ईजाद हुईं आयरन-जिंक बढ़ाने वाली गेहूं की 12 नई किस्में
- जौ की भी तीन नई किस्में शीघ्र होंगी रिलीज, सभी हो चुकीं अनुमोदित
- ये किस्में जलवायु परिवर्तन सहनशील हैं, विपरीत मौसम में भी देंगी बेहतर उपज
देव शर्मा
करनाल। आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्व बेहतर स्वास्थ्य के लिए आवश्यक माने जाते हैं। यही कारण है कि अब देश के वैज्ञानिक गेहूं और जौ की ऐसी नई किस्में तैयार करने में जुटे हैं, जो जलवायु परिवर्तन सहनशील होने के साथ-साथ आयरन और जिंक जैसे खनिजों से भी परिपूर्ण हों।
इसी साल देश को गेहूं की ऐसी ही 12 व जौ की तीन नई किस्में मिल सकती हैं। इनमें शामिल गेहूं की दो और जौ की एक किस्म भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल द्वारा विकसित की गई हैं। केंद्र सरकार ने इनका अनुमोदन भी कर दिया है, शीघ्र ही इन्हें रिलीज किया जाएगा।
वर्ष 2023 में गेहूं की 14 नई किस्में रिलीज की गई थीं, इनमें तीन किस्में आईआईडब्ल्यूबीआर ने ईजाद की थी। जिनमें डीबीडब्ल्यू-377, डीबीडब्ल्यू-359 व डीबीडब्ल्यू-327 शामिल थीं। इन किस्मों का बीज भी इस साल किसानों को मिलना शुरू हो गया है। ये किस्में भी जलवायु परिवर्तन सहनशील हैं।
अब वर्ष 2024 में भी आईआईडब्ल्यूबीआर सहित विभिन्न अनुसंधान संस्थानों की ओर से कई नई किस्में ईजाद की गई हैं। इनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि पठारी क्षेत्रों के लिए गेहूं की एनडब्ल्यू-2222, पीबीडब्ल्यू-891,डब्ल्यूएच-1306, एकेएडब्ल्यू-5100, डीबीडब्ल्यू-443, एनआईएडब्ल्यू-4114, एचआई-1674 और एलओके-79 किस्में शामिल हैं। मध्य क्षेत्र के लिए एचआई-1674, एचआई-1669 और जीडब्ल्यू 543 शामिल हैं। इसके अलावा यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिमी बंगाल, असम आदि पूर्वी क्षेत्रों के लिए जो डीबीडब्ल्यू-386 अनुमोदित की गई है। इस किस्म को भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल ने तैयार किया है।
पश्चिमी क्षेत्र हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, पश्चिमी बंगाल और दिल्ली आदि राज्यों के लिए देर से बिजाई वाली गेहूं की एचडी-3428 किस्म अनुमोदित हुई है। इसके साथ ही जौ की भी तीन नई किस्में अनुमोदित की गई हैं। इनमें पश्चिमी क्षेत्र के लिए डीडब्ल्यूआरबी-223 (छिलका रहित), पूर्वी क्षेत्र के लिए यूपीबी-1106 और दोनों क्षेत्रों के लिए केबी-2031 किस्म को अनुमोदित किया गया है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के बीच अनाज में पोषक तत्वों की कमी भी किसी चुनौती से कम नहीं है। यही कारण है कि अनुसंधान वैज्ञानिकों द्वारा अब जो नई किस्में विकसित की जा रही हैं, उनमें गर्मी, सूखा, बारिश व अधिक ठंड आदि की सहनशीलता यानी विपरीत परिस्थितियों में बेहतर उपज देने के साथ- साथ पोषक तत्व भी भरपूर हों, इसका ध्यान रखा जा रहा है।
- आईआईडब्ल्यूबीआर के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने बताया कि इस साल भी देश को गेहूं व जौ की नई किस्में मिलने जा रही हैं। केंद्रीय फसल किस्म रिलीज कमेटी की बैठक हो चुकी है, उसमें इन नई किस्मों को अनुमोदन मिल चुका है। कुछ अन्य जांच प्रक्रियाओं के बाद इन्हें शीघ्र रिलीज किया जा सकता है। इन नई किस्मों में आईआईडब्ल्यूबीआर करनाल द्वारा विकसित गेहूं दो किस्में और जौ की एक किस्म शामिल हैं। ये नई किस्में जलवायु परिवर्तन सहनशील तो हैं ही, इनमें आयरन और जिंक की मात्रा करीब 40 से 42 पीपीएम होगी व प्रोटीन की मात्रा 12.50 प्रतिशत से अधिक होगी। इनकी उपज भी अपेक्षाकृत अधिक होगी।