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एक घंटे तक जनरल वार्ड में पड़ी रही बुजुर्ग की डैड बाडी

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एक घंटे तक जनरल वार्ड में पड़ी रही बुजुर्ग की डैड बाडी
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अमर उजाला ब्यूरो
घरौंडा। कल्पना चावला मेडिकल कालेज में लगातार सामने आ रही डाक्टरों की लापरवाही के बाद घरौंडा के पीएचसी अस्पताल की भी बड़ी चूक सामने आई है। जनरल वार्ड में दाखिल एक बुजुर्ग ने अचानक दम तोड़ दिया और करीब एक घंटे तक डैड बॉडी बैड पर पड़ी रही। काफी देर तक वृद्ध के शरीर में कोई हलचल न देख मरीजों ने अस्पताल स्टाफ को शिकायत की। इसके बाद खुलासा हुआ कि बुजुर्ग दम तोड़ चुका है। मीडिया के कैमरों को देख अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और डॉक्टरों ने आनन-फानन में शव को दूसरे खाली वार्ड में शिफ्ट किया।
हालांकि, अस्पताल प्रशासन अपनी लापरवाही मानने के लिए कतई तैयार नहीं है। गांव गढ़ीभरल निवासी बुजुर्ग सुरेश कुमार को किसी अज्ञात व्यक्ति ने 9 सितंबर को अस्पताल में भर्ती करवाया था, जिसका इलाज अस्पताल में ही चल रहा था। बुजुर्ग ने भगवा रंग के कपड़े पहने हुए थे। डॉक्टरों के अनुसार बुजुर्ग को करनाल रेफर किया जाना था, लेकिन बुजुर्ग का कोई परिजन न होने के कारण उसको रेफर नहीं किया जा सका। बुजुर्ग का अस्पताल में ही इलाज चलता रहा, लेकिन सोमवार की सुबह बुजुर्ग को कार्डिया का अटैक आया और उसकी मौत हो गई। बुजुर्ग की मौत के बारे में जनरल वार्ड के किसी भी मरीज को नहीं पता था और वे उस बॉडी के आस-पास घूमते-फिरते रहे, लेकिन जब मरीजों को बुजुर्ग की मौत की जानकारी हुई तो मरीजों व अन्य परिजनों दूरी बनानी शुरू कर दी और अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगाए। मरीज के साथ आए एक परिजन का कहना है कि बुजुर्ग कई घंटे से हिला ढुला तक नही है। इस दौरान कोई भी डॉक्टर या कर्मचारी उसकी सुध लेने तक नही आया। बुजुर्ग काफी समय से मृत पड़ा है और अस्पताल प्रबंधन ने उसकी बॉडी को दूसरे वार्ड में शिफ्ट तक नहीं किया। इससे पता चलता है कि अस्पताल कितना ढिला व लापरवाह है।
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सवालों से बचती नजर आई डॉक्टर
मेडिकल ऑफिसर सुनीता भौरिया से बात करनी चाही तो वे कैमरे व सवालों से बचती नजर आई। उनका कहना था कि बुजुर्ग को उन्होंने एक घंटे पहले ही मृत घोषित कर पुलिस को सूचना दे दी थी। बॉडी एक घंटे तक वार्ड में पड़े रहने के बारे में सवाल किया गया तो कोई संतोषजनक उत्तर नही दे पाई।
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बॉडी बेड पर ही रहेगी और कहां जाएगी : एसएमओ
एसमओ कुलबीर सिंह का कहना है कि बुजुर्ग को मृत घोषित करने के बाद डॉक्टर ने स्टाफ के कर्मचारियों को बॉडी दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने के लिए कहा था। इसके बाद डॉक्टर एमरजेंसी वार्ड में दूसरे मरीजों के साथ बिजी हो गई। बॉडी को वार्ड से शिफ्ट किए जाने के सवाल पर उन्होंने बेतुका सा जवाब दिया-उनका कहना था कि बॉडी तो बेड पर ही रहेगी, और कहां जाएगी?
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