44-कैथल। विद्यार्थियों का फूल मालाओं से स्वागत करते हुए सदस्य।
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पूंडरी। भविष्य को लेकर माथे पर चिंता की लकीरें हैं लेकिन जान की सलामती के लिए गांव आहूं की पूजा व उनके भाई अंकुश को आखिर वतन वापस आना पड़ा। एमबीबीएस की छात्रा पूजा व छात्र अंकुश पढ़ाई बीच में छोड़ कर यूक्रेन - रूस युद्ध के चलते यूक्रेन से अपने घर लौट आए। दोनों के घर पहुंचते ही परिजनों के आंखों से खुशी के आंसू छलक आए। दोनों भाई-बहन की सकुशल घर वापसी के बाद परिजनों ने राहत की सांसें ली। पूजा व अंकुश अपनी पढ़ाई को लेकर चिंतित भी हैं। उनका कहना है कि यूक्रेन में हालात सामान्य होते हैं तो वे फिर वहां जाकर अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं।
यूक्रेन से वापस भारत आए अंकुश व पूजा ने बताया कि वह एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए छह वर्ष के लिए 2017 में यूक्रेन गए थे और उनका यह पांचवां वर्ष था। यूक्रेन-रूस युद्ध के चलते उन्हें वापस आना पड़ा। उन्होंने कहा कि खुशी है कि वे मुश्किल हालातों के कारण सकुशल घर लौट आए लेकिन अभी उनकी पढ़ाई अधूरी है। इसलिए वह भविष्य को लेकर चिंतित भी हैं। अंकुश और पूजा ने बताया कि यूक्रेन रूस युद्ध की आहट होते ही उन्हें वापस आने का अलर्ट हुआ तो उन्होंने हंगरी बॉर्डर आने पर भारतीय एंबेसी की सहायता ली।
उन्हें आने में कोई दिक्कत नहीं आई और फ्लाइट का भी कोई चार्ज नहीं लिया गया। भारत सरकार द्वारा छात्रों को आने के लिए निशुल्क सुविधा दी जा रही है जोकि सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सभी भारतीय छात्रों को जितनी जल्दी हो सके वापस स्वदेश लाने के लिए कार्य करे। पूजा व अंकुश ने कहा कि यदि हालात सामान्य होते हैं तो वह वापस जाकर अपनी शिक्षा पूरी करके भविष्य बनाना चाहते हैं। इस मौके पर उनके पारिवारिक सदस्यों सहित अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे। इधर फतेहपुर के योगेश व पूंडरी निवासी तनिष्क और सिकंदर ने भी वतन वापसी की। जिला प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों का सकुशल पहुंचने पर स्वागत किया गया। तहसीलदार पूंडरी जोगिंद्र धनखड़ ने युवाओं का स्वागत किया।