करनाल। भ्रष्टाचार को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (डीएफएससी) पर एक बार फिर से सवाल उठे हैं। इस बार किसी एक व्यक्ति ने नहीं बल्कि जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में बैठे पूरे सदन ने ही यह कहकर मामले को और गंभीर कर दिया, कि डीएफएससी विभाग सबसे ज्यादा भ्रष्ट है। डिपो होल्डर्स से लेकर आला अधिकारियों तक पीड़ितों की कोई सुनवाई नहीं होती है और पात्र लोगों का राशन हड़पने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती। जब शिकायत की जाती है तो डिपो होल्डर के खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की जाती। इस पर सीपीएस डॉ. कमल गुप्ता ने गंभीरता दिखाते हुए डीएफएससी को तलब किया तो बताया गया कि वे बैठक में नहीं आए तो इस पर सीपीएस भी ताव खा गये और उन्होंने डीएफएससी की जांच के आदेश दिये। जांच में एसडीएम करनाल और समिति के सदस्य शामिल रहेंगे। इतना ही नहीं मंच पर बैठे पर बैठे भाजपा के जिलाध्यक्ष जगमोहन आनंद ने सरेआम कहा कि, डीएफएससी अनिल कुमार का रवैया ठीक नहीं है। जब वो हमारे साथ ही रवैया ठीक नहीं करता तो जनता के साथ कैसे बात करता होगा। बुधवार को पंचायत भवन में आयोजित कष्ट निवारण समिति की बैठक में सीपीएस डॉ. कमल गुप्ता ने 11 मामलों की सुनवाई की और आठ मामलों का मौके पर ही निपटारा कर दिया। बैठक में शिकायत लेकर पहुंची राजीवपुरम निवासी भावना और अन्य निवासियों ने बताया कि उनका डिपो होल्डर राशन नहीं देता है। डिपो होल्डर ने पिछले चार साल में उन्हें केवल 3-4 बार ही राशन दिया है। वह उसकी शिकायत कई बार डीएफएससी अनिल कुमार को कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। डीएफएससी के प्रतिनिधि ने बताया कि संबंधित प्रार्थी ने लिखकर दिया है कि उसको डिपोधारक से कोई शिकायत नहीं है। इस पर सीपीएस और समिति के सभी मेंबर भड़क उठे और पूरा सदन डीएफएससी विभाग सबसे भ्रष्ट की आवाज के गूंज उठा। सीपीएस ने मामले में संज्ञान लेते हुए विभाग के प्रतिनिधि को कहा कि शिकायतकर्ता बैठक में मौजूद नहीं है, आप स्वयं ही मामला कैसे निपटा सकते हैं? सीपीएस ने डिपो होल्डर बदलने की बात कही तो, वहां मौजूद समिति के सदस्यों ने एक एक सुर में कहा कि दूसरा होल्डर उसका भी गुरु है। सभी सदस्यों ने कहा कि एफएससी डिपो होल्डरों से मिला हुआ है और सभी जगह कमीशन का खेल चलता है। डीसी ने विभाग के प्रतिनिधि से पूछा की डीएफएससी कहां हैं? जवाब मिला की डीएफएससी कोर्ट में है। इस पर सीपीएस गुप्ता ने कहा कि डीएफएससी इस बैठक को हलके में ले रहे हैं। क्या वे बताकर कोर्ट गए हैं? वह बिना बताए कोर्ट में कैसे गए? सीपीएस ने डीएफएससी के खिलाफ एसडीएम योगेश कुमार को जांच करने के आदेश दिए हैं। समिति के सदस्य अशोक मदान और दर्शन सिंह सहगल भी सहयोग करेंगे और रिपोर्ट अगली बैठक में प्रस्तुत करेंगे। वहीं, बैठक में बिना बताए अनुपस्थित रहने पर जिला रोजगार अधिकारी को भी चार्जशीट करने के आदेश दिए हैं।
बैठक में झलका भाजपा जिलाध्यक्ष का दर्द, मेरे फोन नहीं उठाते डीएफएससी
बैठक में मंच पर मौजूद भाजपा के जिलाध्यक्ष जगमोहन आनंद का दर्द भी साफ झलका। डीएफएससी का मुद्दा चलता देख उनसे भी नहीं रहा गया और प्रदेश में हावी अफसरशाही को उन्होंने पूरे सदन के सामने रखा। जिलाध्यक्ष ने उन्होंने डीएफएससी को इतने फोन किए हैं, लेकिन डीएफएससी ने कभी न तो फोन उठाया और न ही वापिस किया। एक दो बार जब उनके साथ बात हुई तो डीएफएससी का रवैया भी ठीक नहीं था। जब वह उनकी बात नहीं सुन रहा तो जनता की कैसे सुनता होगा? जनता तो उनसे काफी परेशान होगी।
बैठक में अनुपस्थित रहने के कारण रोजगार अधिकारी चार्जशीट
बैठक में रामनगर की रजनी ने दी शिकायत में कहा था कि उसे पिछले 4 साल से बेरोजगारी भत्ता मिल रहा था, जोकि अब नहीं मिल रहा है। भत्ते की मांग को लेकर वह विभाग की कर्मचारी सुशीला से मिली। उसने भत्ते के लिए रिश्वत की मांग की। एसडीएम योगेश कुमार ने बताया कि जांच में सामने आया है कि शिकायतकर्ता के पति एलआईसी में नौकरी करते हैं और उनकी आमदनी ज्यादा है। इसलिए उसे जो 12 हजार 600 रुपये भत्ता मिला है, वह वापस जमा करवाना पड़ेगा। एसडीएम ने कहा कि विभाग की कर्मचारी सुशीला पिछले दस साल से यहीं कार्यरत और लोगों से उसकी डीलिंग ठीक नहीं है, इसलिए उसका ट्रांसफर किया जाए। सीपीएस ने ट्रांसफर करने के आदेश दिए। वहीं डीसी ने मामले के बारे में पूछा की जिला रोजगार अधिकारी बैठक में नहीं आए, विभाग के कर्मचारियों ने कहा कि वह छुट्टी पर हैं। डीसी को बिना बताए छुट्टी करने पर सीपीएस कमल गुप्ता ने रोजगार अधिकारी को अंडर रूल 7 के तहत चार्जशीट करने के आदेश दिए।
डीसी हंसे तो सीपीएस बोले-इट्स सीरियस मैटर नो लाफिंग
कष्ट निवारण समिति की बैठक में जिला रोजगार अधिकारी की अनुपस्थित के बारे में जब उपायुक्त ने उनके प्रतिनिधि से पूछा कि जिला रोजगार अधिकारी कहां है? इस पर प्रतिनिधि ने जवाब दिया कि रोजगार अधिकारी कल शाम से छुट्टी पर हैं? कल शाम से छुट्टी पर हैं... यह बात कहकर उपायुक्त मंदीप सिंह बराड़ और अन्य लोग जोर से हंसने लगे तो सीपीएस कमल गुप्ता ने डीसी की तरफ इशारा करते कहा कि इट्स सीरियस मैटर, नो लाफिंग। उन्होंने कहा कोई भी इस बात को हल्के में ना लें। यह बैठक अहम है, इसलिए कोई भी अधिकारी इसमें अनुपस्थित न रहे। अगर किसी अधिकारी को कोई भी जरूरी काम है तो वह इसकी सूचना उपायुक्त को देकर ही छुट्टी करें।