अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन के महिला-पुरुष कर्मचारियों ने मंगलवार को काले पट्टी बांधकर व महिलाओं ने काले दुपट्टे ओढ़कर शहर में जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का जुलूस कमेटी चौक, आंबेडकर चौक, डीएवी स्कूल रोड, बस स्टैंड से प्रदर्शन करते हुए सीएमओ कार्यालय पहुंचा जहां उन्होंने जमकर नारेबाजी की। नौंवे दिन भी कर्मचारी मांगों को लेकर अनिश्चिकालीन हड़ताल पर डटे रहे और स्वास्थ्य सेवाएं बंद रखी। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
हड़ताल की अध्यक्षता पूर्व राज्य सचिव दर्शना देवी ने की। सिविल सर्जन कार्यालय में बहुउद्देश्यीय स्वास्थय कर्मचारी एसोसिएशन संबंधित सर्व कर्मचारी संघ को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों एवं सभी संघ यूनियनों ने अपना समर्थन दिया। स्वास्थ्य कर्मियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि बहुउद्देशीय स्वास्थय कर्मचारी एसोसिएशन हरियाणा काफी लम्बे समय से अपनी मांगों को लागू करवाने को लेकर प्रयासरत है और वे इस बारे में काफी बार निजी तौर पर महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा से भी मिल चुके हैं। प्रदर्शन में वित्तमंत्री मेहर सिंह, सुभाष खोखर, ओम सिंह संधू, सुरेंद्र सिंह पाढ़ा, रामफल, संजीव, राजपाल, सतीश, प्रदीप यादव, जोगिंद्र सिंह, अंजू मोर, राज्य कोष अधिकारी संतोष सैनी, उपप्रधान प्रमोद बाला, एसकेएस जिला प्रधान ओमप्रकाश सिंहमार, जिला सचिव कृष्ण शर्मा, प्रधान अशोक पांचाल, ओपी माटा, सतपाल सैनी ने स्वास्थय कर्मचारियों को अपना समर्थन दिया।
वर्कर यूनियन ने दिया हड़ताल को समर्थन
करनाल। ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशन वर्कर यूनियन मुख्यालय हिसार (संबंधित सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा) की राज्य कोर कमेटी ने बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों की सात दिन से चल रही है अनिश्चितकालीन हड़ताल को समर्थन करने का फैसला किया है। राज्य प्रधान सुरेश राठी, राज्य महासचिव नरेश कुमार व राज्य प्रेस सचिव सुरेश कुमार ने कहा कि हरियाणा सरकार ने चुनाव से पहले कर्मचारी वर्ग से बहुत बड़े बड़े वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आए हुए 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी उन वादों पर किसी भी प्रकार से गौर नहीं किया जा रहा है जब कर्मचारी अपने हक के लिए आंदोलन करते हैं तो हरियाणा सरकार अलोकतांत्रिक तरीके से कर्मचारियों पर एस्मा लगाकर आंदोलन को दबाना चाहती है। हरियाणा सरकार रोडवेज, बिजली, पटवारियों, ग्राम सचिवों, स्वास्थ्य कर्मियों पर बार-बार एस्मा का प्रयोग कर चुकी है। सरकार से मांग की गई कि तुरंत प्रभाव से निजीकरण की नीतियों को छोड़ते हुए कर्मचारियों की जायज मांगों का समाधान किया जाए वरना 10 सितंबर को तमाम प्रदेश के कर्मचारी विधानसभा सत्र का घेराव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे।