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विधायक के गोद लिए गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अध्यापकों का भारी टोटा

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विधायक के गोद लिए असंध के गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अध्यापकों का टोटा
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साढ़े पांच सौ छात्राओं पर 6 अध्यापक, साइंस-कॉमर्स के टीचर आज तक नहीं आए, पढ़ाई छोड़ रहीं छात्राएं

- स्कूल में करीब तीन महीने से नहीं है प्रिंसिपल
- पिछले वर्ष की तुलना में छात्राओं की संख्या 100 हुई कम
- स्कूल में न प्रिंसिपल, न चपरासी और न ही सफाई कर्मचारी
- मेडिकल, नोन मेडिकल व कॉमर्स के अध्यापक नहीं दे पाई सरकार, छात्राओं में रोष

फोटो संख्या - 21, 22
रजत राणा
असंध। विधायक बख्शीश सिंह विर्क द्वारा गोद लिए गए असंध के गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आलम अध्यापकों की कमी है। स्कूल में आज तक मेडिकल, नोन मेडिकल व कॉमर्स का कोई अध्यापक नहीं आया है। बिना अध्यापकों के कोई भी लड़की मेडिकल, नोन मेडिकल व कॉमर्स में दाखिला नहीं ले रही है और वह मजबूरन कला संकाय में ही पढ़ाई करने को मजबूर है। अध्यापक न होने के कारण पिछले वर्ष की तुलना में लगभग सौ छात्राओं की संख्या कम हुई है। यहां तक करीब तीन महीने से स्कूल में प्रिंसिपल तक का पद खाली पड़ा हुआ है। इसकी जिम्मेवारी असंध खंड शिक्षा अधिकारी को सौंपी गई है। खंड शिक्षा अधिकारी इसके अलावा खुद ग्याहरवीं व बाहरवीं कक्षा की छात्राओं को अंग्रेजी भी पढ़ाते हैं।

550 छात्राएं और अध्यापक केवल 6
सालवन चौक के पास स्थित असंध के गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में इस समय लगभग साढ़े पांच सौ छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही है या यूं कंहे की सरकार शिक्षा के नाम पर अध्यापकों के अभाव में साढ़े पांच सौ छात्राओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। स्कूल में लेक्चरर की कुल 18 पोस्ट हैं, जिनमें से सिर्फ 6 ही लेक्चरर स्थाई रूप से स्कूल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, वहीं 12 पद रिक्त पड़े हैं। यहां पर 2 गेस्ट लेक्चरर भी हैं। वहीं इसके अलावा 10 पीजीटी अध्यापकों की पोस्ट हैं, जिनमें से 5 अध्यापक ही स्थाई हैं, जबकि 5 की पोस्ट खाली पड़ी है। यहां पर भी 2 गेस्ट टीचर पढ़ा रहे हैं। स्कूल में अंग्रेजी की 3, कैमिस्ट्री 1, कॉमर्स 1, फिजिक्स 1, संस्कृत 2, कंप्यूटर साइंस 1, ड्राइंग 1 व गृह विज्ञान की 1 पोस्ट खाली है। इन विषयों को स्कूल में पढ़ाने के लिए एक भी अध्यापक नहीं है। इसके अलावा, स्कूल में न तो कोई चपरासी है और न ही कोई सफाई कर्मचारी।
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दसवीं का परीक्षा परिणाम रहा था 30.58 प्रतिशत
अध्यापकों की कमी के कारण इस वर्ष दसवीं कक्षा का परीक्षा परिणाम मात्र 30.58 प्रतिशत ही रहा था। दसवीं कक्षा में कुल 121 छात्राएं थी, इनमें से मात्र 37 छात्राएं ही पास हो पाई थी। इस वर्ष आए दसवीं के रिजल्ट को देखते हुए इस वर्ष दसवीं कक्षा में छात्राओं की संख्या बहुत कम हुई है। पिछले वर्ष दसवी कक्षा में 123 छात्राएं थी जो इस बार कम होकर मात्र 76 रह गई हैं। यह आंकड़ा बेटी बचाव बेटी पढ़ाओ की असली तस्वीर दिखाने के लिए काफी है।


एक ही कक्षा में पढ़ रही 70 छात्राएं
स्कूल में कक्षा छह में 100 छात्राएं, सातवीं कक्षा में 92 छात्राएं, आठवीं कक्षा में 77 छात्राएं, नौवीं कक्षा में 117 छात्राएं, दसवीं कक्षा में 76 छात्राएं, ग्याहरवीं कक्षा में 53 छात्राएं व बाहरवीं कक्षा में 24 छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। छठी कक्षा से दसवीं कक्षा तक दो-दो सेक्शन बनाए हुए हैं यानी हर सेक्शन में 40 से ज्यादा छात्राओं को रखा गया है, ये सब अध्यापकों की कमी के कारण हो रहा है। स्कूल में कोई भी लड़की मेडिकल, नोन मेडिकल व कॉमर्स में दाखिला नहीं ले रही है, लेकिन इसके साथ-साथ कला संकाय में दाखिला लेने से भी शहर की छात्राओं का मोह भंग हो चुका है।
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अधिकारी हर महीने अध्यापकों की लिस्ट मांगते हैं, लेकिन अध्यापक भेजते नहीं : बीईओ
इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी महेंद्र नरवाल का कहना है स्कूल में अध्यापकों की भारी कमी है। इसको लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को लिखित में भेजा जा चुका है। अधिकारी हर महीने में स्कूल में अध्यापकों के रिक्त पदों की लिस्ट मांगते हैं, लेकिन आज तक कोई अध्यापक नही भेजा। स्कूल में अध्यापकों की कमी के कारण छात्राओं को पढ़ाई में काफी परेशानियां आ रही हैं।
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