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Karnal News: होर्मुज संकट से समुद्र, बंदरगाहों में अटका 1.5 लाख टन चावल

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करनाल। होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध के चलते बार-बार पैदा हो रही रुकावट ने भारत के बासमती चावल कारोबार की चिंता बढ़ा दी है। गल्फ देशों को भेजा जाने वाला भारतीय चावल समुद्री रास्ते में फंसने लगा है। करीब एक से डेढ़ लाख मीट्रिक टन चावल बंदरगाहों और समुद्र के बीच अटका हुआ है।
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ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (एआईआरईए) अध्यक्ष और बोर्ड सदस्य सतीश गोयल के अनुसार व्यापारियों में सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगले दो महीने में नई बासमती फसल मंडियों में पहुंचने लगेगी। अगर तब तक होर्मुज संकट नहीं सुलझा और निर्यातकों के पास पर्याप्त कार्यशील पूंजी नहीं रही तो किसानों से धान की खरीद प्रभावित हो सकती है। एआईआरईए ने केंद्र सरकार से कम से कम एक साल तक ब्याज में राहत देने की मांग की है।


सतीश गोयल ने बताया कि अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान भारत ने करीब 65 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात किया। यह देश का अब तक का सबसे अधिक बासमती निर्यात रहा। होर्मुज संकट सामने नहीं आता तो मौजूदा सीजन में भारत का बासमती निर्यात करीब 67 से 68 लाख टन तक पहुंच सकता था। अब निर्यातकों ने करीब 70 लाख टन का लक्ष्य रखा है। लेकिन इस लक्ष्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती गल्फ क्षेत्र में पैदा हुआ समुद्री संकट है।भारत के कुल बासमती निर्यात का करीब 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा गल्फ देशों को जाता है। ईरान, इराक और सऊदी अरब को करीब-करीब एक-एक मिलियन टन चावल भेजे जाने की बात कही गई है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात और यमन भी भारतीय बासमती के बड़े बाजार हैं।
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मई-जून में कीमतों ने संभाला कारोबार :
एआईआरईए के अनुसार, अप्रैल 2025 में भारत से 6 लाख 47 हजार 71 मीट्रिक टन बासमती चावल निर्यात हुआ था। इसका निर्यात मूल्य 4716.65 करोड़ रुपये था। इसके मुकाबले अप्रैल 2026 में निर्यात घटकर 4 लाख 74 हजार मीट्रिक टन रह गया। एक साल में करीब 1.73 लाख मीट्रिक टन की कमी आई। निर्यात का मूल्य भी घटकर 4078.87 करोड़ रुपये रह गया जो अप्रैल 2025 के मुकाबले 637.78 करोड़ रुपये कम था। इसके बाद मई 2025 में 5 लाख 78 हजार 938 मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था। इसका मूल्य 4252.19 करोड़ रुपये था।
मई 2026 में निर्यात की मात्रा घटकर 5 लाख 38 हजार 722 मीट्रिक टन रह गई। यानी 40 हजार 216 मीट्रिक टन कम चावल बाहर गया। इसके बावजूद कीमतों में बढ़ोतरी के कारण निर्यात का मूल्य बढ़कर 4774.87 करोड़ रुपये पहुंच गया। मई में पिछले साल की तुलना में 522.68 करोड़ रुपये अधिक का कारोबार हुआ।
जून 2025 में 5 लाख 6 हजार 247 मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था। इसका मूल्य 3814.05 करोड़ रुपये रहा। जून 2026 में निर्यात बढ़कर 5 लाख 25 हजार 678 मीट्रिक टन हो गया। इसका मूल्य भी बढ़कर 4813.13 करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी जून में निर्यात की मात्रा के साथ कारोबार का कुल मूल्य भी बढ़ा।

समुद्र में फंसा माल, शिपिंग भी बनी बड़ी चुनौती
एआईआरईए अध्यक्ष सतीश गोयल के अनुसार, युद्ध की स्थिति के कारण निर्यात लगातार प्रभावित हो रहा है। कभी समुद्री रास्ता खुल रहा है तो कभी बाधित हो रहा है। इसी वजह से बड़ी मात्रा में माल रास्ते में फंस रहा है। जुलाई में दोबारा युद्ध की स्थिति बनने के बाद करीब एक से डेढ़ लाख टन चावल बंदरगाहों और समुद्र के बीच फंसने की जानकारी मिली है। इससे निर्यातकों की पूंजी माल में अटक गई है और भुगतान का चक्र भी प्रभावित हो रहा है।
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