीबी चलाई गई। कमेटी के अधिकारियों का दावा था कि ये खोखे गलत तरीके से खोले गए हैं। अब यहां पर भी सवाल ये आता है कि आखिर ये खोखे पहले किसकी शह पर खोले गए और अब किसके इशारे पर हटाए जा रहे हैं। बुधवार को अमर उजाला की टीम मंडी का मुआयना किया। इस दौरान चार दुकानों पर बैंक खोले पाये गए। हालांकि, ये बोर्ड के नियमों के खिलाफ हैं।
बता दें कि मंडी में आढ़त की दुकान पर केवल आढ़त का ही कार्य किया जा सकता है, ले किन पिछले कई साल से करनाल अनाज मंडी के अधिकारियों ने आंखें बंद कर रखी हैं और नियमों के खिलाफ मंडी के अंदर बैंक खोले जा रहे हैं। इसके अलावा, मंडी के अंदर खाद, बीज की दुकानें खुल गई और सबमर्सिबल ट्यूबवेल तक के शोरूम तैयार कर दिये गए, लेकिन मंडी के अधिकारियों को ये सब दिखाई नहीं दे रहा है।
लोकपाल के आदेश पर समालखा मंडी में हुई कार्रवाई
इस मामले को लेकर पानीपत के आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने समालखा मार्केट कमेटी के अंदर आढ़त की दुकान में खुले बैंक की शिकायत की थी। उन्होंने ये मामला लोकायुक्त के पास भेजा था। पिछले माह ही इस मामले में लोकायुक्त के आदेश पर कमेटी के अधिकारियों ने इस प्लॉट को रिज्यूम करने के आदेश दिये थे। इसके बावजूद भी प्रदेश की अन्य मार्केट कमेटियों ने इससे कोई सबक नहीं लिया। इस मामले की पुष्टि खुद समालखा मार्केट कमेटी के सचिव चंद्रप्रकाश ने की है।
बिना एनओसी के कैसे खुल गए बैंक
बैंक खोलने से पहले एनओसी लेनी होती है, इस दौरान कई आढ़तियों ने एनओसी के लिए अप्लाई भी किया, लेकिन कमेटी के रिकॉर्ड के अनुसार, किसी भी बैंक के पास एनओसी नहीं है। सूत्रों का दावा है कि कमेटी के स्टाफ द्वारा गलत तरीके से एनओसी भी दी गई है, इसी के आधार पर बैंक खोल दिये गए। इससे भी बड़ी बात ये है कि आज तक मार्केट कमेटी के किसी भी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और न ही इस पर मामले पर कोई बोलने को तैयार है।
सचिव से लेकर डीएमईओ तक के पास नहीं कोई जवाब
इस मामले को लेकर जब करनाल मार्केट कमेटी के सचिव जिले सिंह से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। डीएमईओ महाबीर सिंह के भी यही हालात मिले। इतना ही नहीं कमेटी के अकाउंटेंट पंकज तुली से लेकर हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड पंचकूला के सचिव जयदीप सिंह तक इस मामले में बोलने को तैैयार नहीं हैं। ऐसे में सवाल ये है कि आखिरकार ऐसा इस मामले में क्या है और क्यों नहीं अधिकारी इस पर अपना मुंह खोल रहे।
आरटीआई में बोले, हमें कोई जानकारी नहीं
इस मामले में आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा ने कमेटी में आरटीआई लगाकर पूछा था कि मंडी के अंदर आढ़त के अलावा और दूसरे कौन-कौन से कारोबार हो रहे हैं। इसके जवाब में कमेटी के सूचना अधिकारी और सचिव जिले सिंह ने बताया कि उनको इस मामले की कोई जानकारी नहीं और न ही कोई हमारे पास ऐसा कोई रिकॉर्ड है? अब इस मामले में एडवोकेट राजेश शर्मा ने प्रथम अपील दायर की है।