सड़क जाम कर हठयोग करने पर अड़े किसान, टकराव के हालात
-किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने में जुटी विपक्षी पार्टियां
-भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसान 21 जून को करेंगे हठयोग
-आज पानीपत में यूनियन की आपातकाल बैठक में होगा अंतिम निर्णय
-आनन-फानन में सीएम ने 30 जून को मिलने के लिए बुलाया
फोटो संख्या- 21
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। मध्यप्रदेश से शुरू हुआ किसानों का आंदोलन अब हरियाणा में भी जड़े जमाने लगा है, जिससे किसानों की मांगों पर भाजपा सरकार चारों तरफ से घिरती नजर आ रही है। एक तरफ जहां कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने किसानों के समर्थन में सीएम सिटी में सत्याग्रह शुरू कर भाजपा की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ा दी है, वहीं किसानों ने भी अब अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरने का एलान कर दिया है। कई दिनों से राज्यभर में शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे किसानों ने अब 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सड़क जाम कर हठयोग करने का एलान किया है। इस संबंध में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधि मंडल ने यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रमन मान के नेतृत्व में एसडीएम को मुुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने के कुछ घंटे बाद ही ओएसडी अमरेंद्र सिंह के माध्यम से बताया गया कि मुख्यमंत्री ने यूनियन के प्रतिनिधि मंडल को मिलने के लिए 30 जून को चंडीगढ़ बुलाया है, इसलिए वे अपने प्रदर्शन को स्थगित कर दें। हालांकि, यूनियन ने इसे सरकार का छलावा बताते हुए अभी अपने प्रदर्शन को स्थगित करने से इंकार कर दिया है। यूनियन का कहना है कि सरकार के इस बुलावे पर विचार-विमर्श के लिए आज पानीपत में आपात बैठक बुलाई गई है, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल स्थिति टकराव की बनी हुई है। प्रशासन के हाथ पैर फूले हुए हैं, एक तरफ योग दिवस पर इंद्री में सीएम का कार्यक्रम है, वहीं दूसरी ओर किसानों का हठयोग।
राज्य में किसान कई दिनों से कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग पर शुरू हुआ किसानों का आंदोलन अब राजनीति की धुरी बन गया है और इस राजनीतिक जोड़तोड़ का अखाड़ा बन रहा है सीएम सिटी करनाल। सभी विपक्षी राजनीतिक पार्टियां किसानों के इस मुद्दे को हथियाकर भाजपा सरकार को पीछे धकेलना चाहती हैं। एक तरफ जहां किसानों के पक्ष में इनेलो लगातार ब्लॉक और जिला स्तर पर प्रदर्शन कर रहा है, वहीं कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉ अशोक तंवर खुद यहां तीन दिवसीय सत्याग्रह शुरू कर चुके हैं। हालांकि राजनीतिक पार्टियों द्वारा मिल रहे इस भारी समर्थन के बाद भी किसान यूनियन अपनी चाल चलने में लगा हुआ है। भारतीय किसान यूनियन के सदस्य करीब एक माह से राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक कई शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सरकार को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी सरकार की तरफ से कोई जवाब न मिलने से अब किसानों में नाराजगी बढ़ने लगी है। किसानों ने अब अपनी मांगे मनवाने के लिए सड़क पर उतरने का एलान कर दिया है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने कहा कि हम अपनी मांगों को लेकर सरकार को कई बार मांग पत्र सौंप चुके हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं है। इसलिए मजबूरन हमें सड़क पर उतरना पड़ रहा है। रतन मान ने कहा कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जहां सभी योग करेंगे, वहीं सभी जिलों में किसान सड़कों पर बैठकर हठयोग करेंगे।
मामला हाथ से निकलता देख किसानों को मनाने में जुटी सरकार
किसानों की मांगों पर अभी तक सुस्त चाल चल रही भाजपा सरकार किसानों द्वारा सड़क पर उतरने का ऐलान करते ही हाथ-पैर मारने शुरू कर दिए। किसान यूनियन के प्रतिनिधि मंडल द्वारा एसडीएम को ज्ञापन दे अपनी मंशा बताते ही प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। इसकी सूचना तत्काल ओएसडी अमरेंद्र सिंह को दी गई, जहां से ओएसडी ने मुख्यमंत्री को पूरी जानकारी दे किसानों से मिलने का समय मांगा। वहां से समय मिलते ही शाम तक सरकार की तरफ से ओएसडी ने बयान जारी कर बताया कि मुख्यमंत्री ने किसानों के प्रतिनिधि मंडल को 30 जून को मिलने के लिए चंडीगढ़ बुलाया है, इसलिए वे अपने प्रदर्शन को स्थगित कर दें।
सरकार के प्रस्ताव पर किसान उलझन में
मुख्यमंत्री की तरफ से भले ही बैठक का प्रस्ताव भेज दिया गया हो, लेकिन सरकार के इस प्रस्ताव पर किसान अभी भी उलझन में है। इसका सबसे बड़ा कारण है किसानों को सरकार पर विश्वास न होना। अपनी मांगों को लेकर किसान प्रतिनिधि मंडल और सरकार के बीच पहले भी कई बार बैठक हो चुकी है, लेकिन इन बैठकों से किसानों को आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। लेकिन इस बार किसानों को बड़ा राजनीतिक समर्थन मिला है और वे फ्रंट सीट पर बैठे हैं, जबकि सरकार मजबूर नजर आ रही। इसलिए किसान आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई पर अड़े हैं। किसानों का कहना है कि ऐसी बैठक का कोई मतलब नहीं, जिसमें सिर्फ आश्वासन मिले। हालांकि सरकार के प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय आज पानीपत में लिया जाएगा।
सरकार के इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श करने के लिए पानीपत किसान भवन में राज्य स्तरीय आपात बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में निर्णय लिया जाएगा कि प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को स्वीकार्य करे या नहीं। अभी हमने अपने तयशुदा कार्यक्रम के तहत ही प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। हम किसानों की लड़ाई अंतिम सांस तक लड़ेंगे।
- रतन मान, प्रदेशाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन