तरावड़ी की बालाजी राइस मिल में हुए धान घोटाले में गिरफ्तार डीएफएससी विभाग के पूर्व सहायक निरीक्षक रामफल ने पुलिस के समक्ष बड़ा खुलासा किया है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि बालाजी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल धान की आवक ही नहीं हुई थी। फर्जी गेटपास से मिल में धान की आवक दिखाई गई थी। यूपी और बिहार से सस्ते रेट पर चावल लाकर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को देना था। जांच न होती तो सरकार को सस्ते रेट का चावल दे देते।
बुधवार को चार दिन के पुलिस रिमांड के बाद आरोपी रामफल को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। पुलिस को आरोपी से बहुत से अहम तथ्य मिले हैं। इन्हीं के आधार पर पुलिस ने आगामी जांच शुरू कर दी है। मामले में बालाजी राइस मिल के मालिक व संचालक मोहित, सुरेंद्र, पार्टनर अरुण और खाद्य आपूर्ति विभाग का निलंबित निरीक्षक देवेंद्र पुलिस गिरफ्त से बाहर है। इनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। फर्जीवाड़े में शामिल अन्य आरोपियों के नाम का भी खुलासा आरोपी ने पुलिस के समक्ष किया है।
तरावड़ी थाना के जांच अधिकारी हरविश कुमार ने बताया कि पुलिस ने चार दिन के रिमांड के बाद आरोपी को अदालत में पेश करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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अधिकारियों के शामिल होने की आशंका
आरोपी के खुलासे के बाद धान घोटाले में पुलिस की जांच अब फर्जी गेटपास मामले की ओर घूम गई है। पुलिस अब मार्केट कमेटी के अधिकारियों से रिकाॅर्ड तलब करेगी। पता लगाया जाएगा कि बालाजी राइस मिल में धान की आवक के कितने गेटपास फर्जी काटे गए। मार्केट कमेटी अधिकारियों के भी घोटाले में शामिल होने की आशंका है।