करनाल। हीमोफीलिया एक आनुवांशिक बीमारी है जिसमें खून जमाने की क्षमता खत्म हो जाती है और मामूली चोट भी खतरा बन सकती है। जिला नागरिक अस्पताल में तीन महीनों में इस बीमारी से ग्रस्त 185 मरीज पहुंच चुके हैं।
फिजिशियन डॉ. प्रिया दलाल ने बताया कि हीमोफीलिया जन्मजात और आनुवांशिक बीमारी है जो आमतौर पर बचपन में ही सामने आ जाती है। यदि समय रहते इसका पता चल जाए तो इसका प्रबंधन संभव है। उन्होंने बीमारी के लक्षण बताते हुए कहा कि इसमें हल्की सी भी चोट लग जाने पर रक्तस्राव होने लगता है, जोड़ों में दर्द व सूजन होती है, शरीर पर बिना चोट के नीले निशान पड़ जाते हैं, बार-बार नाक से खून बहना और घुटनों, कोहनी या टखनों में सूजन होती है।
डॉ. प्रिया ने हीमोफीलिया दिवस पर लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि जो भी मरीज इस गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उनका जिला नागरिक अस्पताल में सरकार की ओर से नि:शुल्क टीके लगाए जाते हैं और जांच की जाती है। पीड़ित नियमित रूप से अस्पताल में आकर जांच और इलाज करवाएं ताकि बीमारी को नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने बताया कि यह बीमारी सबसे ज्यादा पुरुषों में मिलती है। यदि किसी परिवार में पहले से ही यह बीमारी है तो नवजात बच्चों की शुरुआती जांच करवाना जरूरी है। हीमोफीलिया भले ही लाइलाज हो, लेकिन सही जानकारी और समय पर पहचान कर इसके गंभीर प्रभावों को रोका जा सकता है। हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य यही है कि लोग इस बीमारी को लेकर सतर्क रहें। संवाद