अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। भारत सरकार की जल संरक्षण नीति के तहत सभी प्रदेशों के डार्क जोन एरिया को चिह्नित किया गया है। इसमें जिला करनाल का खंड करनाल भी शामिल है, जो कि डार्क जोन एरिया में गिना जाता है। सरकार के एकीकृत जल संरक्षण कार्यक्रम के तहत जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए खंड करनाल की 66 ग्राम पंचायतों का सर्वे करवाया गया है। इसमें पाया गया कि इन ग्राम पंचायतों में लगभग 650 नल ऐसे हैं, जिन पर टोंटियां नहीं लगी हुई हैं। इस कारण से प्रतिदिन कई हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए व डार्क जोन एरिया में जल संरक्षण की कवायद के लिए यह सर्वे करवाया गया है।
एडीसी निशांत यादव ने बताया कि एकीकृत जल संरक्षण कार्यक्रम के तहत जिला मेें जल संरक्षण तथा जल संचयन योजना को क्रियान्वित किया जा रहा है। जिन 66 ग्राम पंचायतों का सर्वे किया गया है, उनमें जन स्वास्थ्य विभाग की मदद से टोंटियां लगाई जाएंगी, ताकि जल की बर्बादी न हो। उन्होंने बताया कि जिला में जल की बर्बादी न हो इसके प्रति जिला प्रशासन काफी सजग है। इसके लिए स्थानीय एनजीओ की मदद से गांवों में जल संरक्षण संबंधी जागरूकता शिविर भी लगाएं जाएंगे, ताकि ग्रामीणों को जल बचाव तथा जल संचयन के बारे में जागरूक किया जा सके।
इस बारे में जिला योजना अधिकारी संगीता मेहता ने बताया कि भूमिगत जल संरक्षण के लिए एडीसी के निर्देशानुसार जिला में यह सर्वे करवाया गया। इस कार्य में सहायक योजना अधिकारी डॉ. विजय कौशिक का अहम रोल रहा, जिन्होंने पूरे सर्वे को कंपाइल करके आंकड़ों के रूप में प्रस्तुत किया तथा पूरे सर्वे कार्य की स्वयं मॉनीटरिंग भी किया। वहीं, सहायक योजना अधिकारी डॉ. विजय कौशिक ने बताया कि पानी लिकेज भी एक गंभीर समस्या है, जिसके प्रति लोगों को जागरूक किया जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि जल ही जीवन है कि नीति तभी कामयाब हो सकती है जब प्रत्येक व्यक्ति जल की व्यर्थ बर्बादी को देखकर तुरंत प्रभाव में आकर उसको बर्बाद होने से रोकें।