अमर उजाला ब्यूरो
घरौंडा। मंडियों में फसल की आवक तेज होते ही 1509 धान के भाव गिरने शुरू हो गए हैं। बीते पंद्रह दिनों में धान की 1509 वैरायटी के दाम 2500 रुपये प्रति क्विंटल से गिरकर 2200 रुपये तक पहुंच गए हैं। बारिश की मार से पैदावार में आई कमी और मंडी में धान के भाव गिरने से किसानों पर दोहरी चोट लगी है। किसानों के मुताबिक, खराब मौसम के कारण प्रति एकड़ सात से आठ क्विंटल तक पैदावार कम हुई है। मार्केट कमेटी के रिकार्ड के अनुसार भी इस वर्ष आवक में 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।
मौसम की मार झेल कर धान उत्पादन करने वाले किसान मंडी में मिल रहे भाव से मायूस है। मंडी में रोजाना बढ़ रही फसल की आवक के साथ ही धान के भाव निरंतर गिरावट की तरफ है। सितंबर के शुरुआती सप्ताह में धान की किस्म-1509 के भाव मंडी में 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक रहे, लेकिन अब दिन-प्रतिदिन भाव 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल टूट रहा है। मंगलवार को अपनी धान की फसल लेकर पहुंचे किसानों के चेहरों पर मायूसी दिखाई दी। किसान जगदीश, रणबीर सिंह, कुलदीप, कर्मचंद व अन्य ने बताया कि इस बार धान की फसल पर दोहरी मार पड़ी है। इस बार बेमौसमी बारिश धान की पैदावार पर पड़ा है। बीते वर्ष प्रति एकड़ 1509 धान की पैदावार 24 से 25 क्विंटल तक थी, लेकिन इस बार झाड़ केवल 15-18 क्विंटल में सिमट गया है। ऐसे में उन्हें प्रति एकड़ सात से आठ क्विंटल का नुकसान हुआ है। किसानों ने बताया कि दो दिन पहले तक 1509 धान के रेट अच्छे थे, लेकिन अब अचानक भाव दो सौ से तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल कम हो गए हैं। ऐसे में किसानों को मौसम की मार के बाद गिरते दामों ने जोर का झटका दिया है।
खर्च बढ़ा, भाव गिरे
मंडी में धान की फसल लेकर पहुंचे किसानों ने बताया कि इस बार धान उत्पादन में उनका खर्च बढ़ा है। बीते सीजन में कंबाइन से कटाई का रेट 1200 रुपये प्रति एकड़ था, लेकिन इस बार यह बढ़ कर 1500 से 1600 रुपये हो चुका है। बारिश और तेज हवाओं के कारण धान की जो फसल खेतों में गिरी पड़ी है, उसकी कटाई के लिए कंबाइन का चार्ज तीन हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गया है। ऐसे में एक तरफ किसानों को बढ़ा हुआ खर्च झेलना पड़ रहा है। वहीं, धान के गिरते दामों ने उनकी कमर तोड़ने का काम किया है।
आवक में 18 हजार क्विंटल की कमी
मार्केट कमेटी से मिले आंकड़ों से भी जाहिर है कि इस बार मौसम की मार का असर धान की पैदावार पर हुआ है। बीते वर्ष 18 सितंबर तक मंडी में करीब 63 हजार क्विंटल की आवक हुई, लेकिन इस वर्ष अब तक सिर्फ 45 हजार क्विंटल धान की मंडी में पहुंची है। आवक में हुई 18 हजार क्विंटल की गिरावट साफ करती है कि इस बार धान का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में करीब 25 प्रतिशत तक कम हुआ है। फसल के कम उत्पादन और गिरते भाव के कारण किसान मायूस है और अपनी फसल बेचने के बावजूद उनके चेहरों पर खुशी दिखाई नहीं देती।
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बीते वर्ष 18 सितंबर तक करीब 63 हजार क्विंटल धान की आवक हुई थी, लेकिन इस बार सिर्फ 45 हजार क्विंटल धान अभी तक मंडी में आई है। 1509 धान के भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप घटते-बढ़ते रहते हैं। फसल में नमी की मात्रा के कारण भी कई बार भाव गिर जाते हैं।
-नरेश मान, मार्केट कमेटी,सचिव घरौंडा।