संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। विदेश में रोजगार पाने की चाह रखने वाले युवाओं के सपनों को नकली एजेंट चकनाचूर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापनों और झूठे वादों के जरिए एजेंट लाखों रुपये हड़प रहे हैं। कई युवक एक से दो साल तक एजेंटों के पीछे भटकते रहते हैं, लेकिन न तो वीजा मिलता है और न ही रुपये वापस। स्थिति यह है कि थानों में लगातार ऐसे मामलों की शिकायतें दर्ज हो रही हैं, लेकिन ठगी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
कैथल जिले में पिछले तीन वर्षों में 113 ठगी के मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें से पुलिस 50 के करीब आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, 21 युवाओं को पुलिस किडनैपरों के चंगुल से छुड़ा चुकी है। जिले में एक भी एजेंट अधिकृत नहीं है, इसके बावजूद 60 से अधिक सेंटर कैथल शहर, कलायत, राजौंद, पूंडरी, ढांड और गुहला-चीका में खुलेआम चल रहे हैं। प्रशासनिक कार्रवाई के अभाव में ये सेंटर युवाओं को भ्रमित कर रहे हैं।
12वीं के बाद विदेश जाने की होड़ ः विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में युवाओं का विदेश जाने का रुझान तेज़ी से बढ़ा है। अधिकांश युवा 12वीं के बाद उच्च शिक्षा की बजाय आईलेट्स सेंटरों का रुख करते हैं। कई छात्र दो-दो साल तक परीक्षा पास नहीं कर पाते, फिर सेंटर संचालक उन्हें सीधे दूसरे देशों में भेजने का लालच दे देते हैं। नतीजतन, युवा हजारों रुपये गंवाने के साथ ठगी के शिकार बन जाते हैं। राज्य में हर महीने औसतन 13 से 15 इमिग्रेशन फ्रॉड के मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
आपबीती
फेसबुक पर मिला एजेंट फिर फंसाया जाल में
राजौंद निवासी संदीप ने बताया कि उसने फेसबुक पर एक आईलेट्स का पता देखा था। वहां मिले राजबीर नामक एजेंट ने अमेरिका भेजने के लिए 40 लाख रुपये मांगे, लेकिन उसने 20 लाख रुपये ही दिए। 2022 से अब तक उसका बेटा न विदेश जा सका, न ही पैसा वापस मिला।
नौ लाख रुपये हड़पे
कैथल निवासी पूनम ने बताया कि वह घरों में सफाई का काम करती है और अपनी बेटी को विदेश भेजना चाहती थी। गांव मानस निवासी सुरेश ने खुद को एजेंट बताकर उससे साढ़े आठ लाख रुपये ले लिए। न तो वीजा लगा और न ही पैसे लौटे। आरोपी ने कुल खर्च 30 लाख रुपये बताया था।
युवाओं को केवल अधिकृत एजेंटों के माध्यम से ही विदेश जाना चाहिए। यदि कोई आईलेट्स सेंटर या एजेंट ठगी करता है, तो तुरंत पुलिस को शिकायत दें। -उपासना यादव, एसपी कैथल