संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कारीगरों और शिल्पकारों की कार्यकुशलता को बढ़ाने के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना वरदान साबित हो रही है। योजना के तहत कारीगर को औजार खरीदने के लिए 15 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके साथ-साथ एक लाख रुपये तक के लोन की सुविधा भी है। यह जानकारी उपायुक्त उत्तम सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि एमएसएमई द्वारा पारंपरिक व्यवसायों में लगे कारीगरों और शिल्पकारों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए एक जन-जागरूकता अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है। जिससे कि स्थानीय कारीगरों को योजना के तहत दिए जाने वाले लोन, प्रशिक्षण व अन्य सुविधाओं की जानकारी मिल सके। उन्होंने बताया कि इस योजना में 18 व्यवसाय शामिल किए गए हैं।
इनमें सुनार, नाव बनाना, शस्त्राकार, लुहार, हथौड़ा व लोहे के औजार बनाना, ताला बनाना, कुंभकार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी, चटाई बनाना, गुडिया व खिलौने बनाना, बारबर, धोबी, दर्जी, बुनकर और मछली पकड़ने के लिए जाल बनाने का काम शामिल है। विभिन्न व्यवसायों से जुड़े दस्तकारों को स्कीम के अंतर्गत प्रशिक्षण, टूल किट व बैंक लोन की सुविधा प्रदान की जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस योजना में कारीगर को पहले विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण करवाना होगा। पंजीकरण के बाद इन कारीगरों की जिला में स्थापित किए गए कौशल विकास केंद्रों में ट्रेनिंग करवाई जाएगी। लाभपात्रों को टूल किट खरीदने के लिए 15 हजार रुपए का अनुदान भी दिया जाएगा। छोटे कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पहले एक लाख रुपए का लोन दिया जाएगा। जिसे 18 महीनों में पांच प्रतिशत की मामूली ब्याज दर से अदा करना है।
बैंक ऋण की अदायगी के बाद इन कारीगरों को दोबारा ट्रेनिंग दिलवाई जाएगी। ट्रेनिंग में हर रोज 500 रुपए का भत्ता भी दिया जाएगा। एक लोन पूरा होने के बाद पात्र कारीगर को दो लाख रुपए का लोन मिलेगा, जिसकी अदायगी तीस माह में की जानी है। इस दौरान कारीगरों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।