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सदन की आखिरी बैठक में भी गूंजी शहर की पुरानी समस्याएं, पांच साल में न बंदरों-कुतों से और ही अंधेरे से मिला छुटकारा

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। आगामी 2 जुलाई को नगर निगम के हाउस का कार्यकाल पूरा हो रहा है। पिछले पांच साल में हर बैठक में शहर की समस्याओं को लेकर निगम पार्षद अधिकारियों पर हमलावर रहे। कुछ इसी प्रकार के हालात बुधवार को सदन की आखिरी बैठक में भी रहे।
करीब तीन घंटे तक चली बैठक में जमकर हंगामा हुआ। बैठक की खास बात ये रही कि पार्षदों ने एक-एक करके वही पुरानी समस्याएं अपने वार्डों में गिनवाई, जिनके लिए वे पांच साल से लड़ रहे हैं। लगभग हर पार्षद ने बंदरों और कुत्तों से छुटकारा दिलाने की माग की रात को खराब स्ट्रीट लाइट पर पूरा सदन एकमत दिखा। इसके अलावा, कई वार्डों में सफाई नहीं होना, ब्लाक पड़े नाले और टेंडर होने के बावजूद कार्य नहीं होने का रोना रोया। चुनावी माहौल को देखते हुए तैयारी के साथ आए सभी पार्षदों ने अपने-अपने वार्ड को चमकाने के लिए करीब दस-दस कार्यों की लिस्ट निगम को थमा दी, इस पर निगम आयुक्त ने भी तपाक से जवाब दिया, अभी निगम के खजाने में पैसे नहीं है, इसलिए हर पार्षद केवल दो दो मांगें ही हमें दें। शेष को बजट आने के बाद देखा जाएगा।
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तीन घंटे चली बैठक, 18 एजेंडे पास, आउट आफ एजेंडा बहस
विकास सदन में सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक, दोपहर 2 बजे तक चली। बैठक में कुल 18 एजेंडे रखे गए, जो लगभग सर्वसम्मति से पास हुए। सभी एजेंडे अलग-अलग वार्ड में लंबित पड़े कार्यों को पूरा कराने से संबंधित रहे। इससे पहले, हर पार्षद से उनके वार्डों की एक एक करके समस्याएं जानी गईं। इसके बाद अधिकारियों ने उन पर जवाब भी दिया। वार्ड नंबर एक से लेकर 20 तक सभी पार्षदों ने अटके विकास कार्यों पर नाराजगी जताई और अधिकारियों के रवैये पर भी रोष जताया। सबसे ज्यादा शिकायत निगम की बिजली ब्रांच की आई। हर पार्षद ने एसडीओ के खिलाफ खुलकर बोला और आरोप लगाया कि शहर की 50 प्रतिशत से भी कम स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। पार्षद बलविंद्र सिंह ने तो एसडीओ पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। इसके साथ ही पार्षद बाघ सिंह, यशपाल मित्तल, सुदर्शन कालड़ा, सोनिया पंडित ने बताया कि उनके वार्डों में बंदर और आवारा कुत्तों को लेकर लोग परेशान हैं। वार्ड नंबर 20 के पार्षद जोगेंद्र चौहान ने बताया कि उनके वार्ड में न तो सफाई कराई है, बारिश आने को है और नाले ब्लॉक पड़े हैं। मेयर रेणु बाला गुप्ता ने बताया कि उसके वार्ड में फाउंडेशन बनी हुई है, लेकिन पिछले छह माह से हाईमास्ट लाइट नहीं लगाई गई है। सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग ने कुंजपुरा रोड पर नालों की सफाई नहीं पर नाराजगी जताई। इसी प्रकार, डिप्टी मेयर मनोज वधवा ने बताया कि उनके वार्ड की लाइटें भी खराब हैं, आवारा कुत्तों से लोग परेशान हैं। अन्य पार्षदों ने भी वही मांगें रखी, जिनके लिए वे पांच साल से सदन में लड़ाई लड़ रहे हैं।

निशाने पर रहे एसडीओ
नगर निगम हाउस के वर्तमान काल की आखिरी बैठक में भी निगम के पार्षदों ने अधिकारियों पर कोई यायत नहीं बरती। बैठक की शुरुआत से लेकर खत्म होने तक पार्षदों के निशाने पर अधिकारी रहे। हर वार्ड में बिजली की समस्याएं बराबर गिनाई गई। सभी पार्षदों ने निगम की बिजली ब्रांच के खिलाफ खुलकर बोला और एसडीओ पर गंभीर आरोप लगाए। पार्षद सतीश से लेकर ब लविंद्र, रामचंद्र काला समेत सभी पार्षदों ने एसडीओ द्वारा पार्षदों की सुनवाई नहीं करने के आरोप लगाए। बल व द्र सिंह ने तो यहां तक दिया कि एसडीओ जानबुझकर हमारे वाडों में लाइट ठीक नहीं करता है।
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मनोनीत पार्षद जैन बोले, हो गया हंगामा
प्रदेश सरकार की ओर से अशोक जैन, वीर विक्रम और सभ्रवाल को मनोनीत पार्षद बना रखा है। सभी 20 वार्डों के पार्षदों से मांगें लेने के बाद मनोनीत पार्षद अशोक जैन का नंबर आया। जैन ने पार्षद सुदेश गुलाटी के वार्ड नंबर 13 में पार्षद के घर के साथ ही लगती गली नहीं बनने की बात कही तो तुरंत सुदेश गुलाटी ने इसका विरोध किया। इसके बाद दोनों पार्षद आमने सामने आ गए। विनोद तितोरिया ने गुलाटी का समर्थन किया साथ ही जैन को सदन से बाहर जाने को कहा। मामला इतना गर्म हो गया कि डिप्टी मेयर मनोज वधवा भी गुलाटी के पक्ष में उतर आए और मनोनीत पार्षद वीर विक्रम द्वारा उनके वार्ड में ओपन जिम का उद्घाटन करने का विरोध जताया। वधवा और विक्रम में तीखी नोक-झोंक हुई। करीब आधे घंटे तक चले हंगामे के बाद मेयर रेणु बाला खुद पार्षदों के बीच पहुंचे और सभी को समझाया। चयनित पार्षदों ने मनोनीत पार्षदों द्वारा वार्डों में उद्घाटन करने आदि पर आपत्ति जताई।
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