विभागों को मकान का इंतजार, कोई किराया देने को नहीं तैयार
सोमदत्त शर्मा
करनाल। बड़े-बड़े अपराधियों से सच उगलवाने वाली सीआईए (पुलिस की अपराध शाखा-2) और शहरवासियों से करोड़ों रुपये टैक्स वसूलने वाले आबकारी व कराधान विभाग और तीसरे भ्रष्टाचार पर लगाम वाले वाले विजिलेंस विभाग को किराये पर भवन नहीं मिल रहा है। पिछले एक साल से चार सरकारी विभाग अपने अपने कार्यालय के लिए भवन की तलाश कर रहे हैं, लेकिन शहरवासियों के अलग अलग तर्क हैं। जहां भी ये विभाग भवन देखने जाते हैं, विभागों के नाम सुनते ही मकान मालिक भवन देने से इनकार कर देते हैं। खास बात यह है कि इन चारों विभागों के भवन शिफ्टिंग नहीं होने के कारण मुख्यमंत्री मनोहरलाल के दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अटक गए हैं। हालांकि, इन चारों विभागों को नोटिस भी जा री किये जा चुके हैं, लेकिन भवन नहीं मिलने के कारण वे पिछले एक साल से कार्यालय शिफ्ट नहीं कर पा रहे हैं। विभागों द्वारा दर्जनों बार नये भवन देखे गए हैं, लेकिन किसी ने इनको किराये पर भवन के लिये हामी नहीं भरी है।
बता दें कि सीएम के करनाल को लेकर खास दो प्रोजेक्ट थे। इनमें करीब 650 करोड़ रुपये के मेडिकल कालेज को चलाना और दूसरा पुरानी पुलिस लाइन के स्थान पर शहरवासियों के लिए करीब सात करोड़ से ऑडिटोरियम बनाना। मेडिकल कालेज शुरू हो गया, लेकिन इसके नर्सिंग स्कूल को शिफ्ट करने के लिए वे इंतजार में हैं, क्योंकि आबकारी व कराधान, मत्स्य विभाग के कार्यालय की जमीन मेडिकल कालेज के नाम हो गई है। इसी प्रकार, जहां पर आडिटोरियम बनना है, वहां पर सीआईए-2 व राज्य सतर्कता ब्यूरो के कार्यालय चल रहे हैं। डीसी कार्यालय से कई बार नोटिस जाने के बाद भी कार्यालय यहां से शिफ्ट नहीं हो पाए। इसी के चलते आडिटोरियम व नर्सिंग स्कूल को शिफ्ट करना अटका हुआ है। मेडिकल कालेज के विस्तार में पार्किंग भी बनाई जानी है।
पुलिस जहां जाती है, वहीं से इनकार
पुलिस विभाग के आला अधिकारी इस समय परेशान हैं, क्योंकि उन्हें सीआईए-2 को शिफ्ट करने के लिए शहर में कोई अपना भवन देने को तैयार नहीं है। अधिकारी जहां भी जाते हैं तो लोग यह कहकर अपना भवन पुलिस को किराए पर देने से मना कर देते हैं कि सीआईए के ऑफिस से रात को लोगों के चीखने-चिल्लाने और रोने की आवाज आती है, इसलिए वे अपना भवन सीआईए का ऑफिस खोलने के लिए नहीं दे सकते हैं। पिछले एक साल से पुलिस विभाग कई साइट देख चुका है, पुलिस की तरफ कई बार भवन फाइनल किये जा चुके हैं, लेकिन हर बार मालिक ही मना कर देता है। विभाग के एक सूत्र ने बताया कि जब हमने लोगों से अपना मकान सीआईए को किराये पर देने की बातचीत की तो लोगों ने सभी ने इनकार करते हुए कहा कि सीआईए के दफ्तर से रात में लोगों के चीखने-चिल्लाने और रोने की आवाज आती है, अगर मैंने अपना मकान किराये पर दे दिया तो पूरी कॉलोनी परेशान होगी।
बोले, दारू के ट्रक खड़े होंगे तो आएगी बदबू
कुछ यही हाल आबकारी व कराधान विभाग का भी है। इस विभाग को भी दफ्तर खोलने के लिए कोई इसलिए अपना मकान किराये पर नहीं दे रहा है। लोगों का मानना है कि इस विभाग में रोज शराब से भरे वाहन पकड़े जाने हैं, इसलिये यहां से शराब की बदबू आती है। मकान मालिकों का यह भी तर्क है सरकारी कार्यालय के कर्मचारी भवन की इतनी देखभाल नहीं करते और साफ सफाई नहीं होने के कारण वे भवन को खराब कर सकते हैं। दरअसल जिन विभागों को शिफ्ट किया जाना है, वे अभी पुराने व जर्जर भवनों में चल रहे हैं। इन भवनों को गिराकर अब यहां नए निर्माण होने हैं, लेकिन यहां अभी भी चल रहे इन दफ्तरों के शिफ्ट न होने से निर्माण कार्य में देरी हो रही है।
2018 तक बनाना है आडिटोरियम
अंबेडकर चौक के पास स्थित पुरानी पुलिस लाइन में सीएम घोषणा के तहत 7.6 करोड़ की लागत से 3.28 एकड़ में ऑडिटोरियम बनना है। इसका निर्माण भी शुरू हो चुका है और पंचायती राज विभाग ने इसे दिसंबर 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस बारे में पंचायती राज विभाग के कार्यकारी अभियंता रामफल सिंह का कहना है कि भवन को खाली करने के लिए नोटिस दिए जा चुके हैं। इनको कई माह पहले ही शिफ्ट होना था। इस कारण आडिटोरियम निर्माण का कार्य धीमा पड़ गया है। इसको लेकर विभागों से बात कर रहे हैं।
आबकारी व मत्स्य पालन विभाग भी नहीं हो पा रहे शिफ्ट
कुछ यही हाल पुराने तहसील परिसर में चल रहे आबकारी व कराधान विभाग (सेल्स व एक्साइज) एवं मत्स्य पालन विभाग का भी है। पुरानी तहसील परिसर की जमीन को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज ने अधिग्रहण कर लिया है। यह प्रक्रिया पूरे हुए छह माह से अधिक समय हो गया है, लेकिन यहां के पुराने भवन में चले रहे इन दोनों विभागों को शिफ्ट करने के लिए प्रशासन को अभी तक पुराना भवन नहीं मिल पाया। इस बारे में कल्पना चावला मेडिकल कालेज के निदेशक डॉ. सुरेंद्र कश्यप का कहना है कि वे एक साल में डीसी के माध्यम से कई बार इन विभागों को नोटिस भिजवा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इसके चलते नर्सिंग स्कूल जर्जर भवन से शिफ्ट नहीं हो पा रहा है।