फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सड़क से कचरा उठाने वालों के हाथ आई कलम-किताब, पढ़-लिखकर होंगे कामयाब

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

करनाल। सुबह आंख खुलते ही झुग्गी से निकल पड़ते। सड़क पर जहां कचरा दिखा उठाकर बैग में डाल लिया। पूरा दिन यही क्रम चलता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। झुग्गी से निकलने वाले इन बच्चों के हाथ में बैग तो होगा ही, लेकिन कचरा उठाने के लिए नहीं, स्कूल जाने के लिए, ताकि पढ़-लिखकर जीवन में कामयाब बन सकें। अब तक आउट ऑफ स्कूल रहने वाले 812 बच्चे स्कूल जाएंगे। सक्षम युवाओं ने सर्वे कर ऐसे बच्चों को चुना है। इनका सरकारी स्कूलों में दाखिला कराया जाएगा।

तीन माह में 8 सक्षम युवाओं ने किया सर्वे
नए सत्र को देखते हुए ड्रॉप आउट और आउट ऑफ स्कूल रहने वाले बच्चों को चुनने का कार्य जनवरी माह में शुरू हुआ था। तीन माह में सर्वे करने के लिए आठ युवाओं की टीम को फील्ड में उतरा गया। कोई बच्चा इस सर्वे से छूटे न इसके लिए अलग-अलग एरिया को भी आईडेंटीफाई किया गया। हर बच्चे को शिक्षित करने के लिए हुए सर्वे की मॉनीटरिंग मुख्यमंत्री की सुशासन सहयोगी (सीएमजीजीए) साक्षी श्रीवास्तव ने की। सक्षम युवाओं की टीम में रजनी, गायत्री देवी, शशीबाला, प्रवीण कुमारी, टीना, रितू, नम्रिता व प्रियंका शामिल रहे।
विज्ञापन


430 बच्चों का कराया दाखिला
सर्वे के दौरान ड्रॉप आउट और आउट ऑफ स्कूल रहने वाले चुने गए 812 बच्चे चुने गए थे। शिक्षा विभाग की ओर से इनमें से अब तक 430 बच्चों का उनके नजदीकी सरकारी स्कूलों में दाखिला कराया गया है। इन बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाया जाएगा।

812 में 486 बेटियां
आर्थिक तंगी और अन्य मजबूरी के कारण स्कूल न जाने वालों में बेटियां भी शामिल हैं। करनाल में हुए सर्वे में चुने गए 812 बच्चों में से 60 प्रतिशत यानी 486 बेटियां हैं। अब ये बेटियां भी शिक्षा के मंदिर में जाएंगी।

यह है उद्देश्य
सीएमजीजीए साक्षी श्रीवास्तव ने बताया कि शिक्षा हमारा मौलिक अधिकार है, लेकिन कई बच्चे पारिवारिक हालात और आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा नहीं ले पाते। हर बच्चे को शिक्षित करने के उद्देश्य से यह सर्वे कराया गया था। उन्होंने बताया कि सर्वे के तहत चुने गए बच्चों को नि:शुल्क स्कूल में दाखिला कराया गया है।

यह भी आया सामने
मां-बाप काम पर निकल जाते, बच्चे हो रहे बुरी आदतों का शिकार
सर्वे में यह भी सामने आया है कि झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले ज्यादातर बच्चों बुरी आदतों का शिकार हो जाते हैं, क्योंकि सुबह ही मां-बाप तो कहीं मेहनत मजदूरी के लिए निकल जाते हैं और देर शाम वापस आते हैं। ऐसे में पीछे से बच्चे बुरी आदतों का शिकार हो जाते हैं।
विज्ञापन



ड्रॉप आउट व आउट ऑफ स्कूल रहने वाले बच्चों को लेकर सर्वे कराया गया था। सर्वे में शहर के अलग-अलग हिस्सों के 812 ऐसे बच्चों को चुना गया है। इन्हें शिक्षित करने के उद्देश्य से सभी का सरकारी स्कूलों में दाखिला कराया जाएगा। - राजपाल, डीईईओ करनाल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें