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उल्टी दस्त लगने से अनाज मंडी में दो मजदूरों की मौत, 500 से अधिक मजूदर बीमार

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। नई अनाज मंडी में उल्टी-दस्त लगने से करीब पांच सौ से अधिक मजदूर बीमार हो गए हैं, वहीं दो मजदूरों की मौत भी हो चुकी है। एक मृतक मजदूर के परिजन शव को रविवार को बिहार ले गए। मरने वालों के नाम मनोज और शंभू बताये जा रहे हैं। दोनों मृतक मजदूर नई अनाज मंडी में आढ़तियों के पास काम करते थे। इसके अलावा पांच सौ से अधिक मजदूर इधर-उधर मेडिकल दुकानों और अस्पतालों से दवा लेकर अपना इलाज करा रहे हैं। इधर स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम डॉक्टर कृष्णकांत के नेतृत्व में अनाज मंडी में पहुंच गई। रहस्यमयी बीमारी की जांच की जा रही है। मंडी में रहने वाले मजदूर रामधारी पासवान, मदन सिंह तथा अन्य मजदूरों ने बताया कि मनोज और शंभू को कुछ दिन पहले दस्त लगे थे। मनोज को अस्पताल में दाखिल करवाया गया था, लेकिन डॉक्टर ने उसे पीजीआई रेफर कर दिया। जहां उसकी मौत हो गई। मजदूरों ने बताया कि बिहार के ही रहने वाले 35 वर्षीय मजदूर शंभू को भी पहले उल्टी दस्त लगे थे और बाद में उसे बुखार आ गया। इसके बाद उसे अस्पताल भी भेजा गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। मजदूरों ने बताया कि सरकार को तुरंत ही अनाज मंडी में एक चिकित्सक कैंप लगाना चाहिए और खून की जांच करनी चाहिए, ताकि और मजदूरों की मौत न हो। मंडी के मजदूरों ने खुलासा किया कि पिछले कई दिनों से सीवरेज व्यवस्था ठप्प पड़ी है और सरकारी टूंटियों से पानी भी दूषित आ रहा है, जिसके चलते मजदूर बीमार पड़ रहे हैं। मजदूरों का कहना था कि अनाज मंडी में 600 से अधिक आढ़तियों की दुकानें है और एक दुकान पर 20-30 मजदूर काम करते हैं। इस समय धान का सीजन आ रहा है, जिसके चलते बिहार, यूपी और अन्य प्रदेशों से करीब 10 हजार मजदूर अनाज मंडी में काम के लिए आए हुए हैं।

अनाज मंडी में लगे हैं गंदगी के ढेर, फैल रही है बदबू
मजदूरों का कहना था कि जब धान आता है तो उसे साफ करने के लिए पंखा लगता है, लेकिन पंखे के दौरान निकलने वाला गर्दा वहीं पड़ा रहता है और कर्मचारी उसको उठाते नहीं। बारिश के चलते उसमें बदबू फैल रही है। मंडी में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। इसके अलावा मंडी में सीवरेज व्यवस्था भी ठप्प पड़ी है। जिसके चलते अनाज मंडी में मच्छरों की भरमार हो गई है। मजदूरों का यह भी कहना था कि निजी अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को ग्लूकोज लगाकर पहले तो अच्छा खासा बिल बना लेते है और फिर मजदूरों को रेफर कर रहे है। पहले मजदूरों का पेट खराब होता है और अचानक मरोड़े लग जाते है। इसके बाद उन्हें उलटियां लग जाती हैं।
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डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने डॉ. कृष्णकांत के नेतृत्व में एक टीम को अनाज मंडी में जांच के लिए भेजा है। डायरिया से मौत नहीं हो सकती। कोई और कारण हो सकता है। टीम फिलहाल जांच कर रही है।
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