- सभी मरीज मल्टीबैसिलरी (एमबी) श्रेणी में शामिल, एक वर्ष तक चलेगा इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुष्ठ रोग खोज अभियान (एलसीडीसी) के तहत चल रहा सर्वे पूरा हो चुका है। सर्वे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठित टीमों को 1617 संदिग्ध व 10 कुष्ठ रोगी मिले हैं। इसमें खास बात ये है कि इन 10 मरीजों में पांच मरीज एक ही परिवार के हैं। इनमें दो बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा दो मरीजों की रिपोर्ट आनी है। स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि हुए आठ मरीजों का इलाज नागरिक अस्पताल करनाल से शुरू करवा दिया है।
सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि एलसीडीसी के तहत जिले में 13 से 26 मई तक 1204 टीमों ने तीन लाख 31 हजार 506 घरों सहित झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले 14 लाख 82 हजार 791 जनसंख्या की जांच की है। जिसमें से 1617 संभावित कुष्ठ रोगी पाए गए हैं। जिनकी चर्म रोग विशेषज्ञ से जांच कराई गई है। जांच में कंफर्म लगने वाले मरीजों की कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज से स्लिट स्किन स्मीयर व स्किन बायोप्सी टेस्ट कराया गया है। जिनमें से 10 मरीजों की पुष्टि हुई है। वहीं दो मरीजों की रिपोर्ट आनी है। पुष्टि हुए आठ मरीजों का इलाज नागरिक अस्पताल करनाल की चर्म रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में शुरू करवा दिया गया है। उन्होंने बताया कि 10 मरीजों में से दो मरीज मध्य प्रदेश के थे। स्वास्थ्य विभाग की पुष्टि होने के बाद दोनों मरीज मध्य प्रदेश चले गए। ऐसे में मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग को मरीजों की जानकारी देकर उनकी दवाई शुरू करवाने को कहा गया है।
विकलांग श्रेणी में दो मरीज मिले
एलसीडीसी कार्यक्रम के तहत मिले में 10 मरीजों में दो ऐसे भी मिले हैं जो विकलांगता की श्रेणी में आते हैं। चिंता की बात ये है कि दोनों मरीज नाबालिग हैं। इसके अलावा सभी मरीज मल्टीबैसिलरी (एमबी) श्रेणी के हैं यानी सभी मरीजों की एक वर्ष तक लगातार दवाई चलेगी।
कुष्ठ रोग एक सामान्य त्वचा रोग
उप-सिविल सर्जन डाॅ. सिम्मी कपूर ने बताया कि कुष्ठ रोग एक सामान्य त्वचा रोग है जो कि कुष्ठ रोगी के खांसने व छींकने से कीटाणु स्वस्थ व्यक्ति में प्रवेश करने से होता है। शरीर पर लाल, तांबिया दाग, हाथ पैरों का सुन्नपन्न, नसों में दर्द व शरीर पर गांठ कुष्ठ रोग के लक्षण हैं। कुष्ठ रोग की जांच व इलाज सभी स्वास्थ्य केंद्रों में निशुल्क में किया जाता है। कुष्ठ रोग छूत की बीमारी नहीं है। यह मरीज को हाथ लगाने से नहीं फैलता। मरीज से भेदभाव न करें।