महंगे दामों पर टेस्ट कराने से मिलेगी निजात, फरवरी में मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन की सौगात
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में फरवरी माह में एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) मशीन आने वाली है। मेडिकल कॉलेज की ओर से मशीन के लिए आर्डर किया जा चुका है। संभावना जताई जा रही है कि आगामी 20 दिनों में मशीन पहुंच जाएगी और इसके बाद इंस्टॉल करके शुरू किया जाएगा। बता दें कि फिलहाल मरीजों को महंगे दामों पर निजी अस्पतालों में ये टेस्ट कराना पड़ता है। इस टेस्ट के बदले पांच हजार से लेकर 10 हजार रुपये तक चार्ज किये जाते हैं। मेडिकल कालेज में मशीन आने से मरीजों को काफी लाभ मिलेगा। क्योंकि इस समय मेडिकल कालेज की ओपीडी 2000 के करीब है। इनमें से ऑर्थो, फिजिशियन समेत अन्य विभागों में ऐसे मरीज पहुंचते हैं, जिनको एमआरआई टेस्ट की जरूरत होती है, लेकिन मजबूरी में मरीज को टेस्ट के लिए बाहर जाना पड़ता है।
ये होती है एमआरआई
एक्सपर्ट के मुताबिक एमआरआई सबसे आधुनिक और शरीर के अंदरूनी अंगों की तस्वीर लेने वाली टेक्नोलॉजी है। इससे डॉक्टरों को बिना चीर-फाड़ किए शरीर के अंदर हुई गड़बड़ियों का पता लगाने का मौका मिल जाता है। एमआरआई टेक्नोलॉजी में ताकतवर चुंबकीय और रेडियो तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि शरीर में प्राकृतिक रूप से मौजूद चुंबकीय तत्वों के सामंजस्य से अंदरूनी अंगों की तस्वीर ली जा सके और पता लगाया जा सके कि मरीज के किसी अंग में दिक्कत है।
शरीर के किसी भी अंग की करा सकते हैं एमआरआई
एमआरआई से पूरे शरीर यानी सिर से लेकर पांव तक की जांच की जा सकती है। यही नहीं त्वचा के ऊपरी हिस्से से लेकर शरीर की गहराई में छिपे अंगों तक इस मशीन की पहुंच है। इस पद्धति से तस्वीर लेने में हड्डियों, भारी मांसपेशियों आदि का असर नहीं होता जबकि दूसरी किसी अन्य टेक्नोलॉजी से ली गई तस्वीरें उक्त समस्याओं के कारण खराब आती हैं। एमआरआई से शरीर के किसी भी हिस्से के, किसी भी स्तर की तस्वीरें ली जा सकती हैं। एमआरआई की जांच में दूसरे परीक्षणों के मुकाबले अधिक खर्च करना पड़ता है
बीमारियों के कारणों का लगता है पता
कई बार डॉक्टर को मरीज की बीमारी का पता नहीं चलता, तो कई बार डॉक्टर को यह पता करना होता है कि यह बीमारी शरीर में कहां तक फैली है। इन सब बातों को स्पष्ट करने के लिए डॉक्टर मरीज को एमआरआई कराने के लिए कहते हैं। जिससे उस बीमारी के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है। उसके आधार में डॉक्टर उस मरीज का अच्छे से इलाज कर पता है।
10 से 15 मरीजों का होता है सीटी स्कैन
मेडिकल कॉलेज में 10 से 15 ऐसे मरीज आते हैं, जिनका डॉक्टर को सीटी स्कैन कराना पड़ा है। लेकिन कई बार सीटी स्कैन होने के बाद भी डॉक्टर को बीमारी का पता नहीं लग पाता, इसलिए डॉक्टर उन मरीजों को एमआरआई कराने के लिए कहते हैं। जिसके लिए मरीज को प्राइवेट अस्पताल में जाना पड़ता है और पांच से छह हजार रुपये चुकाने पड़ते हैं।
कॉलेज की ओर से एमआरआई मशीन का ऑर्डर कर दिया गया है। करीब 20 दिनों में मशीन मेडिकल कॉलेज में आ जाएगी। इसके बाद मशीन को इंस्टॉल किया जाएगा। मशीन के आने से मरीजों को काफी सेवाएं मिलेंगी। हमारी कोशिश रहेगी कि मशीन के आते ही जल्द उसे चालू किया जाए।
-डॉ. मुनीष परुथी, डीएमएस, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल।