रजवाहे की टूटी पटड़ी दिखाता आदमी
- फोटो : Amar Ujala
रजबाहे की पटड़ी में लीकेज होने से पटड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूट जाने की घटना सामने आई है। यह पटड़ी टूटने से किसानों की धान करीब 10 एकड़ फसल पानी में डूब गई। यह घटना घोगड़ीपुर गांव के पास से बह रही डाइवर्जन नहर से निकलने वाले बजीदा रजबाहे में शनिवार सुबह करीब 5 बजे पानी छोड़ने के बाद घटित हुई है। इस घटना में रजबाहे की करीब 12 फुट पटड़ी बह गई है। किसानों की ओर से राजबाहे की पटड़ी टूटने की सूचना नहरी विभाग के बेलदार को दी गई। सूचना मिलने के बाद बेलदार ने पश्चिमी यमुना नहर के ऊपर बनाए गए गेट को तुरंत बंद कर दिया। गेट के बंद होने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली नहीं तो किसानों का फसलों को भारी नुक्सान हो सकता था।
मिली जानकारी के मुताबिक रजबाहे से किसानों के खेतों में पानी देने के लिए कई दिनों से साईफन बनाने का कार्य चल रहा था। गत शुक्रवार को साईफन बनाने का कार्य पूरा हो गया था। लेकिन शनिवार की सुबह करीब 5 बजे रजबाहे में पानी छोड़ दिया गया। बताया गया है की जिस जगह पर साईफन बनाया गया है वहां पटड़ी की मिट्टी पक्की न होने की वजह से पटड़ी का हिस्सा पानी का दबाव न सह सका और पटड़ी का हिस्सा बह गया। देखते ही देखते दर्जन भर खेतों में पानी भर गया। किसानों का आरोप है कि नहरी विभाग के संबंधित अधिकारियों की लापरवाही की वजह से रजबाहे की पटड़ी टूटने की घटना घटित हुई है। किसानों ने इस घटना की कथित तौर पर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
पटड़ी को पाटने का काम युद्ध स्तर पर जारी : अरोड़ा
नहरी विभाग के उपमंडल अधिकारी एमके अरोड़ा का कहना है की टूटी हुई पटड़ी को पाटने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। जल्द ही इस कार्य को मुक्कमल कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस ठेकेदार ने साईफन बनाने का कार्य किया है। जब तक रजबाहे की पटड़ी को सही नहीं किया जाएगा तब तक ठेकेदार की पेमेंट नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि रजबाहे में किसानों की मांग पर पानी छोड़ा गया था।