अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। तालमेल कमेटी हरियाणा राज्य परिवहन से जुड़े कर्मचारियों ने सोमवार को करनाल डिपो पर दो घंटे गेट मीटिंग कर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने कथित टिकट घोटाले का पुरजोर विरोध किया। इस दौरान अधिकारियों के खिलाफ नारे लगाए और सरकार से मांग की गई कि एसीएस धनपत राय को इस पद से मुक्त किया जाए। कर्मचारी नेताओं ने आरोप जड़ा कि एसीएस की प्राइवेट बस समिति वालों से मिलीभगत है।
प्रेस नोट में इस मांग के बाद जब राज्य वरिष्ठ उपप्रधान सुरेश लाठर से अमर उजाला ने पूछा गया कि एसीएस की मिलीभगत कैसे है? तो वे इसका जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने दो बार फोन कर अलग-अलग बयान दिए। पहले तो कहा कि आउटसोर्स पर लगे ड्राइवरों को हटाने के मामले में एसीएस संलिप्त हैं। फिर दूसरी बार में उन्होंने कहा कि किलोमीटर स्कीम के लिए एसीएस जिम्मेवार है, लेकिन कथित टिकट घोटाले में उनकी मिलीभगत कैसे है, इसका उनके पास कोई जवाब नहीं था। हालांकि, बाद में उन्होंने तत्कालीन ट्रैफिक मैनेजर संजय रावल से एससीएस की मिलीभगत होने की बात कही।
कर्मचारी नेताओं का आरोप- हड़ताल के दौरान हुआ बहुत बड़ा टिकट घोटाला
प्रेस नोट अनुसार, गेट मीटिंग में शामिल कर्मचारी नेताओं का आरोप है करनाल डिपो में हड़ताल के दौरान करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है। करनाल डिपो में अवैध रूप से टिकट छपाई गई। 57 लाख की टिकटें बिकी हुई दिखाई थी और अब 40 लाख की टिकटें बिकी हुई दिखा रहे हैं। हड़ताल के दौरान जब 50-60 कंडक्टर ड्यूटी पर थे। उन्होंने उन कंडक्टरों को सरकारी टिकटें देकर रूट पर क्यों नहीं चलाया और प्राइवेट टिकटें इन्होंने क्यों छपवाई? जबकि इसमें किसी अधिकारी ने परमिशन नहीं दी थी। यह बहुत बड़ा घोटाला है।
जीएम बोले- हड़ताल के दौरान टिकट एकाउंट क्लॉज न होने को दे रहे घोटाले का नाम
उधर, रोडवेज जीएम अश्विनी डोगरा का कहना है कि टिकट के मामले में कोई घोटाला नहीं हुआ है। कर्मचारियों की जब 18 दिन की हड़ताल हुई थी। तब आउट सोर्सिंग पर कुछ कर्मचारी रखे थे। उस दौरान बस सर्विस बेहतर देना ही उद्देश्य था। तो कुछ टिकटें ऑफलाइन मंगवाई गई। जितनी टिकटें कर्मचारियों को दी जाती थी, उनका मिलान के बाद रोजाना कैश भी जमा हो जाता था। जब हड़ताल खुली तो टिकटों का यह एकाउंट क्लॉज नहीं किया गया। बस सिर्फ इतनी सी लापरवाही थी, जिसे कर्मचारी घोटाले का नाम दे रहे हैं। अब हमने एकाउंट क्लॉज किए हैं, तो सब सही पाया गया है। चंडीगढ़ में इसकी रिपोर्ट भी भेज दी गई है।
जानिए कैसे इश्यू होती हैं रोडवेज में टिकटें
जीएम अश्विनी डोगरा के अनुसार, बसों की टिकटें ऑनलाइन जारी होती हैं। इसके लिए कर्मचारी का नाम और इंप्लाई कोड का इस्तेमाल किया जाता है। इसी के बाद ही टिकटें जारी होती हैं। उन्होंने बताया कि हड़ताल के जो आउट सोर्सिंग पर कर्मचारी रखे थे। उनके इंप्लाई कोड नहीं थे। इसलिए उनके लिए ऑफलाइन टिकटें मंगवाई गईं थीं।
जांच में हो गया टिकट और पैसों का मिलान, नहीं हुआ कोई घोटाला
इस मामले में सोमवार को जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट हेडक्वार्टर के चीफ अकाउंट ऑफिसर को सौंप दी। जांच अधिकारी राजकुमार कौशल ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि ये कोई घोटाला नहीं था, बल्कि अकाउंट का मिलान नहीं होना था। जांच के दौरान टिकटें भी मिल गई और अकाउंट भी बराबर हो गया। जांच के दौरान घोटाले के कोई भी तथ्य सामने नहीं आए हैं।