अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। एशियन योगा स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में करनाल की सृष्टि ने सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। कोच लवलीन गाबा की शिष्या ने सब जूनियर वर्ग में यह उपलब्धि हासिल की। साढ़े दस साल की सृष्टि आठ से 11 आयु वर्ग में मैदान में उतरी। शानदार प्रदर्शन की बदौलत दूसरे स्थान पर रही। पहला स्थान वेस्ट बंगाल की खिलाड़ी के नाम रहा। सेक्टर-9 निवासी सृष्टि ने जटिल आसन भी आसानी से कर दिखाए। यह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता 27 से 30 सितंबर तक केरल के तिरूवंतपुरम में आयोजित की गई। कर्ण स्टेडियम के योगा खिलाड़ियों को इसकी भनक लगी तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा सभी ने सृष्टि के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सृष्टि करनाल के सेक्टर-6 स्थित प्रताप पब्लिक स्कूल की छात्रा है।
15 देशों के खिलाड़ी मैदान में थे
योगा फेडरेशन ऑफ इंडिया ने यह प्रतियोगिता करवाई। इसमें 15 देशों के 500 से अधिक खिलाड़ी मैदान में उतरे। भारत के 150 खिलाड़ियों ने इसमें हिस्सा लिया। करनाल से सृष्टि और हरियाणा पुलिस के जवान वीरभान ने देश का प्रतिनिधित्व किया। इरान, हांकांग, थाईलैंड, सिंगापुर, श्रीलंका, दुबई, मलेशिया, कोरिया व वियतनाम सहित कई देशों के दिग्गजों ने मेडल के लिए अपनी ताकत झोंकी।
अब तक 12 गोल्ड सहित 17 मेडल
मां सरोज दहिया ने बताया सृष्टि ने आठ साल की उम्र से योग सीखना शुरू कर दिया था। कर्ण स्टेडियम में कोच लवलीन गाबा की देखरेख में रोजाना शाम को तीन घंटे अभ्यास करती है। सुबह घर पर प्रेक्टिस के बाद स्कूल जाती है। करनाल की यह होनहार प्लेयर 21 प्रतियोगिताओं में 12 गोल्ड सहित कुल 17 मेडल जीत चुकी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इससे पहले मोहाली में गोल्ड मेडल जीता था।
मां-बाप को बेटी पर नाज
पिता रविंद्र दहिया और मां सरोज को अपनी बेटी पर गर्व है। उनका कहना है कि सृष्टि ने देश का नाम रोशन किया हैै। 2017 में आयोजित नेशनल में सिल्वर मेडल जीतने के बाद उसका चयन इस चैंपियनशिप के लिए हुआ था। 24 से केरल में ही कैंप शुरू हो गया था। बेटी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दूसरा मेडल जीता तो मां-बाप खुशी से उछल पड़े। सृष्टि का बड़ा भाई हर्षित दहिया शूटिंग का प्लेयर है। 10 और 25 मीटर में नेशनल तक खेल चुका है। रविंद्र दहिया ने बताया कि सृष्टि अब वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी करेगी।
मां-बाप की मेहनत भी कम नहीं : कोच
कोच लवलीन गाबा ने कहा कि सृष्टि में हुनर है। यह उसके सफर की शुरुआत है। पूरा विश्वास है कि वह देश के लिए कई गोल्ड मेडल जीतेगी। दूसरे बच्चों को भी उससे सबक लें। सृष्टि ने मेहनत के दम पर यह पदक हासिल किया है। सृष्टि के मां-बाप की मेहनत भी कम नहीं है। वह रोजाना उसके साथ कर्ण स्टेडियम में आते हैं।