कलायत। नगर में राधा जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में कार्यक्रमो का आयोेेजन किया गया । इस दौरान मंदिरों में राधा रानी की विशेष पूजा अर्चना हुई और पंचामृत से स्नान करवाया। अधिकांश घरों में महालक्ष्मी के धागों को बांधने की परंपरा का निर्वहन हुआ। रविवार से शुरू हुए महालक्ष्मी के व्रत 16 दिनों तक चलेंगे।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया की सनातन परंपरा में धन की देवी मां महालक्ष्मी की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। इनकी कृपा और आशीर्वाद से ही जीवन की सभी जरूरतें पूरी होती हैं और इंसान को सारे सुख प्राप्त होते हैं। धन की देवी मां महालक्ष्मी की कृपा बरसाने वाला पावन व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी से प्रारंभ होता है और इसे पूरे 16 दिनों तक रखा जाता है।
इस व्रत को शुरू करने से पूर्व महिलाएं महालक्ष्मी के 16 तार वाले धागों में 16 गांठ लगाकर उन्हें हल्दी में रंग कर पीला रंग देती हैं। फिर इन धागों को या तो व्रत करने वाली महिला अपने हाथ पर बांधती है या फिर उसे घर के मंदिर या किसी भी पवित्र स्थान पर बांधती है। ये पवित्र धागे पूरे 16 दिनों तक बांधे जाते हैं और पितृपक्ष की अष्टमी 14 सितंबर को खोले जाऐेंगे। सनातन परंपरा में देवी-देवताओं की कृपा पाने के लिए मंत्र जप अत्यधिक प्रभावी उपाय माना गया है।
ऐसे में महालक्ष्मी व्रत करने वाले साधक को प्रतिदिन उनकी पूजा में श्री महालक्ष्मी अष्टकम स्तोत्र का पाठ अधिक से अधिक करना चाहिए। हिंदू मान्यता के अनुसार महालक्ष्मी अष्टकं का पाठ जीवन की सभी आर्थिक दिक्कतों को दूर करके धन-धान्य दिलाने वाला है। संवाद