अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। कर्ण नगरी के दिव्यांग स्वप्निल पाटिल ने बुलंद हौसले से जर्काता में इतिहास रचा। एशियन पैैरा गेम्स में स्वीमिंग में देश के तैराकों ने कुल आठ पदक हासिल किए। इनमें से तीन मेडल अकेले स्वप्निल के नाम रहे। करनाल के छोरे ने एक सिल्वर व दो ब्रॉन्ज लेकर देश का गौरव बढ़ाया। स्वप्निल ने 100 मीटर फ्री स्टाइल 59.77 सेकेंड में पार कर भारत का नया रिकॉर्ड भी कायम किया। तैराकी के इस वर्ग में खुद का ही 1.01 सेकेंड का रिकॉर्ड तोड़कर यह उपलब्धि हासिल की। वहीं फरीदाबाद की बेटी दिव्यांशी ने देश के लिए पहला मेडल जीतने का गौरव हासिल किया। 30 सितंबर को देश के 19 तैराकों ने इंडोनेशिया के लिए उड़ान भरी थी। करीब 16 दिन बाद भारतीय दल वापस लौट आया है। स्वप्निल ने अमर उजाला के साथ अपने अनुभव साझा किए।
पीएम ने बढ़ाया हौसला
एशियन पैरा गेम्स से मेडल जीतने के बाद लौैट खिलाड़ियों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हौसला बढ़ाया। दिल्ली स्थित पीएम हाउस में वह खिलाड़ियों से रूबरू हुए। हरियाणा की बेटी दिव्यांशी सतीजा को एक सिल्वर व एक ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर पीएम ने ट्वीट करके भी बधाई दी। जकार्ता में हरियाणा के दो ही तैराकों ने हिस्सा लिया और आठ में से पांच मेडल देश को दिलाए।
छह साल की उम्र में एक्सीडेंट, हार नहीं मानी
स्वप्निल पाटिल ने बताया कि छह साल की उम्र में एक्सीडेंट के बाद दायां पैर खराब हो गया था। लेकिन उसने हार नहीं मानी। डॉक्टर ने उसे तैराकी करने की सलाह दी। उसकी स्वीमिंग देखकर कोच कंवलजीत संधू ने उसे अपनी टीम में ले लिया। करनाल की सुभाष कॉलोनी निवासी यह तैराक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 10 मेडल जीत चुका है। नेशनल में 25 मेडल हासिल किए हैैं। 2006 से तैराकी कर रहा है।
सर्दियों में बैंगलुरु में करता है अभ्यास
करनाल में ऑल वेदर स्वीमिंग पूल नहीं हैै। इसलिए स्वप्निल सर्दियों में तैराकी के प्रशिक्षण के लिए बैंगलुरु जाता है। 12वीं की पढ़ाई ओपन से कर रहा है। फिलहाल अगले वर्ष मलेशिया में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी में जुटा है। ताकि 2020 के पैरा ओलंपिक में देश को पदक दिला सके। पिता संजय और मां लता का कहना है कि उन्हें बेटे की उपलब्धि पर गर्व है। उसने उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
फरीदाबाद की दिव्यांशी देश के लिए जीता पहला मेडल
जकार्ता में खिलाड़ियों के साथ गए स्वीमिंग कोच कंवलजीत संधू ने बताया कि फरीदाबाद की दिव्यांग दिव्यांशी देश के लिए मेडल जीतने वाली पहली महिला तैराक बनी गई हैं। इससे पहले किसी भी महिला तैराक ने मेडल नहीं जीता है। 15 वर्षीय दिव्यांशी ने एक सिल्वर एक ब्रॉन्ज हासिल किया है। वह कोच कंवलजीत की देखरेख में करनाल भी अभ्यास करती है।