अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सीएम सिटी में साढ़े छह सौ करोड़ रुपये की लागत से बने कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज और नागरिक अस्पताल होने के बावजूद भी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही है। आज भी मरीजों को इलाज के लिए भटकाना पड़ रहा है और हारकर प्राइवेट अस्पताल में ही जाकर इलाज कराना पड़ रहा है। क्योंकि करोड़ों रुपये से आई एमआरआई मशीन और डिजिटल एक्स-रे मशीन इन संस्थानों के कमरों में बंद पड़ी है जिनपर धुल जम रही है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद भी मरीजों को इन मशीनों को लाभ नहीं मिल रहा है। इसी कारण, मरीजों को मजबूरन प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना पड़ रहा है। बता दें मेडिकल कॉलेज में तीन महीने पहले एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) मशीनें आई थी जो अभी तक कमरे में बंद है। ऐसा ही हाल नागरिक अस्पताल का है। वहां भी डिजिटल एक्स-रे मशीन को आए हुए एक महीना 20 दिन बीत चुके हैं। उसे भी कमरे में बंद कर ताला लगाया हुआ है और करीब 20 साल पुरानी एक्स-रे मशीन से एक्सरे किए जा रहे हैं। इसकी रिपोर्ट के लिए मरीजों को दो-दो घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।
ट्रायल बेस पर कुछ दिनों के लिए चलाई थी एमआरआई मशीन
मेडिकल कॉलेज में करीब तीन महीने पहले एमआरआई मशीन आई थी, जिसे कुछ दिनों के लिए ट्रायल बेस पर भी चलाया गया था, लेकिन फिर इसे बंद कर दिया। जो अभी तक बंद है। एमआरआई मशीन को बंद क्योंकि किया, इसका अधिकारी जवाब देने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि मशीन को इंस्टाल करने में एक महीने से ज्यादा का समय लग जाता है।
प्राइवेट अस्पताल में लुट रहे हैं मरीज
एमआरआई मशीन होने के बावजूद भी मरीज प्राइवेट अस्पताल में जाकर लुट रहे हैं, क्योंकि डॉक्टर मरीज को एमआरआई कराने के लिख देते हैं। लेकिन मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन कमरे में बंद हैं। इस लिए मरीज को मजबूरन प्राइवेट अस्पताल में पांच से सात हजार रुपये में एमआरआई करानी पड़ रही है।
मरीज बोले, प्राइवेट अस्पताल होता तो दस दिन में ही शुरू हो जाती दोनों मशीनें
डिजिटल एक्स-रे व एमआरआई मशीन की सुविधा ना मिलने के कारण मरीजों में दोनों संस्थानों के अधिकारियों के प्रति रोष बढ़ रहा है। मरीज रोहताश, सोहन लाल, मनीष, सुरेखा आदि ने बताया कि यदि एमआरआई और डिजिटल एक्स-रे मशीन होती तो ये दस दिनों में ही चलने लगती, लेकिन कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज व नागरिक अस्पताल सरकारी हैं, इसी कारण इन मशीनों को चलने में इतना समय लग रहा है। आखिरकार सरकारी संस्थानों में कब सुधरेंगे हालात, कब अधिकारी गंभीरता से करेंगे काम?
20 साल पुरानी मशीन से कर रहे हैं एक्स-रे, मरीज रिपोर्ट के लिए करते हैं दो-दो घंटे इंतजार
नागरिक अस्पताल में 30 जुलाई को डिजिटल एक्स-रे मशीन आ गई थी। जिसे एक महीना 20 दिन हो गए हैं, लेकिन अभी भी अस्पताल में 20 साल पुरानी एक्स-रे मशीन से एक्स-रे किए जा रहे हैं। इसकी रिपोर्ट के लिए मरीजों को दो-दो घंटे इंतजार करना पड़ता है।
डिजिटल एक्स-रे मशीन से आती है दो मिनट में रिपोर्ट
डिजिटल एक्स-रे मशीन से एक्स-रे करने में जितना समय लगता है उससे कम समय रिपोर्ट में लगता है। एक्स-रे करने के दो मिनट में ही रिपोर्ट मरीज के हाथ में होती है। इस एक्स-रे मशीन की जो फिल्म होती है वह पानी में भी खराब नहीं होती।
ये बोले, अधिकारी
डिजिटल एक्स-रे मशीन की फिल्म कल आ जाएगी और एक दो दिन में डिजिटल एक्स-रे मशीन को शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल पुरानी एक्स-रे मशीन से एक्स-रे किए जा रहे हैं। डिजिटल एक्स-रे मशीन शुरू होने पर दोनों से एक्स-रे किए जाएंगे।
-डॉ. पीयूष शर्मा, पीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल, करनाल।
एमआरआई मशीन को इंस्टाल करने में महीने से ज्यादा समय लगता है। ट्रायल बेस पर एमआरआई मशीन चलाई थी। अब एक दो दिन में दोबारा एमआरआई शुरू कर दी जाएगी।
-डॉ. मुनीष पुरथी, डीएमएस, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल।