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फसल के अवशेषों से बनाई जाएगी बिजली

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फसल के अवशेषों से बनाई जाएगी बिजली
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष (पराली) से बिजली बनाने का प्लांट लगाया जाएगा। भारत सरकार के गैर-परम्परागत ऊर्जा विभाग की ओर से इस तरह का प्लांट लगाने के लए करनाल को चुना गया है। नगर निगम की ओर से इसकी प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई है। करनाल-काछवा रोड पर नगर निगम द्वारा बनाए गए स्लाटर हाउस में एफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) में, एफ्यूलेंट के साथ-साथ अवशेषों का दोहन करके उससे मिथेन गैस बनाई जाएगी, जो जेनरेटर सैट को चलाएगी, जेनरेटर सैट से पावर बिजली में कन्वर्ट होगी। स्लाटर हाउस की आवश्यकता पूरी करने के बाद जितनी बिजली बचेगी, उसे ग्रिड अथवा एचटी लाईन में डाला जाएगा। प्लांट के लिए पराली जुटाने के लिए ऊंचा समाना गांव का चुनाव किया गया है। शुरू में सहायक इंजीनियर कृषि (एईए) के कार्यालय में उपलब्ध स्ट्राबेलर मशीन को लिया जाएगा, जो गांव में जाकर खेतों में खड़े स्टबल को काटकर उसके गठ्ठे बनाएगी। ऐसे गठ्ठे प्लांट में लाए जाएंगे। इस कार्य के लिए एईए कार्यालय किसानों से निर्धारित व जायज किराया वसूलेगा। प्लांट से तैयार जो बिजली यूएचबीवीएन को बेची जाएगी, उतनी राशि किसानों के बिजली बिलों में से कम कर दी जाएगी। खेतों से स्टबल उठाने के बाद किसान को उसे जलाने से छुटकारा मिलेगा।
किसानों से होगा अनुबंध
किसानों के खेतों से स्टबल लेने के लिए नगर निगम के माध्यम से एक अनुबंध किया जाएगा, जो ग्राम पंचायत स्तर पर होगा। प्लांट के लिए प्रतिदिन 10 टन स्टबल लिया जाएगा। जितनी बिजली पैदा होगी, उसके लिए प्लांट में नैट मिटरिंग सिस्टम किया जाएगा, जिससे पता चलेगा कि कितनी बिजली उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम को दी गई। निगमायुक्त ने बताया कि यह प्लांट पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाया जाएगा। इस पर 1 करोड़ 15 लाख की अनुमानित राशि खर्च होने की संभावना है। नगर निगम द्वारा इस अनुमान के लिए सरकार को लिख दिया गया है, जहां से जल्द ही मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है। इस राशि से स्लाटर हाउस में ईटीपी के मौजूदा ढांचे के साथ-साथ जिस मशीनरी की आवशयकता होगी, उसे भी लगाया जाएगा।
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अक्टूबर तक चालू होगा प्लांट : डा. सोनी
निगम आयुक्त डा. प्रियंका सोनी ने बताया कि हरियाणा धान उत्पादक का एक बड़ा क्षेत्र है। यहां के किसान फसल कटाई के बाद खेतों में खड़े अवषेशों को आग लगा देते हैं, जिससे पर्यावरण दूषित होता है और ऐसा करना गैर-कानूनी भी है। खेतों में लगाई आग से उठने वाले धुएं का असर राजधानी दिल्ली तक जाता है। इस समस्या को देखते हुए सरकार ने निर्णय लिया है कि पराली को आग लगाने की बजाए उससे इस तरह के प्लांट के जरिये फ्यूल या बिजली जैसी ऊर्जा पैदा की जा सकती है, जिससे परम्परागत स्त्रोतों की बचत होगी और कम खर्च पर पावर बनाकर उसका प्रयोग किया जा सकता है। प्लांट के लिए प्रोसेस शुरू कर दिया है, आगामी अक्टूबर माह तक इसे चालू किया जाएगा।
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