अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सेक्टर-8 के मकान नंबर 169 में देर रात चार साल का फीमेल तेंदुआ घुस गया। करीब चार घंटे सेक्टरवासियों ने तेंदुए की दहशत में गुजारने पड़े, क्योंकि तेंदुए को पकड़ने के लिए जब वाइल्ड लाइफ विभाग को बुलाया तो उनके पास तेंदुए को पकड़ने के लिए कोई सामान या उपकरण ही नहीं था। इस लिए उन्होंने रोहतक व पिपली विशेषज्ञों की टीम को बुलाया और पिपली से ट्रेंक्यूलाइजर गन मंगवानी पड़ी। इसके बाद कमरे की दीवार में सुराग कर तेंदुए को बेहोश कर उसे पकड़ा गया। तब जाकर सेक्टरवासियों ने राहत की सांस ली। बता दें यह तेंदुआ शहर में कई दिनों से घूम रहा था, क्योंकि 11 दिसंबर को जिला जेल के समीप रात को भी एक तेंदुआ देखा गया था और उसके पैरों के निशान भी मिले थे।
घर वाले सोच रहे थे कुत्ता या बिल्ली होगी, कमरा खोला तो दिखाई दिया तेंदुआ
सेक्टर आठ में मकान नंबर 169 निवासी संदीप महंदीरत्ता की पत्नी नीलम ने पंजे के निशान देखे। रसोई की खिड़की के शीशे और दीवार पर भी पंजों के निशान थे। उन्होंने सोचा कि कुत्ता या बिल्ली होगी। इसलिए निश्चिंत रही। जैसे ही वे छत पर गई तो पाया कि यह कोई जंगली जानवर है। उन्होंने यह देखते ही कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। संदीप महेंदीरत्ता तुरंत सेक्टर 9 चौकी में गया और बताया कि उनके घर में कोई जंगली जानवर आ गया। पुलिस ने वाइल्ड लाइफ विभाग को इसकी जानकारी दी। सुबह साढ़े नौ बजे वाइल्ड लाइफ की एक टीम मकान पर पहुंची। छानबीन की तो साफ हुआ कि यह तेंदुआ है। बस जैसे ही यह पता चला तो वहां अफरा-तफरी मच गई। टीम के सामने बड़ा सवाल था अब इसे काबू कैसे किया जाए क्योंकि कमरा छत पर और छोटा होने के कारण अंदर जाना मुशिकल था। इसलिए ट्रेंक्यूलाइजर गन चाहिए थी। करनाल टीम के पास यह उपकरण नहीं था।
कैलेसर के जंगल में ले गए तेंदुए को
रोहतक जिला वाइल्ड लाइफ अधिकारी दीपक अलवादी को तेंदुए की जानकारी दी गई। पिपली चिड़ियाघर से फोरेस्टर रामपाल और मदनलाल ट्रेंक्यूलाइजर गन लेकर मौके पर पहुंचे। दीपक अलवादी के नेतृत्व में डाक्टर अशोक खासा, पुनम राठी, इंस्पेक्टर दविंदर कुमार, अमित और नवीन की टीम ने दोपहर एक बजे मोर्चा संभाला। कमरे में कोई रोशनदान ना होने के कारण दीवार में सुराख किया और खिड़की का शीश तोड़कर तेंदुए को बेहोश किया गया। इसके बाद टीम तेंदुए को पकड़कर कालेसर के जंगल में लेकर गई।
नौ दिनों से शहर में घूम रहा था तेंदुआ
यह तेंदुआ करीब नौ दिनों से शहर में व आस-पास के क्षेत्र में घूम रहा था क्योंकि 11 दिसंबर की रात को जिला जेल के समीप पुलिस के जवान ने तेंदुए को देखा था और तेंदुए के पंचे के निशान भी पाए गए थे। इन निशानों को टीम ने लैब में भी भेजा था। इसके बाद कुंजपुरा के आस-पास भी तेंदुए को देखा गया था। गनीमत रही कि इस तेंदुए ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यह तेंदुआ मकान में घुसा कैसे और छत पर कैसे गया।