सीएम साहब, कैसे पढ़ेंगी बेटियां, स्कूल में नहीं हैं अध्यापक
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल (घरौंडा) सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है, लेकिन सरकार बेटियों को पढ़ाने की पूरी सुविधा देने में नाकाम साबित हो रही है। गांव मूनक के राजकीय उच्च विद्यालय में पिछले काफी दिनों से अध्यापकों की कमी चल रही है। इसके चलते स्कूल की छात्राओं को सड़क पर उतरना पड़ा। छात्रों ने अपनी मांग को लेकर गांव में रोष मार्च निकाला और सीएम मनोहर लाल की जनसभा में पहुुंच गईं। पंडाल में ही छात्राएं चिल्ला-चिल्ला कर अध्यापकों की कमी को पूरा करने की मांग की। साथ ही छात्राओं ने कहा कि, सीएम साहब जब स्कूलों में अध्यापक ही नहीं हैं तो बेटियां पढ़ेंगी कैसे? छात्राओं के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें सीएम से मिलने से पहले ही रोक दिया। छात्राओं ने अपना मांगपत्र सीएम को भेजा। इस पर खट्टर ने आश्वान दिया कि जल्द ही अध्यापकों के सभी खाली पद भरे जाएंगे।
रविवार को गांव मूनक के स्टेडियम में ग्रामीण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शिरकत की। राजकीय उच्च विद्यालय मूनक में लगभग पांच सौ छात्राएं हैं। जिन्हें पढ़ाने के लिए पांच ही टीचर हैं। पिछले काफी दिनों से स्कूल में अध्यापकों की कमी चल रही है। एसएमसी व छात्रों के अभिभावकों ने कई बार उच्च अधिकारियों से बातचीत की, लेकिन कोई हल नहीं निकला। छात्राओं ने अभिभावकों के साथ गांव में रोष मार्च निकाला और बाद में सीएम से मिलने के लिए जनसभा में पहुुंच गईं। अभिभावकों और छात्राओं का रोष देखकर प्रशासन नींद हराम हो गई और उन्होंने रोकने का प्रयास किया। सीएम के संबोधित के दौरा काफी देर तक एसएमसी व अभिभावक अपनी मांग को लेकर अड़े रहे और विरोध भी जताया, लेकिन प्रशासन के लोगों ने उनको आगे आने नहीं दिया और उनका मांगपत्र लेकर सीएम के पास पहुंचा दिया। बाद में छात्राओं को एक गैलरी में बैठा दिया। छात्राओं को शांत करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने उनको बिस्कुट दिए। छात्राएं पानी मांगती रहीं, लेकिन पानी नहीं मिला। छात्राएं सीएम से मिलना चहाती थीं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें मिलने नहीं दिया।
प्रशासन ने दबाई बेटियों की आवाज
सैकड़ों की संख्या में पहुंची छात्राएं अध्यापकों की मांग को लेकर सीएम के कार्यक्रम में रोष जताते हुए पहुंची थीं। इससे प्रशासन के हाथ पैर फूल गए। अपनी मांगों को लेकर छात्राएं सीएम से मिलना चहाती थीं, लेकिन प्रशासन ने उनसे मिलने नहीं दिया। बेटियों का कहना है कि सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा तो दे रही है, लेकिन स्कूलों में अध्यापक नहीं भेज रही है। इससे उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के लोगों ने उन्हें सीएम तक पहुंचने तक नहीं दिया। इससे उनको काफी नराजगी है। अध्यापक नहीं होने के कारण स्कूल के परिणाम खराब आ रहे हैं।
सीएम ने की अध्यापकों की नियुक्ति की घोषणा
सीएम मनोहर लाल के पास प्रशासन के लोगों ने तुरंत मांग पत्र भेजा। सीएम ने मांग पत्र देखते ही छात्राओं की मांग पर गौर करते हुए कहा कि स्कूल में अध्यापकों की कमी नहीं रहने देगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग से पूरा डाटा लिया जाएगा और जहां-जहां पर अध्यापकों की कमी है, उसे तुरंत प्रभाव से दूर किया जाएगा।