संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। क्षेत्र के किसानों के खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह पककर ‘पीला सोना’ बन चुकी है। फसल के तैयार होते ही किसानों ने कटाई से पहले की तैयारियां तेज कर दी हैं। जूण और बेढ़ बांटने का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है, ताकि कटाई के समय फसल और तूड़ी को समेटने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों हर ओर किसान खेतों के कामों में व्यस्त नजर आ रहे हैं। किसान महावीर, रामू, रामफल, सुरेंद्र, हीरा, सतपाल, नन्हू और दीपक ने बताया कि बढ़ती गर्मी और तेज धूप के कारण गेहूं की फसल तेजी से पक रही है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो आने वाले कुछ दिनों में कटाई का कार्य शुरू हो जाएगा।
किसानों का कहना है कि जूण और बेढ़ बांटने जैसे कार्य पहले ही पूरे कर लेना जरूरी होता है, क्योंकि फसल तैयार होने के बाद समय की कमी के कारण जल्दबाजी की स्थिति बन जाती है। वर्तमान समय में अधिकांश किसान कम्बाइन मशीनों के जरिए कटाई करवा रहे हैं, वहीं पशुपालन से जुड़े किसान अब भी हाथ से कटाई को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध हो सके।
पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलाव तेजी से हुआ है। अब कम्बाइन और स्ट्रा रीपर के उपयोग से गेहूं की फसल को संभाला जा रहा है, जिससे पारंपरिक थ्रेसिंग का काम धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
कुछ किसानों ने बताया कि आधुनिक बीजों वाली फसल को अधिक समय तक खेत में खड़ा रखना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि ये फसलें देरी को सहन नहीं कर पातीं।