डाक्टर और नर्स जरा सी इंसानियत दिखाती तो बच सकता था नवजात
अमर उजाला ब्यूरो
घरौंडा। गांव स्टौंडी की एक महिला का फुटपाथ पर गर्भपात होने के मामले में सिविल सर्जन ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। जांच टीम शनिवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंची और महिला के पति कृष्णपाल के बयान दर्ज किए। वहीं, उस समय ड्यूटी पर तैनात डाक्टर पहले दिन जांच में शामिल नहीं हो सकी। जांच शुरू होने से अस्पताल में हड़कंप का माहौल बना हुआ है। पीड़ित कृष्णपाल ने जांच टीम को दिए अपने बयान में कहा है कि, अगर डॉक्टर व नर्स ने थोड़ी-सी इंसानियत दिखाई होती, तो उसका नवजात शिशु बच सकता था। टीम के सामने वह कई बार फफक पड़ा। गांव स्टौंडी निवासी कृष्णपाल ने बताया कि गुरुवार सुबह लगभग चार बजे अपनी गर्भवती पत्नी को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लेकर आया था। पीड़ित का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने उसकी पत्नी को चेक तक नहीं किया और रेफर की पर्ची हाथ में थमा दी। यहां तक की डॉक्टर ने उसे एंबुलेंस का नंबर भी नहीं दिया। इधर-उधर से एंबुलेंस का नंबर लेकर उससे संपर्क साधा। एंबुलेंस ड्राइवर ने भी उसे रास्ता नहीं दिया, तो आखिरकार कृष्ण अपनी पत्नी को बाइक पर लेकर करनाल के लिए चल दिया। थोड़ी दूर जाने के बाद फुटपाथ पर गर्भपात हो गया। पीड़ित कृष्ण कुमार ने इसकी शिकायत सीएम विंडो, सीएमओ, जिला उपायुक्त व हलका विधायक हरविंद्र कल्याण से की।
डिप्टी सीएमओ करेंगी जांच, लगाए कई आरोप
सीएमओ ने पूरे मामले की जांच करने के लिए शनिवार को डॉक्टर अनिता के नेतृत्व में एक टीम को घरौंडा में भेजा। जांच टीम के सामने कृष्ण कुमार ने कई आरोप लगाए हैं। कृष्ण ने बताया कि उसकी पत्नी दर्द से कहराती रही, लेकिन नर्स ने उसे एक टेबलेट व टीका लगाकर रेफर कर दिया। लगभग एक घंटे तक दर्द से कहराती रही और वह मजबूरन एंबुलेंस का इंतजार करता रहा। पीड़ित ने यह भी कहा कि अस्पताल में कोई कमी नहीं है, लेकिन डाक्टरों व स्टाफ में सहयोग करने की भावना नहीं है। इस बारे में डॉ. अनिता ने कहा कि महिला के पति कृष्णपाल के बयान दर्ज कर लिए है। जांच के बाद पूरे मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी। अगर कोई दोषी है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।