माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव से एक बार फिर निर्यात प्रभावित हो गया है। पिछले करीब एक माह से हरियाणा का एक लाख टन चावल बंदरगाहों और समुद्री जहाजों में फंसा है।
ऐसे में माल और भुगतान अटकने से चावल कारोबारी चिंता में पड़ गए हैं। क्योंकि तैयार माल पर ब्याज और बीमा सहित अन्य लागत भी बढ़ रही हैं। इससे उन्हें नुकसान का डर सताने लगा है। जबकि तीन माह बाद धान खरीद का नया सीजन शुरू होगा। कारोबारियों ने केंद्र सरकार से राहत दिलाने की मांग की है।
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं बोर्ड ऑफ ट्रेड के गैर-सरकारी सदस्य सतीश गोयल ने बताया कि करीब एक लाख टन बासमती चावल बंदरगाहों या जहाजों से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। स्थिति लंबे समय तक नहीं सुधरी तो माल खराब होने का भी खतरा है।
उन्होंने बताया कि ज्यादातर माल कांडला पोर्ट पर पड़ा है, जबकि कुछ समुद्र में जहाजों के जरिये बीच रास्ते में रुका हुआ है। व्यापारी इसलिए चिंता में हैं क्योंकि बैंक ब्याज और परिवहन खर्च भी बढ़ गया है।
मिडिल ईस्ट भारतीय बासमती चावल का बड़ा बाजार है, वहां जाने वाला चावल हॉर्मूज स्ट्रेट प्रभावित होने से ठप पड़ गया है। ईरान, इराक और सऊदी अरब में प्रति वर्ष 10-10 लाख टन निर्यात होता है। तनाव के चलते पूरा क्षेत्र अस्थिर है, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है। संबंधित का कहना है कि स्थिति सामान्य होने तक यही स्थिति रहेगी।